क्या आपने खाई है फूलों की सब्जी? बीकानेर में बनती है ‘लाल बाटे’ की खास डिश, स्वाद और सेहत दोनों का है खजाना

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Lal Bate ki Sabji Recipe: बीकानेर सहित राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में ‘लाल बाटे’ के अंकुरित फूलों की सब्जी एक पारंपरिक और अनोखा व्यंजन है. यह फूल साल में केवल एक बार आते हैं और आगे चलकर प्रसिद्ध ‘केर’ फल में बदलते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में इसे बड़े चाव से बनाया और खाया जाता है, हालांकि शहरों में इसकी जानकारी सीमित है. इस सब्जी का स्वाद हल्का खट्टा होता है और इसे बनाने के लिए फूलों को छाछ में भिगोकर विशेष प्रक्रिया अपनाई जाती है.

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बीकानेर. राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में प्रकृति अपने अनोखे रंग और स्वाद के लिए जानी जाती है. यहां मौसम के अनुसार कई तरह के देसी फल-फूल उगते हैं, जिनका उपयोग ग्रामीण जीवन में खान-पान का अहम हिस्सा है. आमतौर पर लोग फलों और सब्जियों की बात करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी फूल की सब्जी खाई है, अगर नहीं, तो आज हम आपको बता रहे हैं एक ऐसे ही अनोखे और पारंपरिक व्यंजन ‘लाल बाटे’ के अंकुरित फूल की सब्जी के बारे में. रेगिस्तान की यह पारंपरिक सब्जी न केवल स्वाद में अनोखी है, बल्कि सेहत के लिए भी किसी औषधि से कम नहीं है.

रेगिस्तान में उगने वाले इस खास पेड़ पर साल में सिर्फ एक बार ‘लाल बाटे’ के अंकुरित फूल आते हैं. यही फूल आगे चलकर प्रसिद्ध ‘केर’ फल में बदलते हैं, जो राजस्थान की सबसे महंगी और लोकप्रिय सब्जियों में गिना जाता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि केर बनने से पहले इसके अंकुरित फूल भी सब्जी के रूप में उपयोग किए जाते हैं.

राजस्थान में बड़े चाव से खाए जाते हैं ‘लाल बाटे’के फूलों की सब्जी

ग्रामीण राम कुमार बिस्सा ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में ‘लाल बाटे’ के इन फूलों की सब्जी बड़े चाव से बनाई जाती है, हालांकि शहरों में यह परंपरा अब लगभग खत्म होती जा रही है. इसकी एक खास बात यह भी है कि यह बाजार में आसानी से उपलब्ध नहीं होती, क्योंकि इसकी जानकारी सीमित लोगों तक ही है और इसका उत्पादन भी बहुत कम समय के लिए होता है. इस सब्जी का स्वाद हल्का खट्टा होता है, जिसे बनाने के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाई जाती है. पहले इन फूलों को 5 से 7 दिनों तक छाछ में भिगोकर रखा जाता है, जिससे इसकी कड़वाहट और खट्टापन कम हो जाता है. इसके बाद इन्हें नमक डालकर गर्म पानी में उबाला जाता है और फिर मसालों के साथ पारंपरिक तरीके से सब्जी बनाई जाती है. स्वाद में यह सब्जी ग्वार पाठे की तरह लगती है, लेकिन इसका अपना अलग ही देसी फ्लेवर होता है.

लाल बाटे से लीवर स्वस्थ और बीपी संतुलित रहता है

यह अंकुरित फूल केवल फाल्गुन महीने से लेकर करीब एक माह तक ही उपलब्ध रहता है. इसके बाद फूल झड़ जाते हैं और पेड़ पर केर फल लगने शुरू हो जाते हैं. यही वजह है कि इस सब्जी का स्वाद साल में सिर्फ कुछ ही दिनों तक लिया जा सकता है. आयुर्वेदिक दृष्टि से भी ‘लाल बाटे’ का यह फूल बेहद लाभकारी माना जाता है. आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. मुकेश कुमार के अनुसार, इसे खाने से लीवर स्वस्थ रहता है, ब्लड प्रेशर संतुलित रहता है और शुगर कंट्रोल में मदद मिलती है. साथ ही यह पेट को ठंडक देने का काम करता है, जिससे गर्मी के मौसम में यह विशेष रूप से फायदेमंद साबित होता है.

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deep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

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