Aaj Ka Mausam Live | Today Weather Live: नैनीताल से नालंदा तक आसमान से आफत, आंधी-तूफान के साथ ओलों की मार, IMD का रेड अलर्ट
Today Weather Live: देश में लगातार मौसम का मिजाज बदल रहा है. गर्मी की शुरूआत हो चुकी है हालांकि बीच-बीच में बारिश राहत जरूर दे रही है. पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक आसमान से आफस बरसने जैसे हालात हैं. कहीं ओलों की बरसात हो रही है, तो कहीं तेज आंधी पेड़ों को झुका रही है. बारिश, बिजली और तूफान का यह खतरनाक कॉम्बिनेशन अब सिर्फ एक-दो राज्यों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नैनीताल से लेकर नालंदा तक इसका असर साफ दिखाई दे रहा है. मौसम विभाग (IMD) ने हालात की गंभीरता को देखते हुए रेड अलर्ट जारी कर दिया है. आने वाले 48 से 72 घंटे कई राज्यों के लिए चुनौती भरे हो सकते हैं. मौसम का यह अचानक बदला मिजाज लोगों के लिए राहत और खतरे, दोनों का संकेत दे रहा है.
मौसम विभाग के मुताबिक एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के संयुक्त प्रभाव से देशभर में अस्थिरता बढ़ गई है. इसका असर उत्तर भारत, पूर्वी भारत, मध्य भारत और दक्षिण के कुछ हिस्सों तक फैल चुका है. तेज हवाएं, ओलावृष्टि और बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ सकती हैं. ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और जरूरी एहतियात बरतने की सलाह दी गई है.
पूर्वोत्तर भारत में मौसम का असर सबसे ज्यादा तीव्र रूप में देखने को मिल सकता है. (फाइल फोटो PTI)
- देशभर में मौसम का यह बदला मिजाज सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है. पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और बारिश हो रही है, तो मैदानी इलाकों में धूल भरी आंधी और गरज-चमक के साथ बारिश दर्ज की जा रही है. कई राज्यों में तापमान गिरा है, जिससे गर्मी से राहत मिली है, लेकिन खराब मौसम ने जनजीवन को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है.
- मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक यह अस्थिरता बनी रह सकती है. खासकर उन क्षेत्रों में जहां पहले से बादलों की सक्रियता ज्यादा है, वहां ओले गिरने और तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना बनी हुई है. किसानों के लिए यह समय बेहद संवेदनशील है, क्योंकि रबी की फसल पर इसका सीधा असर पड़ सकता है.
उत्तरप्रदेश में चलेंगी तेज हवाएं
बिहार में ठनका गिरने की संभावना
- बिहार में मौसम की स्थिति सबसे ज्यादा संवेदनशील बनी हुई है. कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और ठनका गिरने का खतरा बना हुआ है. किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, सहरसा और मधेपुरा जैसे जिलों में अलर्ट जारी किया गया है.
- तेज हवाओं की रफ्तार 40 से 50 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जिससे पेड़ों के गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की आशंका है. ओलावृष्टि से रबी की फसल को भारी नुकसान हो सकता है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है. प्रशासन ने लोगों को खराब मौसम के दौरान घरों में रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है.
दिल्ली-एनसीआर में गर्मी से मिल रही राहत
उत्तराखंड में बारिश
- उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मौसम का असर और भी ज्यादा गंभीर रूप में देखने को मिल रहा है. नैनीताल, चमोली, पिथौरागढ़ और रुद्रप्रयाग जैसे जिलों में लगातार बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो रही है. तेज हवाओं के साथ बारिश ने तापमान को काफी नीचे ला दिया है, जिससे ठंड का अहसास फिर से बढ़ गया है.
- मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक यह स्थिति बनी रह सकती है. इससे भूस्खलन और सड़क बाधित होने का खतरा भी बढ़ गया है. पर्यटकों और स्थानीय लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, क्योंकि अचानक मौसम खराब होने से यात्रा प्रभावित हो सकती है.
हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी
हिमाचल प्रदेश में भी मौसम पूरी तरह से बदला हुआ नजर आ रहा है. कुल्लू, शिमला, कांगड़ा, मंडी और चंबा जैसे जिलों में बारिश और बर्फबारी का सिलसिला जारी है. कई इलाकों में घने बादल छाए हुए हैं और बीच-बीच में तेज हवाएं चल रही हैं. मौसम विभाग ने कई जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है. इसका मतलब है कि मौसम खतरनाक हो सकता है और सतर्क रहने की जरूरत है. तापमान में गिरावट के कारण लोगों को ठंड का सामना करना पड़ रहा है, जबकि पहाड़ी रास्तों पर फिसलन बढ़ गई है. इससे यातायात पर भी असर पड़ सकता है.
राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ का तांडव
राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ के असर से मौसम में अस्थिरता बनी हुई है. जयपुर, बीकानेर, जोधपुर और अजमेर जैसे शहरों में धूल भरी आंधी के साथ हल्की बारिश देखने को मिल रही है. 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है, जिससे मौसम में ठंडक तो आई है, लेकिन जोखिम भी बढ़ गया है. कई इलाकों में बिजली गिरने और ओले गिरने की संभावना जताई गई है. इससे जनजीवन के साथ-साथ कृषि कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं.
मध्य भारत और महाराष्ट्र में कैसा रहेगा मौसम
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में मौसम का मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है. कहीं हल्की बारिश हो रही है, तो कहीं तेज हवाएं चल रही हैं. विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्र में बिजली गिरने और आंधी का खतरा ज्यादा है. मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक यह स्थिति बनी रह सकती है. तापमान में थोड़ी गिरावट आई है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली है, लेकिन अस्थिर मौसम के कारण जनजीवन प्रभावित हो सकता है.
दक्षिण भारत का भी तो जान लीजिए हाल
दक्षिण भारत में मौसम का दोहरा असर देखने को मिल रहा है. कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में आंधी-बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है. वहीं केरल और तटीय इलाकों में गर्म और उमस भरा मौसम बना हुआ है. इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कुछ इलाकों में हल्की बारिश से राहत मिली है, लेकिन कुल मिलाकर मौसम अस्थिर बना हुआ है.
नॉर्थ ईस्ट में 70KM की रफ्तार वाली हवाएं
पूर्वोत्तर भारत में मौसम का असर सबसे ज्यादा तीव्र रूप में देखने को मिल सकता है. असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मिजोरम में भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है. 60 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जिससे पेड़ गिरने, सड़क बाधित होने और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा है. कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति भी बन सकती है. प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और जरूरी एहतियात बरतने की सलाह दी है.
मौसम में इतना बड़ा बदलाव क्यों आया है?
मौसम में इस बड़े बदलाव की मुख्य वजह पश्चिमी विक्षोभ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन का सक्रिय होना है. ये दोनों मौसम प्रणालियां जब एक साथ सक्रिय होती हैं, तो वातावरण में अस्थिरता काफी बढ़ जाती है. इससे बादल तेजी से बनते हैं और तेज हवाएं, गरज-चमक, ओलावृष्टि और भारी बारिश जैसी घटनाएं बढ़ जाती हैं. इसके अलावा नमी की उपलब्धता और तापमान में अंतर भी इस स्थिति को और गंभीर बनाते हैं, जिससे कई राज्यों में एक साथ मौसम बिगड़ता है.
किन राज्यों में सबसे ज्यादा खतरा है?
इस समय उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों में सबसे ज्यादा खतरा बना हुआ है. इन क्षेत्रों में तेज हवाओं, बिजली गिरने, ओलावृष्टि और भारी बारिश की संभावना अधिक है. पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और सड़क बंद होने का खतरा है, जबकि मैदानी इलाकों में फसलों और जनजीवन पर असर पड़ सकता है.
क्या इससे गर्मी से राहत मिलेगी?
हां, इस मौसम बदलाव से तापमान में 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है, जिससे लोगों को अस्थायी राहत मिलेगी. लेकिन यह राहत ज्यादा समय तक नहीं टिकेगी. जैसे ही पश्चिमी विक्षोभ का असर खत्म होगा और आसमान साफ होगा, तापमान फिर तेजी से बढ़ सकता है और गर्मी वापस लौट सकती है.
किसानों पर इसका क्या असर पड़ेगा?
किसानों के लिए यह मौसम काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है. ओलावृष्टि और तेज हवाओं से गेहूं, सरसों और अन्य रबी फसलों को भारी नुकसान हो सकता है. खासकर कटाई के समय इस तरह का मौसम फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों को प्रभावित करता है. इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है और बाजार में भी इसका असर देखने को मिल सकता है.
लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
लोगों को खराब मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. बिना जरूरी काम के बाहर निकलने से बचें, खुले मैदान और पेड़ों के नीचे खड़े न हों, और बिजली गिरने के दौरान सुरक्षित स्थान पर रहें. वाहन चलाते समय सतर्क रहें और मौसम विभाग के अपडेट पर नजर बनाए रखें. इसके अलावा मोबाइल और अन्य जरूरी उपकरण चार्ज रखें, ताकि किसी आपात स्थिति में संपर्क बना रहे.