चित्रकूट का रानीपुर टाइगर रिजर्व हुआ हाईटेक, तीसरी आंख रखेगी हर गतिविधियों पर नजर, जानवरों की बड़ी सुरक्षा
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Chitrakoot News: यूपी के चित्रकूट में बड़ी संख्या में पर्यटक सफारी की सवारी कर जंगलों में रहने वाले जानवरों का दीदार कर रहे हैं और फोटो अपने कैमरे में कैद भी कर रहे हैं. बढ़ती पर्यटक संख्या के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा भी एक बड़ी जिम्मेदारी बन गई है, जिसे वन विभाग गंभीरता से ले रहा है. इसी कड़ी में अब पूरे टाइगर रिजर्व क्षेत्र की निगरानी तीसरी आंख यानी हाईटेक ट्रैप कैमरों के जरिए की जा रही है.
चित्रकूट: उत्तर प्रदेश का चित्रकूट पहले से ही जंगलों की प्रकृति के लिए जाना जाता रहा है. ऐसे में प्रदेश सरकार चित्रकूट में भी टाइगर रिजर्व की शुरुआत करती थी और चित्रकूट में यूपी का चौथा रानीपुर टाइगर रिजर्व बनकर पर्यटकों के लिए चालू है, जिसमें बड़ी संख्या में पर्यटक सफारी की सवारी कर जंगलों में रहने वाले जानवरों का दीदार कर रहे हैं और फोटो अपने कैमरे में कैद भी कर रहे हैं.
वन विभाग के पास बढ़ती पर्यटक संख्या के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा भी एक बड़ी जिम्मेदारी बन गई है, जिसे वन विभाग गंभीरता से ले रहा है. इसी कड़ी में अब पूरे टाइगर रिजर्व क्षेत्र की निगरानी तीसरी आंख यानी हाईटेक ट्रैप कैमरों के जरिए की जा रही है. वन विभाग ने सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए बड़े पैमाने पर कैमरे लगाने की योजना शुरू की है. जानकारी के अनुसार, दुधवा राष्ट्रीय उद्यान से 280 ट्रैप कैमरे रानीपुर भेजे गए हैं, जबकि 70 कैमरे विभाग ने स्वयं खरीदे हैं. इस तरह कुल 350 नए कैमरे पूरे क्षेत्र में लगाए जा रहे हैं.
350 नए कैमरे लगाने की प्रक्रिया शुरू
वही इस संबंध में रानीपुर टाइगर रिजर्व के डीएफओ प्रत्यूष कुमार कटियार ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि वर्तमान में हमारे रानीपुर टाइगर रिजर्व में 125 कैमरे लगे हुए हैं, जो सुरक्षा की दृष्टि से कम है. इसलिए अब नए 350 कैमरे लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है और हमारी टीम टाइगर रिजर्व के क्षेत्र में पहुंच गई है और वह कैमरे लगाने की प्रक्रिया कर रही है.
उनका कहना है कि 52 हेक्टेयर में रानीपुर टाइगर रिजर्व क्षेत्र बसा हुआ है. ऐसे में पूरे क्षेत्र की निगरानी करना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है. इसके साथ ही घने जंगल के कारण अक्सर पत्थर के खनन और पेड़ों की अवैध कटान भी होती रहती है. इसके लग जाने से इस पर भी रोक लगेगी और जो ऐसा करते पाया जाएगा, उन दोषियों पर कार्रवाई होगी. उन्होंने बताया कि इस प्रत्येक कमरे में दो बैटरी और एक मेमोरी कार्ड लगा होगा.
24 लाख रूपये हुए खर्च
उन्होंने आगे की जानकारी में बताया कि इन कैमरों को लगाने में करीब 24.50 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं. ये कैमरे हर गतिविधि पर नजर रखेंगे और दोषियों की पहचान में मदद करेंगे. ये कैमरे दिन-रात हर गतिविधि को रिकॉर्ड करेंगे, जिससे वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ अवैध गतिविधियों पर भी प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा.
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि इसके माध्यम से हम रानीपुर टाइगर रिजर्व में रहने वाले जानवरों का पता लगा पाएंगे कि वह किस क्षेत्र में ज्यादा रहते हैं, ताकि पर्यटकों को वहां ले जाने में सुरक्षा बरती जाए और उनको जानवरों का दीदार भी हो सके.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.