कॉलेज स्टूडेंट को देखते ही डायरेक्टर हुआ इंप्रेस, बॉलीवुड में दे दिया मौका, अमिताभ संग 1 मूवी ने बनाया सुपरस्टार
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हम जिस हीरोइन की बात कर रहे हैं, वो 70 और 80 के दशक की सबसे ग्लैमरस और बोल्ड एक्ट्रेस थीं. उन्होंने अपनी वेस्टर्न स्टाइल से बॉलीवुड में एक नई पहचान बनाई. कॉलेज के दिनों में निर्देशक बीआर इशारा की उन पर नजर पड़ी, जिससे उनका फिल्मी सफर शुरू हुआ. उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ कई सुपरहिट फिल्में दीं और ‘टाइम’ मैगजीन के कवर पर जगह पाने वाली पहली भारतीय एक्ट्रेस बनीं. हालांकि, उनका निजी जीवन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा. ‘पैरानॉइड सिजोफ्रेनिया’ जैसी मानसिक बीमारी और अकेलेपन के कारण उन्होंने इंडस्ट्री छोड़ दी और 2005 में उनका दुखद अंत हुआ.
नई दिल्ली: बला की खूबसूरत हीरोइन 70 और 80 के दशक की सबसे ग्लैमरस और बोल्ड एक्ट्रेस थीं. उनका नाम आज भी बॉलीवुड के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है. हम परवीन बॉबी की बात कर रहे हैं, जो उस दौर की एक्ट्रेस थीं, जब पर्दे पर हीरोइनें अक्सर ट्रेडिशनल साड़ियों में नजर आती थीं, लेकिन उन्होंने अपने मॉडर्न लुक और वेस्टर्न पहनावे से पूरी इंडस्ट्री की परिभाषा ही बदल दी. उनकी खूबसूरती और स्टाइल का जादू कुछ ऐसा था कि लोग उन्हें देखते ही रह जाते थे.(फोटो साभार: एआई से जेनरेटेड इमेज)
परवीन का जन्म 4 अप्रैल 1949 को गुजरात के जूनागढ़ में एक मुस्लिम परिवार में हुआ था. वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थीं, जो उनकी शादी के 14 साल बाद पैदा हुई थीं. परवीन बचपन से ही पढ़ाई में काफी होशियार थीं. उन्होंने अहमदाबाद से अंग्रेजी साहित्य में मास्टर्स किया था और हमेशा से खुद के पैरों पर खड़े होने और आत्मनिर्भर बनने का सपना देखती थीं.
परवीन की किस्मत तब बदली, जब वह कॉलेज में थीं. एक दिन पास ही में एक फिल्म की शूटिंग चल रही थी और परवीन वहां पहुंच गईं. वहां मशहूर डायरेक्टर बीआर इशारा की नजर उन पर पड़ी. उस वक्त परवीन मिनी स्कर्ट पहने हुए सिगरेट पी रही थीं. उनका यह बेबाक और मॉडर्न अंदाज डायरेक्टर को इतना भाया कि उन्होंने तुरंत उनकी तस्वीरें खिंचवाईं और उन्हें अपनी फिल्म का ऑफर दे दिया.
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परवीन ने साल 1973 में फिल्म ‘चरित्र’ से बॉलीवुड में कदम रखा. हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही, लेकिन परवीन के चेहरे और उनके अनोखे अंदाज ने फिल्म मेकर्स का ध्यान खींच लिया. इसके बाद 1974 में फिल्म ‘मजबूर’ आई, जिसमें उन्होंने पहली बार अमिताभ बच्चन के साथ काम किया. इस फिल्म ने उन्हें रातों-रात पहचान दिला दी और उनका फिल्मी सफर तेजी से दौड़ने लगा.
साल 1975 में आई फिल्म ‘दीवार’ ने परवीन को सुपरस्टार बना दिया. इसके बाद ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘नमक हलाल’, ‘शान’ और ‘काला पत्थर’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों ने उन्हें इंडस्ट्री की टॉप एक्ट्रेस की कतार में खड़ा कर दिया. अमिताभ बच्चन के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने इतना प्यार दिया कि उस दौर में वह सबसे ज्यादा फीस लेने वाली अभिनेत्रियों में शुमार हो गईं.
परवीन की लोकप्रियता केवल भारत तक सीमित नहीं थी. 1976 में वह पहली भारतीय एक्ट्रेस बनीं जिन्हें अंतरराष्ट्रीय मैगजीन ‘टाइम’ के कवर पेज पर जगह मिली. उन्होंने बॉलीवुड में वेस्टर्न फैशन को जिस तरह से प्रमोट किया, वह आज की अभिनेत्रियों के लिए भी एक मिसाल है. वह सही मायने में एक ग्लोबल आइकन बन चुकी थीं. (फोटो साभार: IMDb)
परवीन ने करियर में जितनी ऊंचाई छुई, निजी जिंदगी में वह उतनी ही अकेली रहीं. उनका नाम डैनी डेन्जोंगपा, कबीर बेदी और महेश भट्ट जैसे दिग्गजों के साथ जुड़ा, लेकिन किसी भी रिश्ते में उन्हें वह सुकून और स्थिरता नहीं मिल पाई जिसकी उन्हें तलाश थी. इसी बीच उन्हें ‘पैरानॉइड सिजोफ्रेनिया’ जैसी गंभीर मानसिक बीमारी ने घेर लिया, जिसने उनकी जिंदगी को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया. (फोटो साभार: IMDb)
परवीन ने बीमारी और अकेलेपन के चलते 1983 में अचानक बॉलीवुड छोड़ दिया और विदेश चली गईं. सालों बाद जब वह लौटीं, तो वह चमक खो चुकी थी. 22 जनवरी 2005 को मुंबई के एक फ्लैट में उनका शव मिला. बड़े पर्दे पर सबको खुश करने वाली इस महान अदाकारा का अंत बेहद दुखद रहा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी मौत भूख और लंबी बीमारी की वजह से हुई थी.(फोटो साभार: IMDb)