ujjain raja baba mahakaleshwar and maharani Nagarkot Ki Rani Temple | उज्जैन के राजा बाबा महाकाल तो महारानी कौन? चौंका देगा आपको इसका जवाब, सम्राट विक

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उज्जैन के राजा बाबा महाकाल तो महारानी कौन? चौंका देगा आपको इसका जवाब

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उज्जैन के नाम आते ही मन सीधा बाबा महाकालेश्वर के चरणों में पहुंच जाता है. बाबा महाकाल को उज्जैन का राजा माना जाता है लेकिन क्या आपको पता है कि उज्जैन की महारानी कौन हैं. बताया जाता है कि उज्जैन की महारानी बाबा महाकाल के मंदिर से पहले मौजूद हैं और उज्जैनवासियों की रक्षा कर रही हैं. आइए जानते हैं उज्जैन के राजा महाकाल तो महारानी कौन है…

उज्जैन के राजा बाबा महाकाल तो महारानी कौन? चौंका देगा आपको इसका जवाबZoom

उज्जैन को बाबा महाकाल की नगरी माना जाता है. बाबा महाकाल को उज्जैन का राजा कहा जाता है और भक्त बाबा के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से आते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उज्जैन में बाबा को जहां राजा की उपाधि दी गई है, वहीं उज्जैन की रानी कौन हैं? उज्जैन में ही नगर कोट माता का मंदिर स्थित है, जो सिर्फ आध्यात्मिक नजरिए से ही खास नहीं है, बल्कि मंदिर का अपना इतिहास है. मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से नगर कोट माता की पूजा अर्चना करता है, उसको सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और हर कष्ट से मुक्ति मिलती है. आइए जानते हैं उज्जैन की महारानी के मंदिर के बारे में खास बातें…

बाबा महाकाल से पहले यहां हैं मौजूद
उज्जैन शहर की उत्तर-पूर्व दिशा में गोवर्धन सागर के पास मां नगरकोट माता का मंदिर स्थित है. मां को उज्जैन की रक्षक के रूप में पूजा जाता है और उज्जैन की रानी भी कहा जाता है. स्थानीय मान्यता है कि जब उज्जैन में बाबा महाकाल भी नहीं थे, उससे पहले से नगर कोट माता उज्जैन की सीमा पर तैनात उज्जैनवासियों की रक्षा कर रही हैं. यहां नगर मतलब शहर और कोट मतलब परिधि है, मतलब सीमा की रक्षा करने वाली माता.

स्कंद पुराण में है माता का जिक्र
स्कंद पुराण में भी मां के नगर कोट स्वरूप के बारे में बताया गया है, जिसे मां दुर्गा का 7वां रूप माना गया है. यहां में हाथ में अस्त्र लिए हर संकट को काटने के लिए विराजमान हैं. यही कारण है कि मंदिर सिर्फ उज्जैन में ही नहीं बल्कि पूरे देश में विश्व प्रसिद्ध है. उज्जैन में नवरात्र मां नगर कोट माता के बिना अधूरी है.

मंदिर में मौजूद चमत्कारी कुंड
चैत्र और शारदीय नवरात्र में मंदिर का महत्व अपने आप बढ़ जाता है. नवरात्र में नौ दिन मां का अद्भुत शृंगार किया जाता है और भक्त मंदिर में मौजूद कुंड में चमत्कारी जल से मां का अभिषेक करते हैं. स्थानीय मान्यता है कि उज्जैन में जब किसी सरकारी पद पर अधिकारी की तैनाती होती है तो उसे पहले नगरकोट माता का आशीर्वाद लेना जरूरी माना गया है.

सम्राट विक्रमादित्य से है संबंध
मंदिर का इतिहास सम्राट विक्रमादित्य के समय से पुराना है क्योंकि यह उनकी कुलदेवी भी हैं. माना जाता है कि युद्ध से पहले सम्राट विक्रमादित्य नगरकोट माता का आशीर्वाद जरूर लेने आते थे और उन्हीं के काल में मंदिर का निर्माण बड़े पैमाने पर किया गया था. मंदिर में माता नगरकोट की रक्षा के लिए भैरव और भगवान विष्णु की प्रतिमा भी मौजूद है. भक्त मनोकामना पूर्ति और संकट से मुक्ति पाने के लिए मां के दर्शन जरूर करते हैं.

About the Author

Parag Sharma

पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें



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