35 साल की BJP पार्टी की सेवा फिर भी नहीं मिला टिकट तो छोड़ दी भाजपा…कौन हैं जयंत कुमार दास? जिनके निर्दलीय चुनाव लड़ने से असम में मचा घमासान!

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एक कहावत है कि राजनीति में सबसे बड़ी बात होती है भरोसे की. और जब वही भरोसा ही टूट जाए, तो उसके परिणाम के असर बहुत बुरे होते हैं. कुछ यही इन दिनों असम में के सियासी घटनाक्रम में देखने को मिल रहा है. बीजेपी के पुराने और अनुभवी नेता जयंत कुमार दास ने पार्टी से इस्तीफा देकर सभी को चौंका दिया है. इसके पीछे की वजह है विधायकी का टिकट न मिलना. जिसके बाद असम की राजधानी से जुड़ी सबसे अहम विधानसभा सीट दिसपुर इन दिनों सियासी हलचल का केंद्र बनी हुई है.

35 सालों तक बीजेपी की सेवा की, नहीं मिला टिकट

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 35 सालों से अधिक समय तक बीजेपी के लिए काम करने वाले दास संगठन के मजबूत स्तंभ माने जाते रहे हैं. उन्होंने पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई. लेकिन टिकट वितरण में उनका नाम गायब रहा, जिससे नाराज होकर उन्होंने बगावती कदम उठा लिया. अब वे निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतर चुके हैं. इस फैसले ने असम की राजनीति को नई दिशा दे दी है और मुकाबले को बेहद रोचक बना दिया है. इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि असम में इस बार चुनाव सिर्फ सीट का नहीं, बल्कि साख और वर्चस्व का भी है. तो आइए जानते हैं इस घटनाचक्र की पूरी कहानी.

‘कौन हैं जयंत कुमार दास?’

जयंत कुमार दास बीजेपी के ऐसे नेता रहे हैं, जिन्होंने पार्टी के लिए तीन दशक से ज्यादा समय तक लगातार काम किया. वे असम बीजेपी के पूर्व उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं और संगठन में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती रही है. दास को एक जमीनी और समर्पित नेता के तौर पर देखा जाता है, जिन्होंने पार्टी को मजबूत करने में बड़ा योगदान दिया.

‘अपनों से नाराज, मैदान में अकेले लेकिन दमदार’

मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसपुर सीट पर सियासी पारा उस वक्त अचानक चढ़ गया जब बीजेपी के पूर्व उपाध्यक्ष जयंत कुमार दास ने पार्टी से किनारा कर लिया. उन्होंने खुलकर आरोप लगाया कि पार्टी अब अपने मूल रास्ते से भटक चुकी है. दास ने कहा कि वे अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की विचारधारा से प्रेरित होकर बीजेपी में आए थे, लेकिन अब पार्टी में उन मूल्यों की झलक नहीं दिखती.

‘मोदी-शाह तक नहीं पहुंची बात, दर्द छलका’

दास ने यह भी कहा कि उन्हें बेहद दुख है कि इतने वर्षों की सेवा के बावजूद उनकी बात पीएम नरेंद्र मोदी या अमित शाह तक नहीं पहुंच पाई. उन्होंने कहा कि अगर पीएम मोदी को इस बात की जानकारी होती, तो वे जरूर आहत होते.

दास ने लगाया बड़ा आरोप- असम बीजेपी में तानाशाही

जयंत कुमार दास ने बीजेपी के मौजूदा नेतृत्व पर तानाशाही का आरोप लगाया. उनका कहना है कि एक ही व्यक्ति ने टिकट देने का फैसला लिया, जिससे वे आहत हैं. उन्होंने यहां तक कह दिया कि आज असम में असली बीजेपी कहीं नजर नहीं आती और पार्टी की दिशा बदल चुकी है.

‘दिसपुर की जनता के मुद्दे भी बने चुनावी हथियार’

दास के समर्थकों ने भी खुलकर उनका साथ दिया है. उनका कहना है कि दिसपुर में कृत्रिम बाढ़, पीने के पानी की किल्लत और खराब प्रशासन जैसे मुद्दे लंबे समय से नजरअंदाज किए जा रहे हैं. समर्थकों का दावा है कि जनता अब बदलाव चाहती है और दास इस बदलाव का चेहरा बन सकते हैं.

‘बीजेपी बोली- कोई असर नहीं पड़ेगा’

वहीं बीजेपी ने इस बगावत को ज्यादा तवज्जो नहीं दी है. पार्टी के प्रवक्ता रुपम गोस्वामी ने कहा कि पार्टी में हर कार्यकर्ता अहम है, लेकिन कोई भी व्यक्ति पार्टी से बड़ा नहीं होता. उन्होंने भरोसा जताया कि बीजेपी उम्मीदवार प्रद्युत बोरदोलोई इस सीट से जीत दर्ज करेंगे.

‘त्रिकोणीय मुकाबले ने बढ़ाई टेंशन’

अब इस सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है. एक तरफ बीजेपी, दूसरी ओर कांग्रेस और तीसरी तरफ निर्दलीय जयंत कुमार दास. तीनों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह मुकाबला असम की सियासत की दिशा तय कर सकता है.

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