Gujarat tsunami study | Tsunami News | गुजरात में आई सुनामी… समंदर की रेत में दिखे ऐसे निशान, वैज्ञानिकों ने खोल दिया 6000 साल पुराना राज़

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Gujarat Tsunami News: गुजरात का तट देश के सबसे व्यस्त और आर्थिक रूप से अहम क्षेत्रों में से एक है. यहां करीब 1,000 साल और लगभग 6,000 साल पहले दो बड़ी सुनामी आई थीं, जिनके निशान आज भी रेत में दर्ज हैं. यह खोज इसलिए भी अहम है, क्योंकि भारत के तटीय इलाकों में सुनामी का कोई लिखित या वैज्ञानिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है.

गुजरात में आई सुनामी... रेत में दिखे ऐसे निशान, खुल गया 6000 साल पुराना राज़Zoom

वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आया है कि इस क्षेत्र में करीब 1,000 साल और लगभग 6,000 साल पहले दो बड़ी सुनामी आई थीं.

गुजरात के समुद्री तट पर फैली महीन रेत के कणों में वैज्ञानिकों ने ऐसे राज़ का पता लगाया है, जिस पर सदियों से पर्दा पड़ा था. दरअसल हालिया वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आया है कि इस क्षेत्र में करीब 1,000 साल और लगभग 6,000 साल पहले दो बड़ी सुनामी आई थीं, जिनके निशान आज भी रेत में दर्ज हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अहमदाबाद स्थित एमजी साइंस इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने एक खास वैज्ञानिक तकनीक ‘ऑप्टिकली स्टिमुलेटेड ल्यूमिनेसेंस’ (OSL) के जरिए यह अहम खोज की है. इस तकनीक से यह पता लगाया जाता है कि रेत या खनिज के कण आखिरी बार कब सूरज की रोशनी के संपर्क में आए थे.

कैसे खुला 6000 साल पुराना राज़?

इस शोध को द्रष्टि गांधी और परस सोलंकी ने अंजाम दिया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय जर्नल मरीन जियोलॉजी में प्रकाशित किया गया है. शोध के मुताबिक सामान्य परिस्थितियों में रेत के कण बार-बार सूरज की रोशनी में आते हैं, जिससे उनका ‘टाइम रिकॉर्ड’ रीसेट होता रहता है. लेकिन जब सुनामी जैसी तेज और विनाशकारी घटनाएं होती हैं, तो ये कण अचानक गहराई में दब जाते हैं और उन्हें पर्याप्त रोशनी नहीं मिल पाती. ऐसे में इन कणों में उस समय की ‘टाइम-मार्क’ सुरक्षित रह जाती है.

प्रयोगशाला में इन कणों का विश्लेषण कर वैज्ञानिक यह पता लगा सकते हैं कि ऐसी घटनाएं कब हुई थीं. इस अध्ययन में ओएसएल तकनीक को सुनामी से जुड़े अवसाद (sediments) की पहचान और उनकी उम्र तय करने के लिए विश्वसनीय साबित किया गया है.

क्यों और कितनी अहम यह खोज?

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह खोज इसलिए भी अहम है, क्योंकि भारत के कई तटीय इलाकों में सुनामी का कोई लिखित या वैज्ञानिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है. ऐसे में यह तकनीक अतीत की आपदाओं को समझने और भविष्य के जोखिम का आकलन करने में मदद कर सकती है.

टीआईओ की रिपोर्ट के अनुसार भूविज्ञान विभाग के प्रमुख परस सोलंकी के अनुसार, गुजरात का तट देश के सबसे व्यस्त और आर्थिक रूप से अहम क्षेत्रों में से एक है, लेकिन यहां सुनामी के खतरे को लेकर जानकारी काफी सीमित रही है. उन्होंने कहा कि पुराने समय में आई सुनामी की फ्रीक्वेंसी और प्रभाव को समझना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में बेहतर चेतावनी प्रणाली और सुरक्षित तटीय ढांचा तैयार किया जा सके.

ऐसे में यह अध्ययन न सिर्फ गुजरात बल्कि देश के अन्य तटीय इलाकों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत देता है कि समुद्र किनारे की रेत में छिपे रहस्य भविष्य की आपदा प्रबंधन रणनीतियों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

About the Author

Saad Omar

An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T…और पढ़ें

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