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Kunki Choudhury vs Himanta Biswa Sarma in Assam chunav: असम विधानसभा चुनाव से पहले गुवाहाटी सेंट्रल सीट पर 27 वर्षीय उम्मीदवार कुंकी चौधरी और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के बीच विवाद बढ़ गया है. सरमा ने चौधरी के परिवार पर बीफ खाने और कुछ राजनीतिक विचारों को लेकर आरोप लगाए, जिन्हें चौधरी ने बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया. चौधरी का कहना है कि उन्हें मिल रहे समर्थन से सत्ताधारी पक्ष दबाव में है और इसी वजह से निजी हमले किए जा रहे हैं. लंदन से पढ़ाई कर लौटी चौधरी हाल ही में राजनीति में आई हैं और AJP के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं. हालांकि उन्हें इस सीट पर कमजोर दावेदार माना जा रहा है और उनके सामने भाजपा के अनुभवी नेता विजय कुमार गुप्ता हैं, फिर भी उनकी युवा छवि और मुद्दा-आधारित प्रचार ने ध्यान खींचा है. अब देखना होगा कि यह विवाद चुनावी नतीजों को कितना प्रभावित करता है.
असम विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल गरमाता जा रहा है, और इस बार चर्चा के केंद्र में हैं 27 वर्षीय कुंकी चौधरी. गुवाहाटी सेंट्रल सीट से असम जातीय परिषद (AJP) की उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहीं चौधरी का सीधा टकराव मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से हो गया है. डिब्रूगढ़ में चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री सरमा ने चौधरी और उनके परिवार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनकी मां ने सोशल मीडिया पर बीफ खाते हुए तस्वीरें साझा की थीं. इतना ही नहीं, उन्होंने चौधरी की मां के कथित राजनीतिक विचारों और कुछ विवादित चेहरों के समर्थन को लेकर भी सवाल उठाए. विवाद यहीं नहीं रुका. अगले दिन सरमा ने अपने बयान को और तीखा करते हुए धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भ जोड़ दिए. उन्होंने कहा कि असम में सार्वजनिक रूप से बीफ खाने को लेकर कानून हैं और इस तरह के कृत्य समाज की भावनाओं के खिलाफ हैं.
इन आरोपों पर कुंकी चौधरी ने तीखी प्रतिक्रिया दी और उन्हें बेबुनियाद और आधारहीन बताया. उनका कहना है कि एक युवा उम्मीदवार को इस तरह निशाना बनाया जाना इस बात का संकेत है कि सत्ताधारी पक्ष दबाव में है. उन्होंने कहा, ‘मैं राजनीति में अभी कुछ ही दिनों से हूं, लेकिन जिस तरह का समर्थन मिल रहा है, उससे वे घबरा गए हैं. मुद्दों की बात करने के बजाय निजी हमले किए जा रहे हैं.’
कुंकी चौधरी एक शिक्षित और सामाजिक पृष्ठभूमि से आती हैं. उन्होंने लंदन से ‘एजुकेशन लीडरशिप’ में मास्टर डिग्री हासिल की है और अपने परिवार के ट्रस्ट के साथ शिक्षा के क्षेत्र में काम कर चुकी हैं. यह ट्रस्ट असम में कई शिक्षण संस्थान चलाता है. राजनीति में उनकी एंट्री हाल ही में हुई है. सितंबर में राज्य लौटने के बाद उनकी बातचीत AJP के साथ शुरू हुई, हालांकि शुरुआत में वह चुनाव लड़ने को लेकर हिचकिचा रही थीं.
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गुवाहाटी सेंट्रल सीट पर उन्हें एक कमजोर दावेदार माना जा रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि उनकी पार्टी ने अब तक कोई सीट नहीं जीती है. उनके सामने भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय कुमार गुप्ता हैं, जो लंबे समय से संगठन से जुड़े हुए हैं. इसके बावजूद, युवा चेहरा और पढ़ी-लिखी पृष्ठभूमि होने के कारण चौधरी ने खासा ध्यान खींचा है. सोशल मीडिया पर इस चुनाव को स्थानीय बनाम बाहरी के नजरिए से भी पेश किया जा रहा है, हालांकि दोनों उम्मीदवारों ने इस बहस से दूरी बनाई है.
चौधरी का कहना है कि उनका फोकस स्थानीय समस्याओं जैसे शहरी बाढ़ और पार्किंग संकट पर है, जबकि उनके खिलाफ निजी हमले किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘किसी भी सम्मानित नेता को व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर हमला नहीं करना चाहिए. यह राजनीति का बहुत निचला स्तर है.’ असम चुनाव के इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले में अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या युवा उम्मीदवार चौधरी इस विवाद को अपने पक्ष में बदल पाती हैं या अनुभवी नेतृत्व का पलड़ा भारी रहेगा.