भारत ने 7 साल बाद ईरान से खरीदा तेल, लेकिन पैसों का भुगतान कैसे किया, डॉलर सिस्टम से तो बाहर है यह देश
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India-Iran Payment System : होर्मुज का रास्ता क्या बंद हुआ ईरान की मनचाही मुराद पूरी हो गई. दुनिया पर छाए ईंधन के संकट को दूर करने के लिए अमेरिका को आखिरकार ईरान पर से प्रतिबंध हटाना पड़ा. इस फैसले के बाद भारत को भी 7 साल बाद ईरान से क्रूड खरीदने का मौका मिला, लेकिन असली सवाल भुगतान को लेकर है. ईरान डॉलर वाले पेमेंट सिस्टम से बाहर है तो भारत उसे पेमेंट आखिर कैसे करेगा.

भारत और ईरान के बीच 7 साल बाद व्यापार का लेनदेन हो रहा है.
नई दिल्ली. ईरान के साथ युद्ध ने अमेरिका को वह दिन दिखा दिए, जो उसने सपने में भी नहीं सोचा होगा. जिस देश के साथ कारोबार पर 7 साल पहले अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया था, उसके साथ खरीद-फरोख्त करने की छूट भी उसी ने खुद दे दी. इस छूट का फायदा उठाते हुए भारत ने 7 साल बाद ईरान से लाखों बैरल कच्चा तेल खरीदा. इस खबर से देश के लोगों में जितनी खुशी है, उतने ही सवाल भी मन में उठ रहे हैं. जब ईरान डॉलर से भुगतान वाले सिस्टम में है ही नहीं, तो फिर भारत ने उसे पैसों का ट्रांसफर कैसे किया होगा.
आपके इस सवाल का जवाब देने से पहले जरा 7 साल पीछे लेकर चलते हैं. भारत ने मई, 2019 के बाद अब साल 2026 में ईरान से तेल खरीदा है. ऐसा साल 2018 में अमेरिका की ओर से ईरान पर प्रतिबंध लगाए जाने के कारण हुआ है. हालांकि, इससे पहले भी ईरान के साथ खरीद-फरोख्त डॉलर में नहीं होता था. ऐसा इसलिए, क्योंकि अमेरिका ने उसे काफी पहले ही इंटरनेशनल बैंकिंग सिस्टम SWIFT से बाहर कर दिया था. यही वजह है कि ईरान के साथ कारोबार के लिए कोई भी देश डॉलर में लेनदेन नहीं कर पाता है.
भारत ने काफी पहले बना लिया था पेमेंट सिस्टम
अमेरिका ने भले ही ईरान को SWIFT से बाहर करके डॉलर में लेनदेन को रोक दिया था, लेकिन साल 2019 से पहले कारोबार के लिए भारत अपना खुद का पेमेंट सिस्टम बना लिया था. देश के पेट्रोलियम मंत्रालय ने भी पिछले दिनों कहा था कि ईरान के क्रूड को खरीदने के लिए पेमेंट सिस्टम कोई बाधा नहीं बनेगी. सरकार ने ईरान के साथ लेनदेन के लिए वोस्ट्रो अकाउंट बनाए थे. इसी अकाउंट के जरिये 7 साल पहले भी लेनदेन होता था और माना जा रहा है कि आज भी भारत ने इसी अकाउंट का इस्तेमाल ईरान से लेनदेन में किया है.
क्या है वोस्ट्रो अकाउंट
ईरान के बैंकों और कंपनियों ने काफी पहले भारत के सरकारी बैंक यूको में अपने खाते खोले थे. अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत इसी अकाउंट में ईरान से सामान खरीदने के बाद रुपये डालता था. बाद में ईरान इन रुपयों का इस्तेमाल भारत से चावल और अन्य चीजों को खरीदने में करता था. माना जा रहा है कि इस बार भी ईरान से तेल खरीदकर भारत इसी अकाउंट का इस्तेमाल भुगतान के लिए कर सकता है. कयास यह भी लगाए जा रहे कि इस बार गैर डॉलर वाले भुगतान के अन्य तरीके भी इस्तेमाल हो सकते हैं. इसमें लोकल करेंसी का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो डॉलर के बजाय किसी अन्य देश की करेंसी भी हो सकती है.
रुपये का क्या करता है ईरान
भारत कच्चा तेल खरीदने के बाद उसके खाते में रुपया डालता है. ईरान इन रुपयों का इस्तेमाल सामान खरीदने के साथ ही भारत के तमाम प्रोजेक्ट में भी करता है. ईरान इस निवेश के जरिये मुनाफा कमाता है. इसके अलावा चावल सहित खाने-पीने की चीजों को खरीदने में भी ईरान इन रुपयों का इस्तेमाल कर सकता है. ईरान को दवाइयों, मेडिकल डिवाइस, रेलवे उपकरण खरीदने के लिए भी रुपयों की जरूरत होती है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें