CM YOGI ADITYANATH | AKHILESH YADAV | बंगाल में कब उतरेंगे यूपी के 2 ‘धुरंधर’, ममता के लिए ढाल बनेंगे अखिलेश, तो योगी का ‘बुलडोजर’ ढहाएगा TMC का किला?

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में जब-जब चुनाव का बिगुल बजता है, तब-तब उत्तर प्रदेश की सियासत की धमक कोलकाता से लेकर सिलीगुड़ी तक सुनाई देती है. 2026 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर यूपी के दो ‘धुरंधर’ समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बंगाल के अखाड़े में आमने-सामने होंगे. एक तरफ अखिलेश यादव ममता बनर्जी के लिए ‘रक्षा कवच’ बनकर उतरेंगे, तो दूसरी तरफ योगी आदित्यनाथ का ‘बुलडोजर’ वाला अंदाज टीएमसी के किलों को ढहाने की कोशिश करेगा. अखिलेश यादव और ममता बनर्जी का रिश्ता राजनीति से ऊपर पारिवारिक संवेदनाओं से भरा रहा है. ममता बनर्जी ने हमेशा अखिलेश को अपने छोटे भाई या बेटे जैसा स्नेह दिया है, वहीं अखिलेश उन्हें अपनी ‘बुआ’ और राजनीतिक मार्गदर्शक मानते हैं..

पश्चिम बंगाल चुनाव में टीएमसी के रणनीतिकारों की मानें तो अखिलेश यादव अप्रैल के दूसरे हफ्ते में बंगाल पहुंच सकते हैं. वह उन इलाकों में प्रचार करेंगे जहां उत्तर भारतीय और विशेष रूप से यादव मतदाताओं की संख्या अधिक है. अखिलेश का मिशन साफ है इंडिया गठबंधन की एकजुटता दिखाना और टीएमसी के पक्ष में माहौल बनाना. अखिलेश अक्सर कहते रहे हैं कि ‘ममता दीदी ने बंगाल में जो विकास किया है, उसे दिल्ली वाले नहीं समझ सकते.’

बीजेपी ने अपने सबसे बड़े ‘क्राउड पुलर’ योगी आदित्यनाथ को बंगाल में उतारने की पूरी तैयारी कर ली है.

बीजेपी का सबसे धारदार ‘बटेंगे तो कटेंगे’

दूसरी ओर, बीजेपी ने अपने सबसे बड़े ‘क्राउड पुलर’ योगी आदित्यनाथ को बंगाल में उतारने की पूरी तैयारी कर ली है. योगी आदित्यनाथ पिछली बार की तरह इस बार भी बीजेपी के स्टार प्रचारकों की सूची में सबसे ऊपर हैं. खबर है कि योगी आदित्यनाथ प्रथम चरण के मतदान 23 अप्रैल से पहले मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर बंगाल के इलाकों में ताबड़तोड़ रैलियां करेंगे. ‘बुलडोजर बाबा’ के नाम से मशहूर योगी का मुख्य एजेंडा हिंदुत्व, घुसपैठ और कानून-व्यवस्था होगा. वह अपनी सभाओं में अक्सर यूपी के ‘सुशासन मॉडल’ का जिक्र करते हैं और ममता सरकार पर तुष्टीकरण का आरोप लगाकर सीधे हमला बोलते हैं.

इन दोनों नेताओं के बीच बंगाल की धरती पर होने वाला वाकयुद्ध हमेशा सुर्खियों में रहता है. पिछली बार योगी आदित्यनाथ ने जब बंगाल में रैली की थी, तो ममता बनर्जी ने उन्हें ‘बाहरी’ कहा था, जिस पर योगी ने पलटवार करते हुए कहा था कि ‘ममता दीदी को भगवान राम के नाम से चिढ़ है.’ वहीं, अखिलेश यादव ने योगी के दौरों पर चुटकी लेते हुए कहा था कि ‘जो यूपी में विकास नहीं कर पाए, वो बंगाल में क्या करेंगे?’ 2026 के इस चुनाव में यह पुरानी तल्खी और भी बढ़ने वाली है क्योंकि इस बार मुकाबला सीधे तौर पर अस्तित्व का है.

बंगाल में चुनाव दो चरणों में होने जा रहे हैं.

बंगाल चुनाव का शेड्यूल

बंगाल में चुनाव दो चरणों में होने जा रहे हैं. पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल 2026 को होगा, जबकि दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल 2026 को वोट डाले जाएंगे. चुनावी नतीजों का ऐलान 4 मई को होगा. इन दो चरणों के बीच यूपी के ये दोनों नेता कई रैलियां और रोड शो करेंगे. बीजेपी को उम्मीद है कि योगी की रैलियों से हिंदू वोट बैंक पूरी तरह गोलबंद होगा, जबकि टीएमसी को भरोसा है कि अखिलेश के आने से हिंदी भाषी मतदाताओं का झुकाव ममता की ओर बना रहेगा.

कुल मिलाकर, बंगाल की चुनावी जंग इस बार कोलकाता की गलियों से ज्यादा यूपी के इन दो दिग्गजों के बयानों में लड़ी जाएगी. जहां एक तरफ ममता के ‘अंगने’ में अखिलेश की मौजूदगी उन्हें मजबूती देगी, वहीं बाहर योगी की ‘गर्जना’ टीएमसी के लिए चुनौती पेश करेगी. अब देखना यह होगा कि बंगाल की जनता ‘यूपी के बेटे’ की सुनती है या ‘यूपी के बाबा’ की.

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