‘इंसान को पहचान तय करने का हक’, नीरज घेवान ने ट्रांसजेंडर बिल के खिलाफ उठाई आवाज, तिलोत्तमा बोलीं-‘रोकना होगा’
Last Updated:
ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन बिल, 2026 को लेकर देशभर में विरोध तेज हो गया है. राज्यसभा में जया बच्चन ने इसकी कड़ी आलोचना करते हुए ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रतिनिधित्व की मांग उठाई. वहीं, बॉलीवुड से भी इस बिल के खिलाफ आवाजें सामने आई हैं. अभिनेत्री तिलोत्तमा शोम ने इसे पहचान के अधिकार के खिलाफ बताते हुए कहा कि हर व्यक्ति को अपनी पहचान तय करने की आजादी होनी चाहिए. निर्देशक नीरज घेवान और रोहन कानावडे ने भी बिल का विरोध करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया.

नीरज और तिलोत्तमा ने ट्रांसजेंडर बिल का विरोध किया है.
नई दिल्ली. ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन बिल, 2026 को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है. इस प्रस्तावित बिल का कई स्तरों पर विरोध किया जा रहा है. राजनीतिक गलियारों से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक, हर जगह इस पर चिंता जताई जा रही है. आलोचकों का मानना है कि यह बिल ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों और उनकी पहचान को सीमित कर सकता है. राज्यसभा में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए जया बच्चन ने बिल की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय की समस्याओं को समझने और उनका सही समाधान निकालने के लिए संसद में उनके प्रतिनिधि को नामित किया जाना चाहिए. जया बच्चन का यह बयान इस बहस को और तेज कर गया.
अब इस बिल के खिलाफ बॉलीवुड से भी आवाज उठने लगी है. कई कलाकारों ने खुलकर इस प्रस्तावित कानून का विरोध किया है. ‘पाताल लोक’, ‘दिल्ली क्राइम’ और ‘सर’ जैसी चर्चित सीरीज से पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस तिलोत्तमा शोम ने इस मुद्दे पर अपनी स्पष्ट राय रखी. उन्होंने कहा कि इस बिल को हर हाल में रोका जाना चाहिए, क्योंकि यह लोगों से अपनी पहचान तय करने का अधिकार छीन लेता है.
एक्ट्रेस ने बिल को रोकने की उठाई मांग
तिलोत्तमा का मानना है कि पहचान को केवल बॉयोलॉजिकल आइडेंटिटी पर तय करना एक सीमित सोच को दर्शाता है. उनके अनुसार, हर व्यक्ति को अपनी पहचान खुद निर्धारित करने का अधिकार होना चाहिए, और यही एक समावेशी समाज की नींव है. वहीं, फिल्म निर्देशक नीरज घेवान ने भी इस बिल का विरोध करते हुए कहा कि इसका पारित होना दुर्भाग्यपूर्ण होगा. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि व्यक्तिगत पहचान का अधिकार किसी भी लोकतांत्रिक समाज का मूल तत्व होता है, जिसे किसी भी सूरत में सीमित नहीं किया जाना चाहिए.
इसके अलावा निर्देशक रोहन कानावडे ने भी इस प्रस्ताव पर नाराजगी जताई. उनकी फिल्म ‘कैक्टस पियर्स’ (साबर बोंडा), जो समलैंगिक संबंधों पर आधारित है, पहले ही संवेदनशील सामाजिक मुद्दों को सामने ला चुकी है. उन्होंने भी खुलकर इस बिल का विरोध करते हुए इसे अधिकारों का हनन बताया.
क्या है ट्रांसजेंडर बिल 2026?
साल 2026 में पेश किए गए बिल के अनुसार, 2019 के ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) बिल में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है. इसमें संशोधन के बाद व्यक्ति को ट्रांसजेंडर सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए मेडिकल टेस्ट करवाना अनिवार्य है. पहले कोई भी व्यक्ति खुदको ट्रांस घोषित कर सकता था, लेकिन अब नए बिल में ये अधिकार छीन लिया गया है. ट्रांसजेंडर सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए व्यक्ति को मेडिकल टेस्ट करवाना ही होगा और इसके बाद जिला मजिस्ट्रेट ट्रांसजेंडर सर्टिफिकेट जारी करेंगे. साथ ही इसकी परिभाषा को भी काफी सीमित कर दिया गया है.
About the Author
प्रांजुल सिंह 3.5 साल से न्यूज18 हिंदी से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने Manorama School Of Communication (MASCOM) से जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन में डिप्लोमा किया है. वो 2.5 साल से एंटरटेनमेंट डेस्क पर काम कर रही है…और पढ़ें