पाप-पुण्य का बोझ भी हमारे सिर! पब्लिक से और टैक्स वसूलने का नया तरीका खोज लाए हिमाचल और ओडिशा
सरकारें अब केवल टैक्स वसूलने वाली मशीनें नहीं रहीं बल्कि वे पुण्य और नैतिकता की नई ‘डीलर’ बन गई हैं. ओडिशा और हिमाचल प्रदेश के ताजा फरमानों को देखकर तो यही लगता है कि अब जनता को अपने गुनाहों का प्रायश्चित और दूसरों की भलाई का खर्च भी सेस (Cess) के रूप में चुकाना होगा. इसे लोक-कल्याण कहें या वित्तीय मजबूरी को छिपाने का इमोशनल कार्ड, हकीकत यह है कि सरकारी खजाना भरने के लिए अब आपकी भावनाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है.
ओडिशा का प्रायश्चित टैक्स!
ओडिशा की नई आबकारी नीति (2026-29) किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी है. सरकार शराब पर 0.5% नशामुक्ति सेस लगा रही है ताकि नशा छुड़वाया जा सके. यह तो वही बात हुई कि पहले गड्ढा खोदो, फिर उसे भरने के लिए फावड़ा खरीदने का टैक्स जनता से मांगो! जगन्नाथ मंदिर के पास शराब बंद करना श्रद्धा का विषय हो सकता है लेकिन होम डिलीवरी बंद करके और सेस लगाकर नशामुक्ति का जो खेल खेला जा रहा है, वह अंततः पीने वाले की जेब ही ढीली करेगा.
हिमाचल का पुण्य सेस
दूसरी तरफ हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने तो भावनाओं की पराकाष्ठा ही पार कर दी है. राज्य कर्ज में डूबा है तो रास्ता निकाला गया विधवा और अनाथ कल्याण सेस. पेट्रोल और डीजल पर यह नया बोझ डालते ही राज्य में तेल की कीमतें ₹100 के पार जाने को तैयार हैं. तर्क दिया जा रहा है कि यह पैसा अनाथ बच्चों के लिए है. सवाल यह है कि क्या राज्य के पास बजट में इन मासूमों के लिए जगह नहीं थी? या फिर अनाथों के नाम पर पेट्रोल महंगा करना राजनीतिक रूप से ज्यादा सेफ सौदा लगा? क्योंकि इस पुण्य के चक्कर में जब माल ढुलाई महंगी होगी, तो गरीब की थाली से रोटी भी कम होगी.
सेस का सॉफ्ट टॉर्चर
यह सेस का खेल दरअसल एक सॉफ्ट टॉर्चर है. टैक्स बढ़ाना सरकार के लिए बदनामी लाता है लेकिन नशामुक्ति या अनाथ कल्याण के नाम पर सेस लगाना एक मास्टरस्ट्रोक माना जाता है. जनता विरोध भी नहीं कर पाती क्योंकि मामला नेकी का होता है. लेकिन कड़वी सच्चाई यही है कि चाहे ओडिशा का पाप धोना हो या हिमाचल का पुण्य कमाना, अंत में बिल आम आदमी पर ही फटेगा.
सवाल-जवाब
ओडिशा सरकार ने शराब पर सेस क्यों लगाया है?
ओडिशा ने 0.5% नशामुक्ति सेस लगाया है ताकि उस पैसे से राज्य में मॉडल नशामुक्ति केंद्र बनाए जा सकें जबकि साथ ही शराब से मिलने वाला राजस्व भी बढ़ाया जा रहा है.
हिमाचल में पेट्रोल-डीजल पर नया सेस क्यों प्रस्तावित है?
हिमाचल सरकार विधवाओं और अनाथ बच्चों के कल्याणकारी योजनाओं के लिए फंड जुटाना चाहती है, जिसके लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का रास्ता चुना गया है.
क्या ये सेस (Cess) वास्तव में उसी काम पर खर्च होते हैं?
नियमतः ‘सेस’ जिस काम के लिए लिया जाता है, उसी पर खर्च होना चाहिए, लेकिन कई बार इसे सरकारी बजट के अन्य घाटों को भरने के लिए ‘एकाउंटिंग’ के जरिए इस्तेमाल कर लिया जाता है.