काशी का ये अनोखा बैंक! राम नाम का मिलता है कर्ज, जमा है 19 अरब से ज्यादा की पूंजी
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Ram Ramapati Bank : काशी का ये बैंक अनोखा है. इसके संचालन से जुड़े आकाश मेहरोत्रा लोकल 18 से बताते हैं कि 99 साल पहले इसकी स्थापना की गई. मकसद था राम भक्तों की मनोकामनाओं का पूर्ति करना. उस समय ही इसके लिए कुछ नियम तय किए गए थे, जिसका पालन आज भी किया जाता है. इस दौरान भक्तों से पूरे 8 महीने 10 दिन तक तामसी भोजन का त्याग करना पड़ता है. साल दर साल यहां जमा पूंजी बढ़ती ही जा रही है.
वाराणसी. धर्म नगरी काशी में दुनिया का सबसे अनोखा बैंक है. इस बैंक में पैसों के बजाय प्रभु श्री राम के नाम से लेन देन होता है. इस अनोखें बैंक में भक्त आते हैं और प्रभु श्री राम के नाम का कर्ज लेकर उसे वापस भरते हैं. अब तक इस बैंक में 19 अरब 52 करोड़ 9 लाख से ज्यादा राम नाम की हस्तलिखित पूंजी जमा है, जिसे सालों से सुरक्षित तरीके से इसके संचालकों ने रखा है. साल दर साल यह राम नाम की यह पूंजी बढ़ती ही जा रही है. काशी विश्वनाथ धाम के करीब राम रमापति बैंक एकमात्र ऐसा बैंक है जहां इतनी बड़ी संख्या में प्रभु श्री राम के नाम की हस्तलिखित पूंजी जमा हैं. बैंक के संचालन से जुड़े आकाश मेहरोत्रा बताते हैं कि कि 99 साल पहले इस बैंक की स्थापना राम भक्तों के मनोकामना पूर्ति के लिए की गई थी. उस समय ही इसके लिए कुछ नियम तय किए गए थे, जिसका पालन आज भी किया जाता है.
3 तरीके से मिलता है लोन
इस अनोखे बैंक में रामभक्तों को तीन प्रकार से लोन दिया जाता है, जिसमें राम नाम का पाठ, जाप और लेखन शामिल हैं. सबसे लोकप्रिय तरीका राम नाम का लेखन है. आकाश ने बताया कि जब लोगों की मनोकामनाएं पूर्ण नहीं होती तो वो 8 महीने 10 दिन के तक हर रोज राम नाम का लेखन इस बैंक से दिए गए कागज पर करते हैं. इस अवधि के बाद वो वापस इस लेखन को बैंक में जमा कर देते हैं. अब तक इस प्रकिया के जरिए हजारों रामभक्तों की मनोकामना पूरी हो चुकी हैं.
होता क्या है इसका
राम नाम के लेखन के लिए भक्तों को बैंक की ओर से बताए नियमों का पालन करना होता है. इस दौरान भक्तों से पूरे 8 महीने 10 दिन तक तामसी भोजन का त्याग करना पड़ता है. यानी भक्त रामनाम के लेखन के दौरान लहसुन, प्याज का सेवन नहीं करते हैं. इस बैंक में जमा 19 अरब से ज्यादा हस्तलिखित राम नाम की जमापूंजी का रामनवमी के महापर्व पर झांकी सजाई जाती है. इस झांकी को देखने के लिए दूर-दूर से भक्त यहां आते हैं.
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