राजस्थान से ‘गद्दारी’, एक कॉन्ट्रैक्ट और लंबा बैन…जब जडेजा का करियर शुरू होने से पहले खत्म होने वाला था!

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राजस्थान का ड्रेसिंग रूम मजेदार था, लेकिन वहां के नियम भी उतने ही सख्त थे. टीम में एक नियम था. जो खिलाड़ी गलती करता, उसे एक पिंक कलर की डॉल को लेकर घूमना पड़ता. बस, एयरपोर्ट, होटल…हर जगह. ये सजा हंसी मजाक में दी जाती थी, लेकिन इसका मतलब साफ था कि टीम के रूल्स सबसे ऊपर हैं. जडेजा भी कई बार पिंक डॉल लेकर घूमे. लेकिन असली सबक तब मिला जब एक दिन वो और Yusuf Pathan प्रैक्टिस के लिए लेट हो गए.

और जब वो टीम बस में वापस होटल लौट रहे थे तब कप्तान वॉर्न ने बीच रास्ते में टीम बस रुकवा दी. इस दौरान वॉर्न ने उनसे कहा कि आप उतर जाओ और पैदल होटल जाओ. गर्मी का मौसम था और होटल भी काफी दूर था. लेकिन उस दिन जडेजा ने जो सीखा, वो जिंदगी भर काम आया. जडेजा ने सीखा कि प्रोफेशनल क्रिकेट में टाइम और डिसिप्लिन कितना जरूरी है. उस दिन के बाद कोई खिलाड़ी कभी लेट नहीं हुआ.

बस एक गलती और चीजें बिखर सी गईं
लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी थी. 2009 तक जडेजा इंडिया के लिए खेल चुके थे. उनका नाम बन चुका था. BCCI का कॉन्ट्रैक्ट मिल चुका था. लेकिन IPL में उनकी सैलरी वही थी जो 2008 में थी. करीब 20 लाख रुपये. दूसरी तरफ उनके साथी खिलाड़ी करोड़ों में बिक रहे थे. ऐसे में एक 21 साल का लड़का सोचता है कि उसे भी उसका हक मिलना चाहिए. और कुछ हद तक ये सोच गलत नहीं थी. लेकिन क्रिकेट में सिर्फ सही होना काफी नहीं होता, सही तरीके से सही काम करना जरूरी होता है. और यहीं जडेजा से गलती हो गई.

राजस्थान रॉयल्स के साथ 31 दिसंबर 2009 को उनका कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो गया. जडेजा को लगा कि अब वो फ्री हैं. अब वो किसी भी टीम से बात कर सकते हैं. लेकिन IPL के नियम इतने सुलझे हुए नहीं थे. वहां फ्री एजेंट बनने के लिए सिर्फ कॉन्ट्रैक्ट खत्म होना काफी नहीं था. टीम से NOC लेना जरूरी था. और जडेजा के पास वो नहीं था. यहीं से कहानी ने खतरनाक मोड़ लिया.

जडेजा ने मुंबई इंडियंस से संपर्क किया. उन्होंने अपना कॉन्ट्रैक्ट शेयर किया. मुंबई ने भी दिलचस्पी दिखाई. दोनों के बीच बातचीत आगे बढ़ी. यहां तक कि जडेजा ने उनके साथ प्रैक्टिस भी की. ये सब चुपचाप हो रहा था. राजस्थान फ्रैंचाइज को इसकी खबर नहीं थी. लेकिन क्रिकेट में कोई चीज ज्यादा समय तक छुपी नहीं रहती. जब राजस्थान को पता चला, तो मामला सीधे IPL गवर्निंग काउंसिल तक पहुंच गया.

रवींद्रे जडेजा.

जब जडेजा पर एक साल का बैन लगा
अब सवाल था कि फैसला किसके पक्ष में जाएगा. एक युवा खिलाड़ी, जो बेहतर कॉन्ट्रैक्ट चाहता था या एक लीग जो अपने नियमों को मजबूत बनाना चाहती थी. IPL उस समय नया था. अगर उस समय नियमों को नजरअंदाज किया जाता, तो हर टीम दूसरे खिलाड़ियों को अपने साथ लाने लगती. इसलिए फैसला सिस्टम के पक्ष में गया. 25 मार्च 2010 को सुनवाई हुई. अरुण जेटली की कमेटी ने केस सुना. जडेजा ने माना कि वो बेहतर डील चाहते थे. उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें लगा वो फ्री हैं. लेकिन नियम साफ थे. बिना NOC के दूसरी टीम से बात करना गलत था.

फैसला आया. जडेजा पर एक साल का बैन लगा. वो IPL 2010 से बाहर हो घए. ये सिर्फ एक सजा नहीं थी. ये एक मैसेज था कि IPL के नियम सबसे ऊपर हैं. उस समय के कमिश्नर ललित मोदी ने भी सख्त बयान दिया. मीडिया में जडेजा को लेकर काफी बातें हुईं. उन्हें लालची तक कहा गया. लेकिन सच्चाई ये थी कि जडेजा सिस्टम को पूरी तरह समझ नहीं पाए थे.

इस बैन का असर सिर्फ IPL तक सीमित नहीं था. इससे पहले 2009 टी20 वर्ल्ड कप में उनकी एक धीमी पारी की काफी आलोचना हुई थी. इंग्लैंड के खिलाफ 35 गेंद में 25 रन. भारत मैच हार गया. सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना हुई. और जब बैन लगा, तो लोगों को लगा कि ये उसी का नतीजा है. लेकिन जडेजा के लिए ये बहुत बड़ा झटका था. एक साल बिना IPL.

लेकिन यहीं से असली कहानी शुरू होती है. जडेजा वापस सौराष्ट्र गए. रणजी ट्रॉफी खेली.चार दिन के मैच. कई लंबी पारियां. उन्होंने खुद को फिर से बनाया. बैटिंग में धैर्य का परिचय दिया लाया. गेंदबाजी में कंट्रोल बेहतर किया. इसका काफी फायदा भी मिला.

2011 में वो IPL में वापस आए. Kochi Tuskers Kerala ने उन्हें बड़ी रकम में खरीदा. ये वही खिलाड़ी था जिसे एक साल पहले बैन किया गया था. अब वही खिलाड़ी मोटी रकम में बिक रहा था. ये उनकी मेहनत का नतीजा था.

लेकिन उनकी कहानी का सबसे बड़ा मोड़ अभी बाकी था. IPL 2012 का ऑक्शन. कई टीमें उनके पीछे थीं. आखिर में Chennai Super Kings ने उन्हें खरीदा. और यहीं से उनकी जिंदगी बदल गई. MS Dhoni की कप्तानी में जडेजा ने खुद को नए स्तर पर पहुंचाया. वो सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं रहे. वो मैच विनर बन गए. गेंद से विकेट, बैट से रन और फील्डिंग में कमाल. हर जगह जडेजा दिखने लगे.

धीरे धीरे वो टीम इंडिया के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल हो गए. 2013 चैंपियंस ट्रॉफी, कई IPL खिताब, 2024 T20 वर्ल्ड कप. हर बड़े मंच पर उन्होंने अपनी छाप छोड़ी. और सबसे बड़ी बात कि अब वो पहले जैसे नहीं थे. अब वो सिस्टम को समझ चुके थे. अब वो सिर्फ टैलेंट पर नहीं, अनुशासन और समझदारी पर खेलते थे.

समय के साथ IPL भी बदल गया. अब ट्रेड खुले में होते हैं. 2024 में हार्दिक पंड्या (Hardik Pandya) का ट्रांसफर हुआ. सब कुछ नियम के तहत हुआ. कोई विवाद नहीं हुआ. क्योंकि अब सिस्टम मजबूत हो चुका है. और इस बदलाव के पीछे कहीं न कहीं जडेजा जैसी कहानियां हैं. आज जब 2025 में जडेजा फिर से राजस्थान रॉयल्स (Rajasthan Royals) से जुड़ने की बात करते हैं, तो ये सिर्फ एक ट्रांसफर नहीं होता. ये एक सर्कल पूरा होना होता है. वही टीम जहां से सब शुरू हुआ था. वही टीम जिसने उन्हें सबसे बड़ा सबक दिया था. और अब वही खिलाड़ी उस टीम में एक सीनियर, एक लीडर के रूप में लौटता है.

अगर इस कहानी को एक लाइन में समझें, तो ये सिर्फ एक बैन की कहानी नहीं है. ये एक सफर है. एक युवा खिलाड़ी की गलती, उसका संघर्ष, उसकी वापसी और उसकी सफलता की. ये कहानी बताती है कि गलती करना गलत नहीं है. लेकिन उससे सीखना भी बहुत जरूरी है.

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