पहचान छिपाकर मजदूरी कर रहा था कातिल, 25 साल पहले 3 मर्डर कर हिला डाला था पुलिस महकमा, पढ़ें पूरी दास्तां
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Karauli Triple Murder Case: करौली पुलिस ने 25 साल से फरार ट्रिपल मर्डर के आरोपी को गिरफ्तार किया है. उसे ‘ऑपरेशन हन्ता’ के तहत जयपुर से पकड़ा गया है. उस पर 20 हजार का इनाम घोषित था. कातिल पहचान छिपाकर जयपुर में मजदूरी कर रहा था. पुलिस टीम ने उसे 1 किमी तक पीछाकर दबोचा है. वह 2001 में टोडाभीम के पीलवा गांव में हुए चर्चित तिहरे हत्याकांड में शामिल था.

तीन लोगों की हत्या करके छिपकर मजदूरी कर रहा था युवक
करौली. एक कहानी जो 25 साल पहले शुरू हुई थी, अब जाकर पुलिस की गिरफ्त में खत्म होती दिख रही है. ट्रिपल मर्डर के एक ऐसे आरोपी को पकड़ा गया है, जो इतने सालों से पहचान छिपाकर आराम से जिंदगी काट रहा था. पुलिस के लिए यह सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि एक पुराने केस का बड़ा क्लोजर भी माना जा रहा है.
बताया जा रहा है कि यह वही आरोपी है, जिसने साल 2001 में टोडाभीम थाना इलाके के पीलवा गांव में हुए तिहरे हत्याकांड में भूमिका निभाई थी. उस समय इस वारदात ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी. तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी और कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे. घटना के बाद से आरोपी लगातार फरार चल रहा था.
25 साल तक छिपकर रहा, मजदूर बनकर काटी जिंदगी
पुलिस के मुताबिक आरोपी जोगेंद्र सिंह, जो पीलवा हिंडौन का रहने वाला है, पिछले करीब 25 साल से अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था. वह जयपुर में अलग-अलग जगहों पर मजदूरी करता था और हर बार ठिकाना बदल लेता था, ताकि किसी को शक न हो. उस पर 20 हजार रुपये का इनाम भी घोषित था, लेकिन इसके बावजूद वह इतने सालों तक पकड़ में नहीं आया.
ऑपरेशन हन्ता के तहत कार्रवाई, 1 किमी तक पीछा
इस गिरफ्तारी को ऑपरेशन हन्टा के तहत अंजाम दिया गया. पुलिस अधीक्षक लोकेश सोनवाल के निर्देशन में जिला स्पेशल टीम लगातार इस आरोपी पर नजर रख रही थी. सूचना मिली कि वह जयपुर के झोटवाड़ा इलाके की रेलवे ऑफिसर कॉलोनी के आसपास देखा गया है. इसके बाद टीम ने वहां गुप्त तरीके से निगरानी शुरू की. जैसे ही पहचान पक्की हुई, पुलिस ने उसे पकड़ने की कोशिश की. आरोपी भागने लगा, लेकिन पुलिस टीम ने करीब 1 किलोमीटर तक पीछा कर उसे दबोच लिया.
पुराना विवाद, तीन हत्याएं और लंबी फरारी
साल 2001 में पीलवा गांव में खेत के विवाद को लेकर दो पक्षों में झगड़ा हुआ था. यह झगड़ा इतना बढ़ा कि हथियार चल गए और तीन लोगों की जान चली गई. इस घटना के बाद से आरोपी फरार हो गया था. पुलिस लगातार उसकी तलाश में थी, लेकिन वह हर बार बच निकलता था. अब इतने साल बाद उसकी गिरफ्तारी को पुलिस बड़ी सफलता मान रही है. फिलहाल आरोपी को संबंधित थाने के सुपुर्द कर दिया गया है और आगे की कार्रवाई जारी है. पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई आमजन में विश्वास और अपराधियों में डर की दिशा में एक मजबूत कदम है.
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नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें