सोने की चिड़िया बन चुका है IPL, 2027 से 2031 तक 70000 करोड़ कमाएगी लीग, क्रिकेट में कायदा, व्यापार में फायदा चरम पर

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नई दिल्ली. जब भी IPL का नया सीजन शुरू होता है, एक सवाल खुद-ब-खुद सामने आ जाता है यह लीग आखिर कहां से शुरू हुई थी और आज किस मुकाम पर पहुंच चुकी है. 2008 में एक प्रयोग के तौर पर शुरू हुआ यह टूर्नामेंट आज न सिर्फ क्रिकेट, बल्कि वैश्विक खेल कारोबार का सबसे बड़ा ब्रांड बन चुका है.हर बार जब IPL में किसी टीम की बिक्री होती है या हिस्सेदारी बदलती है, तो चर्चा फिर वहीं पहुंच जाती है 2008 की शुरुआत पर जब तक IPL मीडिया की नजर में बना रहेगा, तब तक इसका ब्रांड और मजबूत होता रहेगा.

हर IPL के साथ यह एहसास और मजबूत होता जाता है कि यह सिर्फ एक क्रिकेट लीग नहीं, बल्कि एक आर्थिक और सांस्कृतिक क्रांति है. 2027 से 2031 के बीच सिर्फ ब्रॉडकास्ट रेवेन्यू से ही BCCI को 70,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई होने की उम्मीद है. यह आंकड़ा ही IPL को दुनिया के क्रिकेट में सबसे बड़ी व्यावसायिक सफलता बनाता है. दुनिया भर की लीग्स IPL जैसा बनने की कोशिश कर रही हैं ग्लैमर भी, क्वालिटी क्रिकेट भी.

सोने की चिड़िया बना आईपीएल 

एक तरह से IPL देश का सबसे बड़ा टैलेंट हंट है, जो हर साल दो महीने तक चलता है सपनों को साकार करता है और नई महत्वाकांक्षाओं को जन्म देता है. यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है और यही इसकी सफलता का राज भी. अब अपने 19वें साल में प्रवेश कर चुका IPL आने वाले समय में और भी बड़ा होने वाला है यह दुनिया के क्रिकेट का सबसे प्रमुख ब्रांड बन चुका है और आगे भी इसकी पकड़ मजबूत रहने वाली है.
IPL ने क्रिकेटरों को नई पहचान दी है, मार्केटर्स को नया निवेश मंच दिया है, ब्रॉडकास्टर्स को एक बेहतरीन प्रोडक्ट दिया है और BCCI को उसकी ‘सोने की चिड़िया’.

राजस्थान रॉयल् और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलुरु जैसी टीमों की बढ़ती कीमतें साफ दिखाती हैं कि अगले दशक में IPL की वैल्यू दोगुनी हो सकती है. करीब 100 करोड़ क्रिकेट फैंस को जोड़ने के बावजूद IPL एक एक्सक्लूसिव क्लब बना हुआ है, जहां सिर्फ बड़े बिजनेसमैन ही टीमों के मालिक बन सकते हैं. टीम खरीदने का मौका बहुत कम आता है, और अगर आता भी है, तो कीमत इतनी ज्यादा होती है कि हर किसी के बस की बात नहीं होती.

IPL से बनी टी20 टीम अजेय!

IPL ने भारतीय क्रिकेट को खासकर टी20 फॉर्मेट में एक ऐसी ताकत बना दिया है, जिसे रोक पाना मुश्किल है। टॉम मूडी ने हाल ही में CII के एक सेशन में कहा, हम दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बैठकर भारत के टैलेंट पूल को हैरानी से देखते हैं. हमारी टीम लखनऊ सुपर जायंट्स में ऐसे कई खिलाड़ी हैं, जो किसी भी इंटरनेशनल टीम में जगह बना सकते हैं, फिर भी वे अनकैप्ड हैं और IPL में मौका तलाश रहे हैं. भारत के पास टैलेंट की कोई कमी नहीं है.वर्ल्ड कप में भारत दूसरी टीम भी उतार सकता है जो उतनी ही मजबूत हो इसमें IPL का बहुत बड़ा योगदान है.

देश को जोड़ने वाली लीग

IPL की खासियत यह भी है कि यह पूरे भारत को जोड़ता है भले ही असम की अपनी कोई टीम न हो, लेकिन वहां के लोग रियान पराग को सपोर्ट करते हैं. अब जब वह राजस्थान रॉयल्स के कप्तान हैं, तो असम का एक बड़ा वर्ग इस टीम के साथ जुड़ गया है. यह टूर्नामेंट वह मंच है जहां सपने हकीकत बनते हैं. भारतीय टीम में जगह बनाना भले ही मुश्किल हो, लेकिन 10 टीमों वाली IPL में मौका मिलना अपेक्षाकृत आसान है और जैसे ही कोई खिलाड़ी यहां जगह बनाता है, वह लाखों दर्शकों के सामने आ जाता है और रातों-रात स्टार बन सकता है.

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