कानपुर देहात का बुकनू से लेकर कन्नौज का इत्र गट्टा तक, अब यूपी के पारंपरिक व्यंजनों को मिलेगा नया मंच..यहां जानिए योगी सरकार की नई पहल
कानपुर: उत्तर प्रदेश में अब सिर्फ उत्पाद ही नहीं, बल्कि पारंपरिक खान-पान भी पहचान बनाने जा रहा है.मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर शुरू की गई “एक जिला एक व्यंजन” योजना के तहत अलग-अलग जिलों के खास पकवानों को सामने लाने की तैयारी तेज हो गई है. इस पहल का मकसद न सिर्फ स्थानीय स्वाद को पहचान देना है, बल्कि पर्यटन और रोजगार को भी बढ़ावा देना है.
इस काम के लिए कानपुर स्थित छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) को नोडल सेंटर बनाया गया था. विश्वविद्यालय के होटल मैनेजमेंट विभाग के छात्र-छात्राओं ने 6 जिलों कानपुर देहात, इटावा, औरैया, फर्रुखाबाद, उन्नाव और कन्नौज में जाकर सर्वे किया. उन्होंने स्थानीय दुकानदारों, होटल संचालकों और लोगों से बातचीत कर वहां के सबसे लोकप्रिय व्यंजनों की सूची तैयार की.
जिलों के स्वाद को मिला मंच
सर्वे के बाद जो सूची तैयार हुई, उसमें हर जिले की खास पहचान झलकती है. कानपुर देहात का बुकनू, पेड़ा और गुझिया अपने पारंपरिक स्वाद के लिए चुने गए हैं.व हीं कन्नौज का इत्र गट्टा और पोस्तादाना लड्डू अपनी खुशबू और अलग स्वाद के कारण सूची में शामिल हुए हैं. इसी तरह उन्नाव का काला जाम, फर्रुखाबाद की नमकीन, औरैया की बालूशाही और इटावा की खीर जैसे व्यंजन भी चयनित किए गए हैं. ये सभी पकवान लंबे समय से स्थानीय लोगों की पसंद रहे हैं, लेकिन अब इन्हें राज्य स्तर पर पहचान दिलाने की तैयारी है.
छात्रों ने किया जमीनी सर्वे
इस पूरी प्रक्रिया की खास बात यह रही कि इसे किताबों या इंटरनेट के आधार पर नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर तैयार किया गया. छात्रों ने खुद अलग-अलग जगहों पर जाकर लोगों से बात की और असली स्वाद को समझा.विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह सूची अब शासन को भेज दी गई है. आने वाले समय में इन व्यंजनों को ब्रांडिंग, पैकेजिंग और प्रमोशन के जरिए बड़े स्तर पर पहचान दिलाई जाएगी.
जल्द होगा फूड फेस्टिवल
सीएसजेएमयू में जल्द ही एक बड़े फूड फेस्टिवल की भी तैयारी है. इस आयोजन में देश के करीब 22 राज्यों के व्यंजन एक ही जगह देखने और चखने को मिलेंगे.हालांकि फिलहाल गैस की समस्या के कारण इसे टाल दिया गया है, लेकिन हालात सामान्य होते ही यह आयोजन किया जाएगा.
पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञ मानते हैं कि जिस तरह “एक जिला एक उत्पाद” योजना ने स्थानीय उद्योगों को नई पहचान दी, उसी तरह यह नई पहल स्थानीय खान-पान को भी आगे बढ़ाएगी.इससे छोटे दुकानदारों, हलवाइयों और फूड कारोबार से जुड़े लोगों को सीधा फायदा मिलेगा.आने वाले समय में जब कोई पर्यटक इन जिलों में जाएगा, तो वहां का खास व्यंजन उसकी यात्रा का अहम हिस्सा होगा.यानी अब हर जिले का स्वाद उसकी नई पहचान बनने जा रहा है.