two eclipses in 15 days 2026 Effect astrology for india | 15 दिनों में 2 ग्रहण और महाविनाश का संकेत! महंगाई, ईरान से लेकर यूक्रेन तक मची तबाही, क्या य
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Two Eclipses In 15 Days: एक पाख दो ग्रहना, राजा मरे या सेना केवल एक कहावत नहीं, बल्कि एक ऐसा संकेत है जो हमें वर्तमान परिस्थितियों को समझने और भविष्य के प्रति सजग रहने की प्रेरणा दे रहा है. ग्रहण के कई अशुभ प्रभाव देखने को मिल रहे हैं. विश्व में कई जगह युद्ध चल रहे हैं, महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है, आम लोग चारों तरफ से परेशान है. आइए जानते हैं इसका ज्योतिष प्रभाव…
Two Eclipses In 15 Days: प्राचीन ज्योतिषीय ग्रंथों में वर्णित कहावत ‘एक पाख दो ग्रहना, राजा मरे या सेना’ इन दिनों काफी चर्चा का विषय बना हुआ है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब एक ही पक्ष (पाख) में दो ग्रहण (सूर्य और चंद्र ग्रहण) पड़ते हैं, तो इसका प्रभाव केवल प्राकृतिक घटनाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक उथल-पुथल का संकेत भी माना जाता है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, कम अवधि में दो ग्रहण का होना अशुभ संकेत माना गया है. मान्यता है कि इसका असर शासन व्यवस्था, युद्ध, प्राकृतिक आपदाओं और जनता के जीवन पर गहराई से पड़ता है. राजा मरे या सेना का तात्पर्य यह है कि या तो सत्ता में बैठे लोगों को नुकसान उठाना पड़ सकता है या फिर आम जनता (सेना) को कष्ट झेलने पड़ सकते हैं. आइए जानते हैं कि ज्योतिष के अनुसार इसका हमारे सामान्य जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा…
साल 2026 में चार ग्रहण पड़ने वाले हैं, जिसमें से 2 सूर्य ग्रहण और 2 चंद्र ग्रहण हैं. सबसे पहले 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण, फिर 3 मार्च को चंद्र ग्रहण घटित हुआ. अब तक 15 दिन में दो ग्रहण घटित हो चुके हैं. अगला ग्रहण 12 अगस्त को सूर्य ग्रहण घटित होगा और उसके कुछ ही दिन बाद यानी 17 दिन बाद ही फिर से चंद्र ग्रहण देखने को मिलेगा. ऐसा ही नजारे साल 2025 में भी था, जब कुछ कुछ समय पर दो-दो ग्रहण घटित हुए थे.
अगर वर्तमान वैश्विक परिदृश्य पर नजर डालें, तो कई घटनाएं इस कहावत से जुड़ती नजर आती हैं. ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव, वहीं रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध ने पूरी दुनिया को अस्थिर कर रखा है. इन संघर्षों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है, जिससे महंगाई लगातार बढ़ रही है. भारत समेत कई देशों में बेमौसम बारिश और जलवायु परिवर्तन के कारण किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं. ज्योतिषीय दृष्टि से इसे ग्रहों की अशुभ स्थिति और ग्रहणों के प्रभाव से जोड़ा जा रहा है. ग्रहण के समय सूर्य और चंद्रमा के साथ राहु-केतु की स्थिति प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित करती है, जिससे मौसम में असामान्य बदलाव देखने को मिलते हैं.
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आर्थिक मोर्चे पर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. खाद्य पदार्थों से लेकर ईंधन तक, हर चीज की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है. ज्योतिषाचार्य मानते हैं कि ग्रहण के प्रभाव से बाजार में अस्थिरता आती है और यह स्थिति लंबे समय तक बनी रह सकती है. अभी हाल ही में ओरेकल कंपनी ने तीस हजार लोगों को नौकरी से निकाल दिया था, जिसमें 12 हजार तो केवल भारतीय थे. ऐसी स्थिति और अधिक देखने को मिल सकती हैं.
हालांकि, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इन घटनाओं का संबंध सीधे ग्रहणों से जोड़ना उचित नहीं माना जाता, लेकिन ज्योतिष में विश्वास रखने वाले लोग इसे एक चेतावनी के रूप में देखते हैं. उनका मानना है कि यह समय सतर्क रहने और धैर्य बनाए रखने का है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने, दान-पुण्य करने और धार्मिक उपायों को अपनाने से नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है.
ज्योतिष में इन दो ग्रहणों का क्या अर्थ है? वैदिक ज्योतिष के अनुसार, ग्रहण राहु और केतु के प्रभाव से होते हैं. सूर्य ग्रहण कुंभ राशि में और चंद्र ग्रहण सिंह राशि (पूर्वी फाल्गुनी नक्षत्र) में हुआ था. ये कर्मिक परिवर्तनों का संकेत देते हैं, अर्थात अचानक लिए गए निर्णय और पुराने मामलों का अंत. (फरवरी और मार्च) के पूर्वानुमान के अनुसार, इन ग्रहणों का प्रभाव सिंह, कुंभ, कर्क और मकर राशि वालों पर अधिक देखने को मिला था. लेकिन यह सभी के लिए एक चेतावनी है. लोगों को अपने स्वास्थ्य, परिवार और नौकरी का ध्यान रखना चाहिए.
आम लोगों पर प्रभाव: इन दो ग्रहणों के बाद विश्व की स्थिति बदल गई. 28 मार्च को ईरान युद्ध हुआ. इसके बाद विश्व के सभी देशों में समस्याएं खड़ी हो गईं. विशेष रूप से हमारे देश भारत को इस युद्ध के कारण प्रत्यक्ष समस्याओं का सामना करना पड़ा. युद्ध की वजह से महंगाई बढ़ गई है और आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह सब ग्रहण के अशुभ काल की वजह से हो रहा है. ज्योतिष बताता है कि कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा लिए गए निर्णय सभी को प्रभावित कर रहे हैं और दुनिया सिर्फ देख रही है.
दोनों ग्रहण… हालांकि अशुभ संकेत हैं… लेकिन ये एक नई शुरुआत का भी संकेत देते हैं. ग्रहण के बाद कुछ लोगों को नए अवसर मिलेंगे. पुरानी समस्याएं हल हो गईं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण के अशुभ काल जब खत्म होगा, उसके बाद स्थितियों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे. हालांकि ग्रहण का प्रभाव अभी भी बना हुआ है. इसलिए पारिवारिक कलह और राजनीतिक अस्थिरता देखी जा रही है. गर्भवती महिलाओं और बच्चों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए.
ये ग्रहण हमें जीवन के बारे में क्या सिखाते हैं? ग्रहण हमारे लिए एक रीसेट बटन की तरह होते हैं. ये हमें पुरानी आदतों को छोड़ने और एक नया रास्ता खोजने में मदद करते हैं. देशभर के कई युवाओं ने इस दौरान अपना करियर बदल सकते हैं या खुद अपने आगे का रास्ता तय कर सकते हैं. विज्ञान के अनुसार, नासा ने कहा है कि ये केवल प्राकृतिक खगोलीय घटनाएं हैं.