यहां बटुक भैरव को प्रसाद में चढ़या जाता है टॉफी-बिस्किट और खिलौने, शिव नगरी में है वास, तंत्र-मंत्र से दिलाते हैं राहत

Share to your loved once


होमताजा खबरधर्म

यहां बटुक भैरव को प्रसाद में देते हैं टॉफी-बिस्किट, शिव नगरी में है वास

Last Updated:

Shri Batuk Bhairav Temple: शिव की नगरी काशी में बटुक भैरव का भी मंदिर है. यहां बटुक महाराज को प्रसाद में टॉफी-बिस्किट और खिलौने अर्पित किए जाते हैं. मान्यता है कि बटुक भैरव के दर्शन करने मात्र से ही सभी तरह के तंत्र-मंत्र से मुक्ति मिलती है और ग्रह-नक्षत्रों के अशुभ प्रभाव से राहत भी. आइए जानते हैं शिव की नगरी काशी में विराजमान बटुक महाराज के मंदिर के बारे में खास बातें.

यहां बटुक भैरव को प्रसाद में देते हैं टॉफी-बिस्किट, शिव नगरी में है वासZoom

Shri Batuk Bhairav Temple: मान्यता है कि देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी के कण-कण में उनका वास है. बाबा विश्वनाथ की नगरी में स्थित छोटे-बड़े हर एक मंदिर की अपनी एक अद्भुत कथा और मान्यता है, जो भक्तों के विश्वास और भक्ति को और भी मजबूत करता है. ऐसा ही एक मंदिर वाराणसी की तंग गलियों में हैं, जहां भैरव बाबा बाल या बटुक रूप में विराजते और दर्शन मात्र से संतान संबंधी समस्याओं के साथ ही अन्य कष्टों को भी दूर करते हैं. साथ ही सभी तरह के तंत्र-मंत्र से राहत दिलाते हैं और जीवन सुख-शांति आती है. यहां बटुक भैरव को प्रसाद में टॉफी- बिस्किट और खिलौने अर्पित किए जाते हैं. आइए जानते हैं शिवनगरी काशी में विराजमान बटुक भैरव के बारे में.

बाल विशेश्वर भी कहा जाता है बटुक भैरव को
शिवनगरी काशी में भगवान शिव के रौद्र रूप भैरव के बाल स्वरूप बटुक भैरव का एक छोटा लेकिन अत्यंत शक्तिशाली मंदिर है. भेलूपुर क्षेत्र की घुमावदार और संकरी गलियों में स्थित बटुक भैरव मंदिर भक्तों को सुरक्षा, राहत और हिम्मत के साथ शक्ति भी प्रदान करता है. यहां बाल देवता के रूप में विराजमान बटुक भैरव को बाल विशेश्वर भी कहा जाता है. बटुक भैरव को भगवान शिव और मां काली का पुत्र माना जाता है.

बच्चे के रूप में विराजमान हैं बटुक भैरव
स्थानीय कथाओं के अनुसार, बटुक भैरव राक्षस अबद का वध करने के लिए बाल रूप में प्रकट हुए थे. कथा के अनुसार, अबद को वरदान मिला था कि कोई भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकेगा, केवल एक बच्चा ही अबद का वध कर सकता है. काशी में भैरव बाबा ने यह भूमिका निभाई और भक्तों के रक्षक बन गए. मंदिर में बटुक भैरव की मूर्ति एक बच्चे के रूप में विराजमान हैं, जिनके आसपास ढेरों श्वान नजर आते हैं.

मंदिर के आसपास व परिसर में ढेरों कुत्ते
काशी के बटुक भैरव की यह छवि कोमलता और भयानक शक्ति दोनों को एक साथ दर्शाती है. मंदिर की सबसे खास बात है इसका अखंड दीपक. यह दीपक लगातार जलता रहता है. भक्तों का विश्वास है कि इस दीपक के तेल में चमत्कारिक शक्ति है. इसे घावों के इलाज या जानवरों के काटने पर लगाया जाता है. मंदिर के आसपास व परिसर में ढेरों कुत्ते बिना किसी को नुकसान पहुंचाए स्वतंत्र रूप से घूमते रहते हैं, जिन्हें बाबा का वाहन माना जाता है. शाम की आरती हो या दिन की वे विशेष रूप से सक्रिय दिखते हैं.

बटुक महाराज का प्रसाद
मंदिर की खास बात यह भी है कि यहां भक्त प्रसाद के रूप में टॉफी, बिस्किट और खिलौने चढ़ाते हैं. बच्चे की तरह विराजमान देवता को ये चीजें बहुत प्रिय मानी जाती हैं. भक्त खासकर संतान संबंधी कष्ट, सुरक्षा और हिम्मत बढ़ाने के लिए यहां आते हैं. वे उन्हें दुलारते और प्यार करते भी नजर आते हैं. मंदिर में एक हवन कुंड भी है, जहां लोग पूजा-अनुष्ठान करते हैं.

बटुक भैरव मंदिर कैसे पहुंचे
बटुक भैरव मंदिर रोजाना सुबह 5 बजे से दोपहर 12 बजे तक और शाम 4 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है. विशेष तिथि पर समय में थोड़ा बदलाव हो सकता है. आम दिनों के साथ ही रविवार, मंगलवार और भैरव अष्टमी या जन्मोत्सव के दिन मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ लगती है. बटुक भैरव मंदिर भेलूपुर-कमच्छा क्षेत्र में स्थित है, जो काशी विश्वनाथ मंदिर से लगभग 3 से 4 किलोमीटर दूर है. मंदिर तक वाराणसी जंक्शन या कैंट स्टेशन से ऑटो, टैक्सी या ई-रिक्शा से आसानी से पहुंचा जा सकता है. मुख्य सड़क से मंदिर तक 200-250 मीटर पैदल चलना पड़ता है, क्योंकि गलियां संकरी हैं.

About the Author

Parag Sharma

पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP