हिंसा को बढ़ावा दे रहा बॉलीवुड! इमरान खान ने ‘धुरंधर’ पर उठाए सवाल? बोले- ‘खून से लतपथ रोल में दिलचस्पी नहीं’
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बॉलीवुड में वायलेंट फिल्मों का चलन बढ़ते जा रहा है. इस लिस्ट में आदित्य धर की फिल्म ‘धुरंधर’ का नाम भी जुड़ गया है. इंडस्ट्री में मारपीट और खून-खराबा से भरी फिल्मों के बढ़ते चलने के बारे में इमरान कहते हैं कि वो ऐसे रोल्स नहीं करना चाहते हैं. वो हिंसा को बढ़ावा देने और सही ठहराने वाली फिल्मों का हिस्सा नहीं बनना चाहते हैं.

इमरान खान ने कहा कि वो हिंसा को बढ़ावा देने वाली फिल्में नहीं करना चाहते हैं.
नई दिल्ली. ‘धुरंधर 2’ के धमाल के बीच अब आमिर खान के भांजे इमरान खान ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया है. इमरान खान के लेटेस्ट बयान को ‘धुरंधर’ में रणवीर सिंह के लुक और साल 2023 में आई रणबीर कपूर के ‘एनिमल’ से जोड़कर देखा जा रहा है. ‘जाने तू या जाने ना’ फेम एक्टर ने रेडिट ‘आस्क मी एनिथिंग’ सेशन के दौरान कहा कि वो इस तरह के खून से लतपथ और गुस्सैल किरदार नहीं अदा करना चाहते हैं.
एक फैन ने इमरान से अपील की कि वे मौजूदा ट्रेंड के ‘माचो’ रोल्स की ओर न जाएं. फैन की इस रिक्वेस्ट पर रिएक्ट करते हुए इमरान खान ने कहा कि उन्हें खून से सना, गुस्से में डूबा और आक्रामक किरदार अदा करने में कोई दिलचस्पी नहीं है. उनके मुताबिक पहले से ही ऐसी फिल्मों की बाढ़ है और वो कुछ अलग करना चाहते हैं और इस लीक से अलग रहना चाहते हैं.
इमरान खान ने रणवीर सिंह पर साधा निशाना?
फैंस ने एक्टर से की खास अपील
एक और फैन ने लिखा, ‘आप उन कुछ एक्टर्स में से थे, जिन्होंने ‘अच्छे आदमी’ को शांत, दयालु और भावनात्मक रूप से समझदार दिखाया. आजकल ज्यादातर बॉलीवुड हीरो तेज-तर्रार, आक्रामक और अक्सर हिंसा या महिलाओं के प्रति गलत व्यवहार को महिमामंडित करते हैं. एक एक्टर के तौर पर आप इस बदलाव को कैसे देखते हैं? क्या आपको लगता है कि यह सिर्फ एक फेज है या कहानी कहने का तरीका बदल रहा है? और क्या आपको लगता है कि फिर से संवेदनशील और जमीन से जुड़े मेल कैरेक्टर्स की वापसी हो सकती है?’
इमरान खान का दावा- ‘हिंसा को बढ़ावा दे रहा बॉलीवुड’
इस सवाल का जवाब देते हुए इमरान खान कहते हैं कि वो भी इस बात से इत्तेफाक रखते हैं. उनका मानना है कि इन दिनों फिल्मों में मारपीट का चलन बढ़ गया है. वो कहते हैं, ‘मैंने भी इस ट्रेंड को नोटिस किया है और मुझे यह देखकर चिंता होती है कि कैसे आजकल फिल्में इमोशनल इममैच्योर पुरुषों को सही ठहराती हैं. फिल्में उन पुरुषों को सही ठहराती हैं जो महिलाओं की ना को स्वीकार नहीं कर पाते हैं. यह समझना जरूरी है कि हिंसा और टॉक्सिसिटी को दिखाने और उसे सही ठहराने में फर्क है. मुझे लगता है कि लोग बिना सोचे-समझे ट्रेंड के पीछे भाग रहे हैं. मेरी अपनी सोच मुझे ऐसी किसी कहानी का हिस्सा बनने की इजाजत नहीं देती, जिसे मैं गैर-जिम्मेदार मानता हूं.’
बता दें, इमरान खान को फिल्मों में उनके सॉफ्ट रोल्स के लिए सराहा गया था. वो टॉक्सिक और मारपीट से भरी फिल्मों के बीच में एक ऐसे एक्टर को तौर पर उबरे थे जिन्होंने साफ्ट रोल्स से दर्शकों का दिल जीत लिया था.
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प्रांजुल सिंह 3.5 साल से न्यूज18 हिंदी से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने Manorama School Of Communication (MASCOM) से जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन में डिप्लोमा किया है. वो 2.5 साल से एंटरटेनमेंट डेस्क पर काम कर रही है…और पढ़ें