वो LIC एजेंट, जिसने केके-जुबीन गर्ग को बनाया स्टार, लिखे ऐसे गाने, खूब तड़पे जवां दिल

Share to your loved once


Last Updated:

Sayeed Quadri Superhit songs : यह कहानी उस एलआईसी एजेंट की है जिसने 6 साल तक मुंबई में संघर्ष किया. नाकामी हाथ लगी तो घर लौट आया. बीमा का काम फिर से करने लगा. मुंबई में 6 साल बर्बाद हुए तो उसका दर्द सालता रहा. गाने लिखने का शौक जारी रखा. फिर एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि सोई किस्मत जाग गई. फिर से जोधपुर से मुंबई पहुंचे. इस बार दर्द को गीतों में उतारा. कई सुपरहिट गाने लिखे. सिंगर जुबिन गर्ग और एक्टर इमरान हाशिमी को रातोंरात स्टार बना दिया. वो गीतकार कौन है, आइये जानते हैं……

बॉलीवुड फिल्मों में अक्सर एक डायलॉग सुनने को मिल जाता है, जो डर गया, वो घर गया. घर से कुछ बनने का सपना लेकर हजारों मायानगरी मुंबई पहुंचते है. इनमें से कुछ ही वहां टिक पाते हैं. कई थोड़ा बहुत संघर्ष करते हैं और घर लौट आते हैं. जोधपुर का एक गीतकार मुंबई में 6 साल बर्बाद करने के बाद घर लौट आया. वापस बीमा एजेंट का काम करने लगा. फिर उसकी मुलाकात एक प्रोग्राम के सिलसिले में महेश भट्ट से हुई. महेश भट्ट ने उसे देखते ही कहा कि ‘तुम कहां थे, कोई फोन नहीं भी नहीं था. जल्दी मुंबई आओ, तुम्हें एक फिल्म में काम करना है.’ हम बात कर रहे हैं गीतकार सईद कादरी की.

गीतकार सईद कादरी आज किसी पहचान के मोहताज नहीं है. बॉलीवुड के दिग्गत फिल्म निर्माता महेश भट्ट के साथ वो 22 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं. महेश भट्ट ने ही उनकी प्रतिभा को पहचाना. जोधपुर के रहने वाले सईद कादरी मुंबई में 6 साल काम की तलाश में भटकते रहे. काम और नाम सही ढंग से नहीं मिला तो वापस अपने शहर लौट आए. फिर से बीमा एजेंट का काम करने लगे. संयोग से उनके शहर जोधपुर में एक प्रोग्राम में उनकी मुलाकात महेश भट्ट से हुई. महेश भट्ट ने उन्हें देखते ही मुंबई आने का न्यौता दिया.

एक बार फिर से बुलंद हौंसलों के साथ सईद कादरी मुंबई पहुंचे. यह बात 2001-2002 के आसपास की है. महेश भट्ट ‘जिस्म’ और ‘साया’ फिल्म बना रहे थे. दोनों फिल्मों में गाने लिखने का मौका सईद कादरी को मिला. ‘जिस्म’ में सईद ने ‘आवारापन बंजारापन’ जैसा गाना लिखा जो कि यूथ में खूब पॉप्युलर हुआ. ‘साया’ फिल्म में उन्होंने एक ऐसा रूहानी सॉन्ग लिखा जिसे आज भी टूटे दिल आशिक गुनगुनाते हैं. यह गाना ‘ऐ मेरी जिंदगी तू मेरे साथ है’ था. ये दोनों ही फिल्में 2003 में रिलीज हुई थीं.

Add News18 as
Preferred Source on Google

फिर क्या था, सईद कादरी की गाड़ी चल पड़ी. उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. फिर आया साल 2004. अनुराग बासु के निर्देशन में छोटे बजट की फिल्म ‘मर्डर’ रिलीज हुई. महेश भट्ट-मुकेश भट्ट प्रोड्यूसर थे. इमरान हाशई, अस्मित पटेल और मल्लिका शेरावत लीड रोल में थे. इस फिल्म का म्यूजिक सुपरहिट था. फिल्म का एक गाना ‘भीगे होंठ तेरे, प्यासा दिल मेरा’ चार्टबस्टर सॉन्ग था. इस गाने को सईद कादरी ने ही लिखा था.

‘मर्डर’ फिल्म ने सईद कादरी को स्टार बना दिया. इस फिल्म का एक और गाना ‘जिंदगी इस तरह से लगने लगी, रंग उड़ जाएं जो दीवारों से, अब छुपाने को अपना कुछ ना रहा, जख्म दिखने लगे दरारों से’ बहुत मकबूल हुआ था. इस गाने के दो वर्जन थे. मेल वर्जन सोनू निगम ने, फीमेल वर्जन अनुराधा पौडवाल ने गाया है. इस गाने को सईद कादरी ने रियल लाइफ से इंस्पायर्ड होकर लिखा था. उनके दोस्त जो कभी बहुत बड़े आदमी थे, समय खराब हुआ तो आर्थिक हालात खराब हो गए. जब गीतकार सईद उनके घर पहुंचे तो देखा कि दीवारों में दरारें हैं. पेंट नहीं हुआ. यहीं से उन्होंने अपना गाना लिखा.

2004 में ही महेश भट्ट की ”रोग’, ‘जहर’ जैसी फिल्में आईं. इसमें ‘जहर’ फिल्म का निर्देशन मोहित सूरी ने किया था. इस फिल्म के दो गाने सईद कादरी ने लिखे थे. दोनों ही गाने खूब पॉप्युलर हुए. ये गाने थे : अगर तुम मिल जाओ, जमाना छोड़ देंगे हम और वो लम्हें, वो बातें. ‘अगर तुम मिल जाओ’ के दो वर्जन थे. ‘वो लम्हें, वो बातें, कोई ना जाने’ गाना यूथ के बीच खूब पॉप्युलर हुआ. 5 करोड़ के बजट में बनी ‘जहर’ ने 25 करोड़ का कलेक्शन किया था. मर्डर और जहर जैसी फिल्मों ने इमरान हाशमी को स्टार बना दिया.

2006 में भी सईद कादरी की कलम से एक से बढ़कर एक गाने निकले. इस साल उन्होंने ‘वो लम्हे’ और लाइफ इन मेट्रो, गैंगस्टर जैसी फिल्मों के लिए गाने लिखे. इनमें से ‘गैंगस्टर’ मूवी का गाना ‘तू ही मेरी शब है’ ने खूब सुर्खियां बटोरीं. इस गाने को केके ने आवाज दी थी. इसके अलावा, इसी फिल्म एक और गाना ‘या अली रहम अली यार ए कुर्बा हैं सभी’ गाने को जुबीन गर्ग ने अपनी खूबसूरत आवाज से लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया था. इसी तरह ‘वो लम्हें’ फिल्म का एक गाना ‘तू जो नहीं है तो कुछ भी नहीं है’ गाना भी गीतकार सईद कादरी ने लिखा था. इस गाने को सुनते समय एक-एक शब्द दिल पर चोट करता है. ग्लेन जॉन ने इस गाने को खूबसूरत आवाज दी है. ‘वो लम्हें’ का एक गाना ‘क्यों आजकल नींद कम ख्वाब ज्यादा है, क्या मुझे प्यार है कैसा खुमार है’ बहुत पॉप्युलर हुआ था. इस गाने को नीलेश मिश्रा ने लिखा था. केके ने गाया था.

सईद कादरी ने आगे चलकर ‘भूल भुलैया’, जन्नत (2008), दिल तो बच्चा है जी, मर्डर 2, अक्सर 2, जन्नत 2 (2012), बर्फी (2012), मर्डर 3, बागी 3 और मलंग जैसी फिल्मों के गाने लिखे. जन्नत में इमरान हाशमी और सोनल चौहान लीड रोल में थे. ‘जन्नत’ फिल्म के गाने बहुत पॉप्युलर हुए. इन पॉप्युलर गानों में ‘जरा सी दिल में दे जगह तू’, ‘हां तू है, हां तू है’ बहुत पॉप्युलर हुए. इन गानों को केके ने गाया था. आज केके और जुबीन गर्ग इस दुनिया में लेकिन उनके गानों प्रशंसकों के दिल पर राज कर रहे हैं.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP