जन्म से अंधेपन की कहानी…. कैसे महसी के अली की आंखों में हुआ चमत्कार, पढ़िए चमत्कारी बदलाव की कहानी

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मोहम्मद अली की कहानी विश्वास और भक्ति की मिसाल है. मुस्लिम परिवार में जन्म लेने के बावजूद, माता घूरदेवी की सेवा और मंदिर के विकास में उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया. आइए जानते है कहानी…

दरअसल, महसी क्षेत्र के जैतापुर गांव के रहने वाले मोहम्मद अली की आंखों में जन्म से ही दिक्कत थी. मां ने उन्हें कई जगह दिखाया, भलाया, लेकिन कहीं से कोई फायदा नहीं हुआ. जैसे-जैसे अली बड़े हुए, उनकी आंखों के सामने अंधियारा छाने लगा और उन्हें साफ-सुथरा कुछ दिखाई नहीं देता था. तभी मां के मंदिर से उनके जीवन में चमत्कार हुआ.

दरअसल, जब मोहम्मद अली की मां ने सुना कि मां के इस मंदिर पर जाने से सभी दुख-संकट कट जाते हैं और जो सच्चे मन से कामना करते हैं, उन्हें मां पूरी करती हैं, तो उन्होंने फैसला किया. मोहम्मद अली की मां अपने बच्चों को लेकर मंदिर गई और मां के चरणों में चढ़ने वाला नीर (पानी) लेकर मोहम्मद अली की आंखों में डालना शुरू किया. देखते ही देखते, कुछ दिनों में मोहम्मद अली की आंखें ठीक होने लगीं और कुछ समय के बाद वे पूरी तरह सामान्य लोगों की तरह देखने लगे.

मंदिर, दरगाह, चर्च आदि स्थानों से लोगों को शिफा मिलने के बाद अक्सर लोग भंडारा करते हैं, चढ़ावा चढ़ाते हैं और कई वचन लेते हैं. लेकिन मोहम्मद अली ने ऐसा वचन लिया जो शायद किसी और के लिए संभव नहीं था. उन्होंने फैसला किया कि वे अपनी पूरी जिंदगी मंदिर के नाम न्योछावर कर देंगे और मोहम्मद अली ने वचन के अनुसार ही काम किया. उन्होंने मंदिर पर देखरेख करना शुरू किया और मंदिर का प्रचार-प्रसार व जीर्णोद्धार कार्य शुरू कर दिया.

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जहां शुरुआत में घूरदेवी माता मंदिर सिर्फ एक प्रांगण में पिंडी के रूप में विराजमान था, वहीं मोहम्मद अली के अथक प्रयासों से इसे भव्य रूप दिया गया. अब इस मंदिर प्रांगण में हनुमान जी का भव्य मंदिर भी बन चुका है. सरकार और स्थानीय लोगों की मदद से मंदिर में कई निर्माण कार्य हुए हैं. धीरे-धीरे यहां रामनवमी, दुर्गा नवमी, दुर्गा पूजा और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों के अवसर पर भव्य मेला लगता है, जिसमें हजारों लोग दर्शन करने और मोहम्मद अली व माता से जुड़ी कहानी जानने पहुंचते हैं.

सबसे बड़ी बात यह है कि मोहम्मद अली के परिवार में कोई भी माता की सेवा के लिए विरोध नहीं करता. परिवार पूरी तरह मुस्लिम धर्म का पालन करता है रोज़ा, नमाज़ लेकिन मोहम्मद अली रोज़ा और नमाज़ के साथ-साथ माता की भक्ति में भी लीन रहते हैं. मोहम्मद अली का कहना है कि माता की अटूट शक्ति से ही वह ठीक हुआ और उनका पूरा जीवन माता का दिया हुआ है. इसलिए वह जब तक जीवित रहेंगे, माता की सेवा करते रहेंगे.

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