महराजगंज में गंडक नदी I maharajganj news

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नेपाल से निकलकर महराजगंज से गुजरने वाली गंडक नदी सीमावर्ती गांवों के लिए सिर्फ प्राकृतिक खूबसूरती ही नहीं, बल्कि आजीविका का मजबूत आधार भी है. निचलौल क्षेत्र के मछुआरे इसी नदी से चेपुआ मछली पकड़कर अपना जीवन यापन करते हैं, जिसकी स्थानीय बाजारों में काफी मांग रहती है. कई बार खरीदार खुद नदी किनारे पहुंच जाते हैं, जिससे गंडक नदी इन गांवों की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा बन गई है.

महराजगंज. ये जिला अपने विशेष भौगोलिक स्थिति की वजह से एक अलग पहचान रखता है. दक्षिण में इसकी सीमा गोरखपुर जिले से लगी हुई है, पश्चिम में सिद्धार्थनगर और पूरब में इसकी सीमाएं कुशीनगर से लगी हुई हैं. इसके साथ ही महराजगंज जिले को जो सबसे खास बनाती है वह है इसके उत्तर दिशा में मौजूद पड़ोसी देश नेपाल, जो अपने खास प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है. महराजगंज जिले का एक बड़ा हिस्सा पड़ोसी देश नेपाल से लगता है और इन सीमावर्ती क्षेत्रों में जिले की एक बड़ी आबादी रहती है. जिले के उत्तर पूरब से होकर नेपाल के पहाड़ों से निकलकर गंडक नदी बहती है, जो महराजगंज से होते हुए कुशीनगर और फिर आगे बिहार की ओर निकल जाती है. नेपाल से आने वाली गंडक नदी महराजगंज जिले के सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों के लिए बहुत ही खास हो जाती है. इसके साथ ही यह नदी सिर्फ एक नदी ही नहीं है बल्कि स्थानीय लोगों के लिए जीविका का एक सहारा भी है.

स्थानीय लोगों के आजीविका का साधन है गंडक नदी
महराजगंज जिले के निचलौल क्षेत्र में स्थित गेडहवां, भेड़िहारी और अन्य दूसरे गांव के स्थानीय गंडक नदी से मछलियों को निकालते हैं. लगभग हर समय नदी के किनारे आपको कुछ स्थानीय मछुआरे देखने को मिल जाते है जो बहुत ही शांत वातावरण में नदी के किनारे बैठ के कर मछलियों को निकालते हैं तो वहीं कुछ मछुआरे नदी में नांव के सहारे मछलियों को निकालते हैं. देखने में बहुत ही खूबसूरत लगता है. महराजगंज जिले के इस क्षेत्र की बात करें तो यहां की चेपुआ मछली बहुत ही ज्यादा लोकप्रिय है. जिसे गंडक नदी से मछुआरे निकालते हैं. महराजगंज जिले के इस क्षेत्र के स्थानीय मछुआरों के लिए यह आजीविका का एक साधन भी है. महराजगंज जिले के इस क्षेत्र से निकलने वाली चेपुआ मछली की बात करें तो यह अपने छोटे साइज के लिए जानी जाती हैं और इनकी स्थानीय बाजारों में काफी डिमांड भी होती है.

पनियहवां में भी मिलती है गंडक नदी की मछली
महराजगंज जिले के इंडो नेपाल बॉर्डर क्षेत्र के एक स्थानीय रमाशंकर वर्मा ने लोकल 18 से बातचीत के दौरान बताया कि यहां की चेपुआ मछली बहुत ही ज्यादा लोकप्रिय है जो अपने अपने अलग स्वाद के लिए जानी जाती है. बॉर्डर क्षेत्र के स्थानीय मछुआरे इसको निकालते हैं जिन्हें यहां के लोगों में खूब पसंद किया जाता है. उन्होंने बताया कि पड़ोसी जिले कुशीनगर का एक बड़ा पर्यटन पनियहवां हैं जो अपने खास मछली भुजा के लिए जाना जाता है. वहां भी इसी नदी का चेपुआ मछली मिलती है. गंडक नदी के किनारे बसे गांव के मछुआरे मछली के व्यवसाय से जुड़े हुए है और ऐसे में नेपाल से आने वाली गंडक नदी उनके लिए मछलियों का एक बड़ा केंद्र है. जहां से वह मछलियों को निकालते हैं और इसके साथ ही उन्हें स्थानीय बाजारों में बेचते हैं. इसके अलावा उन्हें कई बार स्थानीय बाजारों तक भी जाने की जरूरत नहीं पड़ती है. बल्कि खरीदार खुद चलकर नदी के किनारे तक आ जाते है और उनकी मछलियों को खरीद कर ले जाते हैं.

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Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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