रेखा का जिगरी दोस्त, मौसमी चटर्जी संग दी 1980 में सुपरहिट, 1 रोल तो करियर के लिए बन गया था संजीवनी बूटी
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जितेंद्र ने अपने करियर में कई हिट और सुपरहिट फिल्मों में काम किया है. लेकिन साल 1972 में उन्होंने एक ऐसी फिल्म में काम किया था, जिसने उनके करियर की दिशा ही पलट दी थी. अपनी डांसिंग इमेज तोड़कर जितेंद्र ने इस फिल्म से अपने नए हुनर का परिचय दिया था.
नई दिल्ली. जितेंद्र ने यूं तो हर तरह के रोल निभाए हैं. लेकिन साल 1972 में आई एक फिल्म में उन्होंने ऐसा गंभीर रोल निभाया था, जिसे देखकर लोगों को यकीन ही नहीं हुआ था,कि वो ऐसी एक्टिंग भी कर सकते हैं. इस फिल्म के उनके गाने भी लोगों ने काफी पसंद किए थे. आज यानी 7 अप्रैल को जितेंद्र अपना जन्मदिन मना रहे हैं.
भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ ऐसे अभिनेता रहे, जिन्होंने न केवल पर्दे पर जादू बिखेरा बल्कि हिंदी सिनेमा के आयाम को बदलकर रख दिया है. उन्हीं में से एक हैं, जितेंद्र. जिनका असली नाम रवि कुमार है, जिन्होंने फिल्मों में आने के लिए अपना नाम बदला था.
अभिनेता ने अपने करियर में 200 से अधिक फिल्में कीं लेकिन जो सफलता उन्हें 1972 में फिल्म ‘परिचय’ से मिली थी, वह कोई और फिल्म नहीं दिला पाई थी. इसी फिल्म ने अभिनेता के मरे हुए करियर में जान डाल दी थी.
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साल 1972 में आई गुलजार द्वारा निर्देशित फिल्म ‘परिचय’ सुपरस्टार जितेंद्र के लिए संजीवनी साबित हुई. अपनी ‘जंपिंग जैक’ की छवि और डांसिंग शूज को पीछे छोड़कर जब जितेंद्र ने आँखों पर चश्मा और चेहरे पर संजीदगी ओढ़ी, तो दर्शकों को एक ऐसा अभिनेता मिला जिसे पहले कभी नहीं देखा गया था.
इस फिल्म का गाना ‘मुसाफिर हूँ यारों’ की धुनों पर थिरकते और सादगी भरे ‘रवि’ के किरदार में जितेंद्र ने यह साबित कर दिया कि वे सिर्फ एक स्टार नहीं बल्कि एक मंझे हुए कलाकार भी हैं.
‘परिचय’ अभिनेता जितेंद्र के लिए भी आसान नहीं थी क्योंकि उनको लेकर इंडस्ट्री में धारणा थी कि वे सिर्फ अच्छा डांस और उछलकूद ही कर सकते हैं, गंभीर अभिनय उनके बस की बात की नहीं है. जब गुलजार साहब ने जितेंद्र को फिल्म ‘परिचय’ के लिए साइन किया था, तब कई लोगों ने उनसे कहा था, ‘जितेंद्र लकड़ी के लट्ठे जैसे हैं,यानी सीधे और भावहीन. खुद अभिनेता को लगता था कि वो फिल्म के लिए खुद को कैसे तैयार करेंगे लेकिन उन्होंने बंद कमरे में आंखों और चेहरे से बोलने की प्रैक्टिस की.
ऐसा नहीं था कि इस फिल्म से पहले जितेंद्र की फिल्में हिट नहीं होती थीं. साल 1972 से पहले भी जितेंद्र की फिल्में पसंद की जाती थीं, लेकिन उन फिल्मों में जितेंद्र का किरदार मनचले लड़के का होता, वो अपने ऑइकॉनिक जूते पहनकर एनर्जी के साथ डांस करते थे. उनकी पहली फिल्म ‘गीत गाया पत्थरों ने’, ‘फर्ज’, और ‘हमजोली’ में उनका किरदार लगभग एक जैसा था लेकिन ‘परिचय’ ने उनके जीवन को पूरी तरह बदलकर रख दिया था.
बता दें कि रेखा के साथ तो जितेंद्र की जोड़ी काफी पसंद की जाती थी. जितेंद्र और रेखा के बीच काफी अच्छी दोस्ती भी हुआ करती थी. दोनों ने साथ में साल 1980 में आई फिल्म मांग भरो सजना में काम किया था. इस फिल्म में मौसमी चटर्जी भी नजर आई थीं और एक ही भूल जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम किया है.