‘पापा… पापा…’ डेढ़ साल की वो गुड़िया और खामोश पिता, कलेजा चीर देगा ये मंजर
महज डेढ़ साल की उम्र… अभी तो जुबान भी ठीक से नहीं खुली है. दुनिया क्या है, जंग क्या है, शहादत क्या है… उसे कुछ नहीं पता. उसे बस इतना पता है कि सामने लकड़ी के उस बक्से में, सफेद कफन और तिरंगे के बीच जो चेहरा नजर आ रहा है, वो उसके पापा हैं….