congress manifesto | पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए कांग्रेस ने जारी किया मेनिफेस्टो, क्या ‘ममता के जादू’ और ‘मोदी की गारंटी’ के बीच बना पाएगी अपनी जगह?
कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की बिसात बिछ चुकी है. 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होने वाले दो चरणों के मतदान से पहले, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कोलकाता में पार्टी का आधिकारिक घोषणापत्र (Manifesto) जारी किया. कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र को ‘न्याय पत्र’ का नाम दिया है, जिसमें पांच मुख्य स्तंभों युवा न्याय, नारी न्याय, किसान न्याय, श्रमिक न्याय और हिस्सेदारी न्याय पर जोर दिया गया है. 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले कांग्रेस इस घोषणापत्र के जरिए त्रिकोणीय मुकाबले में खुद को मजबूत दिखाने की कोशिश कर रही है. कांग्रेस ने महिलाओं को हर महीने 2000 रुपये और ग्रेजुएशन तक फ्री में शिक्षा का वादा किया है.
कांग्रेस के घोषणापत्र की 5 बड़ी बातें
महालक्ष्मी योजना: कांग्रेस ने वादा किया है कि सरकार बनने पर गरीब परिवार की सबसे बुजुर्ग महिला को सालाना 1 लाख रुपये दिए जाएंगे. यह सीधे तौर पर टीएमसी की ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना का बड़ा संस्करण माना जा रहा है.
युवाओं को ‘पहली नौकरी’ का अधिकार: डिप्लोमा या डिग्री धारक हर युवा को एक साल के लिए 1 लाख रुपये के मानदेय के साथ प्रशिक्षुता का अधिकार देने का वादा.
किसानों को MSP की कानूनी गारंटी: स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार एमएसपी (MSP) की कानूनी गारंटी देने का संकल्प.
श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा: मनरेगा की दिहाड़ी बढ़ाकर 400 रुपये करने और मुफ्त स्वास्थ्य बीमा का वादा.
जाति जनगणना: राज्य में सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए जाति आधारित जनगणना कराने का वादा.
कांग्रेस का दांव कितना कारगर होगा?
कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में ‘आर्थिक न्याय’ को केंद्र में रखा है. खड़गे ने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य बंगाल के उस गरीब तबके को साधना है जो टीएमसी के भ्रष्टाचार और भाजपा के सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के बीच विकल्प तलाश रहा है.
टीएमसी की चुनौती
ममता बनर्जी की टीएमसी अपनी मौजूदा लोक-कल्याणकारी योजनाओं के भरोसे है. कांग्रेस का 1 लाख रुपये सालाना का वादा टीएमसी की मौजूदा योजनाओं के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है.
भाजपा का काउंटर
भाजपा जहां ‘डबल इंजन’ और ‘सोनार बांग्ला’ के साथ 5 लाख सरकारी नौकरियों का वादा कर रही है, वहीं कांग्रेस ने ‘अधिकार आधारित’ रोजगार का मुद्दा उठाकर मध्यवर्ग को लुभाने की कोशिश की है.
बंगाल में कब होंगे चुनाव?
पश्चिम बंगाल विधानसभा के 294 सीटों को लेकर दो चरणों में मतदान होंगे. पहले चरण के लिए 23 अप्रैल वोट डाले जाएंगे और दूसरे चरण में 29 अप्रैल को मतदान होगा. 4 मई को नतीजे घोषित किए जाएंगे. पश्चिम बंगाल में कांग्रेस लंबे समय से अपनी खोई हुई जमीन तलाश रही है. मल्लिकार्जुन खड़गे ने घोषणापत्र जारी करते हुए कहा कि ‘यह केवल कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि जनता के साथ हमारा अनुबंध है.’
हालांकि, बंगाल का चुनावी इतिहास बताता है कि यहां घोषणापत्रों से अधिक ‘चेहरे’ और ‘ध्रुवीकरण’ का असर होता है. 23 अप्रैल को पहले चरण के मतदान में यह साफ हो जाएगा कि जनता ने कांग्रेस के ‘न्याय’ पर भरोसा किया है या टीएमसी और भाजपा के पुराने वादों पर. फिलहाल, कांग्रेस के इस ‘न्याय पत्र’ ने बंगाल के सियासी रण को और भी रोमांचक बना दिया है.