टेस्ट की 5 सबसे छोटी जीत…मैच का फैसला सिर्फ 1 रन से हुआ, पांच दिन की मेहनत के बाद पलट गई पूरी बाजी
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5 Smallest margin of victory by runs in Test: टेस्ट क्रिकेट के 149 साल के इतिहास में जब पांच दिन का संघर्ष सिर्फ एक रन के फासले पर आकर टिक जाए, तो रोमांच की सारी हदें टूट जाती हैं. 1993 में वेस्टइंडीज की एडिलेड में जीत से लेकर 2023 में न्यूजीलैंड के ऐतिहासिक पलटवार तक, खेल जगत ने ऐसी 5 सबसे छोटी और सांस थाम देने वाली जीतें देखी हैं जिन्होंने दिग्गजों के पसीने छुड़ा दिए.

टेस्ट इतिहास की पांच सबसे छोटी जीत.
नई दिल्ली. टेस्ट क्रिकेट के 149 साल के इतिहास में सैकड़ों मैच खेले गए, लेकिन कुछ मुकाबले ऐसे होते हैं जो हार-जीत के आंकड़ों से ऊपर निकलकर ‘अमर’ हो जाते हैं. जब पांच दिन का खेल, चार पारियां और खिलाड़ियों का पूरा दमखम सिर्फ ए या दा रन के फासले पर आकर टिक जाए, तो समझ लीजिए कि क्रिकेट अपने सबसे क्रूर और सबसे रोमांचक रूप में है. यह टेस्ट क्रिकेट के इतिहास का सबसे प्रतिष्ठित मुकाबला माना जाता है. एडिलेड के मैदान पर 1993 में वेस्टइंडीज ने ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए 186 रनों का लक्ष्य दिया था. ऑस्ट्रेलियाई टीम एक समय 102 रन पर 8 विकेट खोकर संघर्ष कर रही थी, लेकिन टिम मे और क्रेग मैकडरमोट ने हार नहीं मानी. मैच के आखिरी पलों में ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए सिर्फ 2 रन चाहिए थे और उनके पास केवल 1 विकेट बचा था. कर्टनी वॉल्श की एक उठती हुई गेंद मैकडरमोट के दस्तानों को छूकर कीपर के पास गई और वेस्टइंडीज ने 1 रन से जीत दर्ज की. यह टेस्ट इतिहास की पहली ऐसी जीत थी जहां अंतर सिर्फ 1 रन का था.
साल 2023 में तकरीबन 30 साल बाद इतिहास ने खुद को दोहराया. इंग्लैंड की टीम अपने आक्रामक ‘बैजबॉल’ अंदाज में न्यूजीलैंड को फॉलोऑन खिला रही थी. किसी ने नहीं सोचा था कि फॉलोऑन खेलने वाली टीम मैच जीत सकती है. न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड के सामने 258 रनों का लक्ष्य रखा. मैच की आखिरी पारी में नील वैगनर ने जो रूट और बेन स्टोक्स जैसे दिग्गजों को आउट कर मैच फंसा दिया. अंत में जेम्स एंडरसन का विकेट गिरते ही न्यूजीलैंड ने 1 रन से ऐतिहासिक जीत दर्ज की. टेस्ट इतिहास में फॉलोऑन खेलने के बाद मैच जीतने वाली यह सिर्फ चौथी टीम बनी.
टेस्ट इतिहास की पांच सबसे छोटी जीत.
एशेज सीरीज को ‘सदी की सबसे बड़ी सीरीज’ कहा जाता है
साल 2005 की एशेज सीरीज को ‘सदी की सबसे बड़ी सीरीज’ कहा जाता है. एजबेस्टन में खेले गए इस मैच में इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया को 282 रनों का मुश्किल लक्ष्य दिया. शेन वॉर्न और ब्रेट ली ने मैच को आखिरी ओवर तक खींच लिया. जब ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए सिर्फ 3 रन चाहिए थे, तब स्टीव हार्मिसन की एक बाउंसर पर माइकल कास्प्रोविच आउट हो गए. अंपायर बिली बोडेन की उठती हुई उंगली और एंड्रयू फ्लिंटॉफ का ब्रेट ली को सांत्वना देना आज भी क्रिकेट की सबसे यादगार तस्वीरों में से एक है. इंग्लैंड यह मैच 2 रन से जीता था.
जब 3 रन की दीवार न लांघ सकी टीमें
टेस्ट इतिहास में 3 रनों से जीत के दो बड़े उदाहरण मिलते हैं. 1902 में मैनचेस्टर में यह वह दौर था जब पिचें ढकी नहीं जाती थीं. ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को सिर्फ 124 रनों का लक्ष्य दिया था, लेकिन इंग्लैंड की पूरी टीम 120 पर सिमट गई. ऑस्ट्रेलिया ने 3 रन से बाजी मारी. इसके बाद साल 1982 में मेलबर्न में इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया के सामने 292 रनों का लक्ष्य रखा. जेफ थॉमसन और एलन बॉर्डर ने अंतिम विकेट के लिए 70 रन जोड़कर ऑस्ट्रेलिया को जीत के मुहाने पर खड़ा कर दिया था, लेकिन अंत में इंग्लैंड ने 3 रन से जीत छीन ली.
हार और जीत की बारीक लकीर
इन मैचों को देखकर समझ आता है कि टेस्ट क्रिकेट को ‘असली क्रिकेट’ क्यों कहा जाता है. 5 दिनों की मेहनत के बाद जब परिणाम 1 रन से निकलता है, तो वह खिलाड़ियों के चरित्र की परीक्षा होती है. चाहे वो 1993 का कर्टनी वॉल्श का स्पेल हो या 2023 में नील वैगनर की गेंदबाजी, ये रिकॉर्ड बताते हैं कि क्रिकेट में जब तक आखिरी गेंद न फिंक जाए, कुछ भी मुमकिन है.
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करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें