Pickles Recipe : गन्ने का रस और तीखी धूप…75 साल की इस दादी से सीखें अचार को सालों सुरक्षित रखने का सदियों पुराना सीक्रेट
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How to preserve pickles : गाजीपुर के जमानियां की रहने वाली 75 वर्षीय इंद्राशनि पांडेय ने लोकल 18 से अचार बनाने का वो पारंपरिक तरीका बताया, जो अब लुप्त हो रहा है. इंद्राशनि बताती हैं कि गन्ने के रस से प्राकृतिक सिरका बनाने की प्रक्रिया धैर्य और परिश्रम का काम है. उन्होंने बताया कि कैसे गन्ने के रस को धूप में तपाकर ‘देसी विनेगर’ तैयार किया जाता है और ‘फोरन’ के तड़के से अचार की उम्र बढ़ाई जाती है. आएये जानते हैं बिना किसी केमिकल के सालों तक चलने वाले इस आम के अचार की पूरी विधि.
गाजीपुर. आजकल जहां बाजार में मिलने वाले अचारों में प्रिजर्वेटिव के तौर पर सिंथेटिक सफेद सिरके का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है, गाजीपुर के जमानियां (किशनीपुर) की रहने वाली इंद्राशनि पांडेय (75) उस शुद्ध और पारंपरिक पद्धति को जीवित रखे हुए हैं, जो हमारी दादी-नानी के जमाने की पहचान थी. उनके अनुसार, पहले बाजार के विनेगर नहीं, बल्कि गन्ने का रस ही अचार की उम्र और स्वाद दोनों बढ़ाता था. लोकल 18 से इंद्राशनि बताती हैं कि गन्ने के रस से प्राकृतिक सिरका बनाने की प्रक्रिया धैर्य और परिश्रम का काम है. गन्ने के रस को मिट्टी के बर्तन या कांच की शीशी में भरकर एक से दो महीने के लिए कड़ी धूप में रखा जाता है. धूप की गर्मी से रस पककर आधा हो जाता है और धीरे-धीरे असली सिरके का गहरा रूप ले लेता है. इसके बाद शुरू होता है असली देसी तड़का. तैयार सिरके को कड़ाही में डालकर मिर्च और जीरे का छौंक लगाया जाता है, जिसे स्थानीय भाषा में ‘फोरन’ देना कहते हैं. इस तड़के के बाद इसे वापस शीशियों में भरकर सुरक्षित रख लिया जाता है.
ऐसे तैयार करें अचार
इंद्राशनि ने अचार बनाने की पूरी विधि साझा करते हुए कहा कि सबसे पहले आम को काटकर और धोकर अच्छी तरह धूप में सुखाया जाता है. मसालों के लिए अजवाइन, मंगरैल (कलौंजी), सौंफ, जीरा और राई को हल्का गर्म करके दरदरा पीसा जाता है. फिर इन मसालों में हल्दी, नमक और शुद्ध सरसों का तेल मिलाकर आम के साथ मिक्स किया जाता है. अंत में, सुरक्षा कवच के रूप में वही गन्ने का शुद्ध तड़के वाला सिरका डाला जाता है.
सेहत के लिए औषधि
इंद्राशनि के अनुसार, यह सिरका केवल प्रिजर्वेटिव नहीं, बल्कि एक औषधि भी है. पुराने समय में पेट दर्द या पाचन की समस्या होने पर इसी सिरके का सेवन किया जाता था. इस पारंपरिक विधि से बना आम का अचार एक से दो साल तक बिना खराब हुए बिल्कुल ताजा बना रहता है.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें