राज कपूर नहीं, इस डायरेक्टर को प्रेरणा मानते हैं इम्तियाज अली, उनकी फिल्मों को बताया सच्चे हिंदुस्तान की झलक
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इम्तियाज अली ने हाल ही में दिग्गज फिल्मकार श्याम बेनेगल को अपना सबसे बड़ा प्रेरणास्रोत बताया है. उन्होंने कहा कि बेनेगल की फिल्मों में सच्चाई, जुनून और भारतीय समाज की गहराई साफ झलकती है. इम्तियाज के अनुसार, उनकी फिल्में सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि जीवन, रिश्तों और इंसानी भावनाओं को समझने का माध्यम हैं. उन्होंने शशि कपूर, नसीरुद्दीन शाह और नफीसा अली जैसे कलाकारों के काम की भी सराहना की.

इम्तियाज अली ने बताया कि वो किस डायरेक्टर को अपनी प्रेरणा मानते हैं.
नई दिल्ली. मशहूर फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली अपनी फिल्मों में प्यार, सफर और आत्म-खोज की कहानियों को बेहद संवेदनशील अंदाज में पेश करने के लिए जाने जाते हैं. उनकी फिल्मों के किरदार अक्सर अपनी जिंदगी के मायने तलाशते हुए एक ऐसी यात्रा पर निकलते हैं, जो दर्शकों को भी खुद से जुड़ने का मौका देती है. हाल ही में इम्तियाज अली ने दिग्गज फिल्मकार श्याम बेनेगल को अपना सबसे बड़ा प्रेरणास्रोत बताया, जिससे उनके सिनेमा के प्रति नजरिए की झलक मिलती है.
इम्तियाज ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि भले ही कई फिल्मकार उन्हें प्रभावित करते हैं, लेकिन श्याम बेनेगल का काम सबसे अलग और गहराई से जुड़ा हुआ है. उन्होंने बताया कि बेनेगल की फिल्मों में एक खास तरह का जुनून और सच्चाई दिखाई देती है, जो दर्शकों के दिल को छू जाती है. उन्होंने शशि कपूर, नसीरुद्दीन शाह और नफीसा अली जैसे कलाकारों के काम की भी तारीफ की, जो बेनेगल की फिल्मों में नजर आए हैं.
श्याम बेनेगल को बताया प्रेरणा
इम्तियाज ने यह भी कहा कि अगर कोई सिनेमा को समझना चाहता है, तो उसे श्याम बेनेगल की फिल्में जरूर देखनी चाहिए. उनकी फिल्मों में एक सच्चा हिंदुस्तान नजर आता है जहां रिश्तों की गहराई, मानवीय भावनाएं और सामाजिक सच्चाइयां बेहद ईमानदारी से दिखाई जाती हैं. उन्होंने रस्किन बॉन्ड की कहानी पर बनी फिल्म ‘अ फ्लाइट ऑफ पिजन्स’ का जिक्र करते हुए बताया कि इस तरह की कहानियां भारतीय सिनेमा को एक अलग पहचान देती हैं.
दिग्गज डायरेक्टर ने पैरलल सिनेमा को दी नई दिशा
श्याम बेनेगल भारतीय सिनेमा के उन फिल्मकारों में गिने जाते हैं जिन्होंने ‘पैरलल सिनेमा’ को नई दिशा दी. उनकी फिल्मों में समाज के जमीनी मुद्दों को गहराई से दिखाया गया है. ‘अंकुर’, ‘निशांत’, ‘मंथन’, ‘भूमिका’ और ‘मंडी’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने सामंतवाद, जातिवाद और समाज की जटिलताओं को बड़े ही सशक्त तरीके से पर्दे पर उतारा. उनकी फिल्मों की खासियत यह रही कि वे केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती हैं.
इम्तियाज अली ने अपने बयान में बिमल रॉय और राज कपूर जैसे महान फिल्मकारों का भी जिक्र किया और कहा कि इन दिग्गजों की फिल्मों से बहुत कुछ सीखा जा सकता है. उन्होंने यह भी सलाह दी कि आज के दौर में इंटरनेट का सही इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि यह सीखने का एक बड़ा जरिया है.
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प्रांजुल सिंह 3.5 साल से न्यूज18 हिंदी से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने Manorama School Of Communication (MASCOM) से जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन में डिप्लोमा किया है. वो 2.5 साल से एंटरटेनमेंट डेस्क पर काम कर रही है…और पढ़ें