धोनी के न होने से टूटी CSK, क्रिकेट से लेकर फुटबॉल तक कब-कब हुआ ऐसा?
CSK Vs PBKS : चेन्नई की टीम पहले खेली, आयुष म्हात्रे की शानदार पारी की बदौलत टीम ने 209 रन बनाए. जबाव में खेलने उतरी पंजाब ने 18.4 ओवर में टारगेट हासिल कर लिया. मैच में जब 48 बॉल पर 53 रन बनाने रह गए तो सीएसके के खिलाड़ी मानसिक तौर पर हार चुके थे. ऐसा उनकी बॉडी लैंग्वेज से नजर आ रहा था.
CSK Vs RCB : बेंगलुरु के चिन्ना स्वामी स्टेडियम में आरसीबी ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 250 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया. चेन्नई के गेंदबाज सिर्फ 3 बल्लेबाजों को आउट कर सके. जवाब में खेलने उतरी चेन्नई की शुरुआत बेहद खराब रही. सरफराज खान, ओवरटन और प्रशांतवीर सिर्फ टीम को सम्माजनक स्कोर 207 रन तक पहुंचा सके.
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धोनी अभी CSK के एक्टिव प्लेयर हैं, उन्हें चोट की वजह से बाहर रखा गया है, मगर उनका न होना ही अपने आप में टीम की कमजोरी बन गया है. दरअसल धोनी पिछले कई साल में अपने खेल और औरा की वजह से चेन्नई का चेहरा, दिल और आत्मा बन गए हैं. धोनी और कोच स्टीफन प्लेमिंग की जुगलबंदी ही टीम को सफलता दिलाने वाली रही है. धोनी की कप्तानी में CSK ने 15 सीजन खेले हैं इनमें से वह 12 सीजन में प्लेऑफ में जगह बनाने वाली रही है और पांच बार खिताब भी जीता है. इसीलिए इसे आईपीएल इतिहास की सबसे सफल फ्रेंचाइजी माना जाता है.
अगर धोनी के बिना CSK के रिकॉर्ड की बात करें तो अब तक सीएसके ने धोनी के बिना 7 मैच खेले हैं, जिनमें वह सिर्फ एक ही जीत पाई है. 2026 के सीजन में तो टीम पहले तीनों ही मैच बुरी तरह हारी है. अभी धोनी को टीम के साथ वापस जुड़ने में दो सप्ताह का वक्त लग सकता है. अगर तब तक टीम का यही हाल रहा तो उसकी प्लेऑफ में पहुंचने की उम्मीद ही खत्म हो जाएगी.
1- धोनी की कैप्टन कूल इमेज कभी भी साथी खिलाड़ियों को निराश नहीं होने देती. वह लास्ट तक जोश भरे रखते हैं ओर टीम को यकीन दिलाते हैं कि मैच हाथ से नहीं गया. धोनी का लंबा अनुभव ये साबित भी करता है और वो कई बार चौंकाने वाले फैसले लेकर मैच का रुख बदल देते हैं.
2- धोनी पिछले कई सीजन से टीम के कप्तान नहीं है, मगर अप्रत्यक्ष रूप से टीम के लीडर वही हैं. किसे बॉल थमानी है, फील्ड प्लेसमेंट क्या रखनी है. किसी भी पार्टटाइम गेंदबाज को कब आजमाना है. बल्लेबाज को कैसी बॉल डालनी है ये सब तय करने का काम विकेट के पीछे खड़े धोनी ही करते हैं. गायकवाड़ कंफ्यूजन में धोनी से सलाह जरूर लेते हैं, कई बार धोनी बॉलर को बताने के लिए रनरअप एंड तक जाते हैं और मैच में उसका असर भी दिखता है.
3- धोनी का मैदान में होना किस तरह फर्क डालता है. इसका पता ईशान किशन के एक इंटरव्यू में चलता है. ईशान बताते हैं कि मैं अच्छा खेल रहा था, बॉल बैट पर आ रही थी. विकेट के पीछे माही भैया खड़े थे, उन्होंने फील्डर को कुछ इशारा किया, मैंने देखा और मैं दबाव में आ गया. अगली बॉल पर ही मैं आउट हो गया.
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माइकल जॉर्डन के बाद शिकागो बुल्स : 1995 से 1998 के बीच बास्केटबॉल में शिकागो बुल्स का कोई मुकाबला नहीं था. टीम ने 83 प्रतिशत मेच जीते थे. माइकल जॉर्डन, स्कॉटी पिपेन, डेनिस रॉडमैन और कोच फिल जैक्सन की चौकड़ी का लोहा दुनिया मानती थी. 1998 में माइकन जॉर्डन रिटायर हुए. इसके बाद 50 मैचों में ही शिकागो बुल्स सबसे खराब टीम बन गई. टीम के खिलाड़ी वही रणनीति अपना रहे थे, मगर जॉर्डर, पिपेन का न होना टीम को मेंटली गिवअप करने के लिए मजबूर कर रहा था. कभी टॉप में रहने वाली टीम लगातार छह साल तक प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाई थी.
सर एलेक्स फर्ग्यूसन के बाद मैनचेस्टर यूनाइटेड : फुटबॉल में मैनचेस्टर यूनाइटेड का सिक्का उस समय सबसे ज्यादा था जब फर्ग्यूसन टीम के साथ थे. वह सबसे लंबे और सबसे सफल टीम मैनेजर थे. उनके 27 साल के कार्यकाल में टीम ने 38 खिताब जीते. 13 प्रीमियर लीग और 2 UEFA चैंपियंस लीग में कब्जा जमाया. 2013 में टीम के आखिरी प्रीमियर लीग खिताब के साथ ही वह रिटायर हो गए, तब से आज तक टीम कोई भी प्रीमियर लीग खिताब हासिल नहीं कर सकी. टीम ने यूरोपा लीग, लीग कप, FA कप 2016 और 2024 जीता. मगर प्रीमियर लीग या चैंपियंस लीग जैसी बड़ी ट्रॉफी नहीं जीत सकीं.
ध्यान चंद के बाद भारतीय हॉकी : भारतीय का राष्ट्रीय खेल हॉकी है. एक समय हॉकी में हम दुनिया को टक्कर देते भी थे, मगर मेजर ध्यानचंद के बाद कभी भी टीम वैसा कमाल नहीं कर सकी, जो हॉकी के जादूगर के समय थी. 1928 से 1956 तक भारत ने हॉकी में लगातार छह ओलंपिक स्वर्ण पदक जीते थे, 1964 और 1980 में दो और मिले, मगर उसके बाद से आज तक हॉकी में भारत ओलंपिक स्वर्ण नहीं जीत पाया.
फिल जैक्सन के बिना LA लेकर्स : माइकल जॉर्डन जॉर्डन शिकागो बुल्स के लिए जो थे, वही भूमिका फिल जैक्स LA लेकर्स के लिए अदा करते थे. उन्हें जेन मास्टर कहा जाता था. ट्रांएगल ऑफेंस में जैक्सन बेजोड़ थे. उनके जाते ही टीम बिखरती चली गई.
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किसी भी टीम के लिए कोच, कप्तान और मेंटर टीम के लिए ऐसे भरोसेमंद व्यक्ति की तरह काम करते हैं जो पतवार को थामे हैं. यह ठीक जहाज के एंकर की तरह है, जिसके उखड़ते ही जहाज खतरे में आ जाता है. टीम के भरोसेमंद खिलाड़ी के जाने से युवा खिलाड़ी खुद पर शक करने लगते हैं. जिम्मेदारी से बचते हैं और फैसले लेने की घड़ी में एक दूसरे की तरफ ताकते हैं. धोनी लंबे समय तक टीम की कमान संभालते थे, अभी भी वह टीम के लीडर की भूमिका में हैं. ऐसे में अन्य खिलाड़ियों को अपने काम पता हैं. धोनी के एकदम से न खेलने के फैसले से खिलाड़ी खुद को वह भूमिका निभाने के लिए तैयार ही नहीं कर पाए.
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