लखीमपुर खीरी में साठा धान की खेती से 60 दिन में किसानों को अच्छा मुनाफा
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लखीमपुर खीरी के तराई क्षेत्र में किसान साठा धान की खेती पर तेजी से जोर दे रहे हैं. यह फसल मात्र 60 दिन में तैयार हो जाती है और गेहूं-सरसों की कटाई के बाद खाली खेतों में लगाई जाती है. एक एकड़ में करीब 20 हजार रुपये लागत आती है, जबकि 60 हजार रुपये तक उत्पादन मिल सकता है. हालांकि मार्च-अप्रैल में अधिक सिंचाई के कारण भूजल स्तर गिरने की चिंता भी बढ़ रही है, फिर भी अधिक मुनाफे के चलते किसान इसकी खेती की ओर आकर्षित हैं.
लखीमपुरखीरी. जिले में किसान इस समय तराई इलाके में साठा धान की खेती पर अधिक जोर दे रहे हैं, जिस कारण किसानों को अच्छा खासा मुनाफा होता है. साठा धान 60 दिन में तैयार हो जाता है, तराई इलाके में किसान सरसों गन्ना व गेहूं की कटाई के बाद खाली पड़े खेतों में किसान साठा धान की रोपाई करते हैं. साठा धान में सिंचाई के लिए पानी की अधिक जरूरत पड़ती है, क्योंकि मार्च-अप्रैल में बारिश कम होती है. ऐसे में भूगर्भ जल का इस्तेमाल ही सिंचाई के लिए होता है. इस वजह से भूगर्भ जल का स्तर तेजी से नीचे जा रहा है. इसको देखते हुए साठा धान की रोपाई पर कई जिलों में प्रतिबंध भी है. परंतु खीरी जिले में किसान साठा धान की खेती कर रहे हैं, यहां प्रतिबंध नहीं लगा हुआ है. वहीं किसानों का मानना है कि साल में दो बार धान की खेती की जा सकती है. लोकल 18 से बातचीत करते हुए किसान विद्याराम ने जानकारी देते हुए बताया कि इस समय करीब उन्होंने तीन एकड़ में साठा की रोपाई करवाई है. मार्च और अप्रैल के महीने में साठा धान की रोपाई होती है उसके बाद 20 जून से लेकर 10 जुलाई तक साठा धान तैयार हो जाता है. उसके बाद किस आसानी से कटाई करने के बाद बरसात के मौसम में फिर धान की खेती करते हैं जिससे अधिक मुनाफा किसान कमाते हैं.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें