Aloo Instant Achaar: पंचफोरन, सरसों का तेल और नींबू…ऐसे बनता है उबले आलू का झटपट अचार, मिथिलांचल का खास

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Instant Aloo Achaar: मिथिलांचल में यूं तो कई तरह के अचार खाए जाते हैं पर जब घर पर कुछ ना हो तो इंस्टेंट बनने वाला यह आलू का अचार थाली की शोभा और खाने का स्वाद बढ़ा देता है. उबले आलू से बनने वाला यह चटपटा अचार सिंपल दाल-चावल को गजब टेस्ट देता है.

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दरभंगा: उत्तर बिहार के मिथिलांचल में अचार सिर्फ खाने का चटपटा साथी नहीं बल्कि यहां की खान-पान की संस्कृति का स्थायी हिस्सा है. सर्दी हो या गर्मी, हर घर की रसोई में आम की खटाई, नींबू-मिर्च का तीखापन, लहसुन या सहजन-फूल का कोई न कोई अचार का रूप जरूर मिलता है. मेहमान आएं और थाली में अचार न हो – यहां यह लगभग असंभव लगता है. लेकिन हफ्तों की भागदौड़ में कई बार ना पुराना अचार बचता है और न हरी सब्जी. ऐसे में उबले आलू से झटपट तैयार होने वाला यह अचार न केवल समय बचाता है, बल्कि रोटियों का हिसाब भी दो-चार बढ़ा देता है.

बेहद सरल है आलू का अचार बनाना
विधि बिल्कुल सरल है, लेकिन स्वाद पक्का. पहले आलू कुकर में तीन-चार सीटी देकर नरम उबाल लें. फिर उन्हें ठंडा होने दें, छीलकर अपनी पसंद के आकार में काट लें – कुछ को मोटा चौकोर और कुछ को पतले टुकड़ों में. अब पंचफोरन तैयार करें. सौंफ, जीरा, मंगरैल (कलौंजी), धनिया और मेथी को धीमी आंच पर भूनें. जब खुशबू आने लगे तो उतार कर दरदरा पीस लें.

मसाला मिलाएं पर धीरे-धीरे
इस पिसे मसाले को तवे पर कुछ सेकंड और हल्का भून लें. यही छोटा सा कदम इसकी खुशबू को और गहरा कर देता है. अब एक बड़े बर्तन में कटे आलू लें. ऊपर से नमक, लाल मिर्च पाउडर और हल्दी हल्की सी डालें. फिर भुना मसाला, एक-दो चम्मच कच्चा सरसों का तेल और अंत में नींबू का रस डालें. हाथ से धीरे-धीरे मिलाएं ताकि आलू टूटे नहीं और हर टुकड़े पर मसाले की परत चढ़ जाए.

हर मौसम में ऐसे बढ़ता है स्वाद
परोसने भी उतना ही आसान है. गरम दाल-चावल, खिचड़ी या सादी रोटी-सब्जी के साथ एक कटोरी यह अचार रखें. पंचफोरन की खुशबू, सरसों की हल्की कड़वाहट और नींबू की खटास साधारण आलू को भी खास स्वाद दे देती है. गांव के घरों में इसे अक्सर तुरंत खा लिया जाता है, लेकिन अगर दो-एक घंटे रख दिया जाए तो मसाला और अच्छे से मिल जाता है. गर्मियों में इसमें पुदीना और धनिया की बारीक पत्तियां भी मिलाई जा सकती हैं, जबकि ठंड के मौसम में थोड़ा भुना जीरा पाउडर डालने से स्वाद और बढ़ जाता है.

आलू को मिलता खास व्यंजन वाला सम्मान
इसकी लोकप्रियता की वजह साफ है- कम समय, कम सामग्री और यह भरोसा कि थाली अधूरी नहीं रहेगी. मिथिलांचल में अचार पीढ़ियों की यादों से जुड़ा है. सर्दियों में बड़े मर्तबानों में अचार डाले जाते हैं, गर्मियों में खट्टे-मीठे नींबू का अचार बनता है और बरसात में मिर्च और आम का मिश्रण.

आलू से बनने वाला यह नुस्खा उसी परंपरा की एक छोटी कड़ी है. जब विकल्प सीमित हों, तब चतुराई से बनाया गया स्वाद. थाली में परोसते ही बातें शुरू होती हैं, रोटियां बढ़ती हैं और साधारण आलू भी किसी खास व्यंजन जैसा सम्मान पा जाता है.

About the Author

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें

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