Five Kg Cylinder: किसे दिया जा रहा 5 किलो का LPG स‍िलेंडर और क्या है इसका प्रोसेस, कौन-से डॉक्यूमेंट्स चाहिए?

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नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में तनाव के मद्देनजर गैस और पेट्रोल-डीजल को लेकर केंद्र सरकार ने फैसला किया है कि सभी प्रवासी मजदूरों को 5 किलो का गैस सिलेंडर (एलपीजी) मुहैया कराया जाएगा, जो कि एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है. इसे खास तौर पर समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और घर से दूर रहने वाले लोगों के लिए डिजाइन किया गया है.

सवाल: 5 किलो का गैस सिलेंडर सरकार की तरफ से किन्हें दिया जाता है?
जवाब: यह गैस सिलेंडर मुख्य रूप से निम्नलिखित वर्गों को ध्यान में रखकर दिया जाता है…
गरीब और BPL परिवार: ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ (PMUY) के लाभार्थी, जो 14.2 किलो के बड़े सिलेंडर का एकमुश्त खर्च उठाने में असमर्थ हैं.

प्रवासी मजदूर (Migrant Workers): ऐसे लोग जो रोजगार की तलाश में अपना गांव या राज्य छोड़कर दूसरे शहरों में रहते हैं और जिनके पास वहां का स्थायी पते का प्रमाण (Address Proof) नहीं होता है.

छात्र और युवा पेशेवर: जो पढ़ाई या नौकरी के लिए किराए के मकानों या पीजी (PG) में अकेले या दोस्तों के साथ रहते हैं और जिन्हें कम गैस की जरूरत होती है.

छोटे रेहड़ी-पटरी वाले: जिन्हें अपनी छोटी दुकानों या ठेलों के लिए कमर्शियल इस्तेमाल हेतु छोटे और सुरक्षित सिलेंडर की जरूरत होती है.

सवाल: सरकार यह 5 किलो का सिलेंडर क्यों देती है?
जवाब: सरकार द्वारा इस छोटे सिलेंडर को लॉन्च करने के पीछे कई व्यावहारिक और आर्थिक कारण हैं:
सस्ती रिफिलिंग (आर्थिक राहत): 14.2 किलो का सिलेंडर भरवाने में 800-900 रुपये से ज्यादा का खर्च आता है, जो दिहाड़ी मजदूरों और गरीब परिवारों के लिए मुश्किल होता है. 5 किलो का सिलेंडर 300-400 रुपये में आसानी से भर जाता है.

स्वच्छ ईंधन का निरंतर इस्तेमाल: अक्सर बड़े सिलेंडर का रिफिल महंगा होने के कारण गरीब परिवार वापस लकड़ी या उपलों वाले धुआंयुक्त चूल्हे पर लौट जाते थे. 5 किलो का विकल्प उन्हें लगातार स्वच्छ गैस इस्तेमाल करने में मदद करता है.

पोर्टेबिलिटी (ले जाने में आसानी): यह आकार में छोटा और हल्का होता है. प्रवासी मजदूर या छात्र जब अपना कमरा या शहर बदलते हैं, तो इसे साथ ले जाना बेहद आसान होता है.

दस्तावेजों की परेशानी से मुक्ति: घर से दूर रहने वालों के लिए लोकल एड्रेस प्रूफ बनवाना सबसे कठिन काम होता है. सरकार ने 5 किलो वाले ‘फ्री ट्रेड एलपीजी’ (जैसे इंडेन का ‘छोटू’ सिलेंडर) के लिए एड्रेस प्रूफ की शर्त ही हटा दी है.

सवाल: 5 किलो का गैस सिलेंडर पाने का प्रोसेस क्या है?
जवाब: 5 किलो का गैस सिलेंडर लेने के दो मुख्य तरीके हैं…

तरीका 1: ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ के तहत (मुफ्त कनेक्शन और सब्सिडी के लिए)
यह तरीका आर्थिक रूप से कमजोर (BPL) परिवारों की महिलाओं के लिए है.

पात्रता: आवेदक महिला होनी चाहिए (उम्र 18 वर्ष से अधिक) और उनके घर में पहले से कोई अन्य गैस कनेक्शन नहीं होना चाहिए.

दस्तावेज: आधार कार्ड, राशन कार्ड और बैंक पासबुक. (प्रवासी मजदूरों के लिए राशन कार्ड/एड्रेस प्रूफ की जरूरत नहीं है, वे सिर्फ एक ‘स्व-घोषणा पत्र’ यानी Self-Declaration दे सकते हैं).

आवेदन प्रक्रिया: आप अपने नजदीकी गैस वितरण एजेंसी (Indane, HP, या Bharat Gas) पर जाकर फॉर्म भर सकती हैं या आधिकारिक वेबसाइट (pmuy.gov.in) पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं.

विकल्प का चुनाव: आवेदन करते समय आपको यह चुनना होगा कि आपको 14.2 किलो का कनेक्शन चाहिए या 5 किलो का. पहली बार भरा हुआ सिलेंडर और चूल्हा सरकार की तरफ से मुफ्त मिलता है.

तरीका 2: सामान्य या FTL (Free Trade LPG) के तहत (जैसे इंडेन का ‘छोटू’ गैस सिलेंडर)
यह तरीका उन छात्रों, प्रवासियों या आम लोगों के लिए है जो उज्ज्वला योजना की श्रेणी में नहीं आते हैं, लेकिन उन्हें बिना झंझट के छोटा सिलेंडर चाहिए.

दस्तावेज: इसके लिए किसी भी पते के प्रमाण (Address Proof) की आवश्यकता नहीं है. आपको केवल अपना एक पहचान पत्र (जैसे- आधार कार्ड, पैन कार्ड या वोटर आईडी) दिखाना होता है.

आवेदन प्रक्रिया: आप किसी भी अधिकृत गैस एजेंसी, चुनिंदा पेट्रोल पंप या गैस कंपनियों द्वारा मान्यता प्राप्त स्थानीय किराना स्टोर पर जाकर इसे सीधे खरीद सकते हैं.

खर्च: इसमें आपको शुरुआत में खाली सिलेंडर की कीमत (लगभग 1,150 रुपये) और उसमें भरी गैस के पैसे चुकाने होते हैं. एक बार सिलेंडर आपका हो गया, तो आप इसे कभी भी खाली देकर भरा हुआ सिलेंडर ले सकते हैं.

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