लालू यादव ने ललन सिंह को इशारे से बाहर किया, सत्ता बाहर रहते नीतीश कुमार के टकराव कि कहानी, शिवानंद तिवारी ने याद की 1991 की घटना
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Bihar Politics: आरजेडी के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने अपनी राजनीतिक यात्रा की स्मृति में एक प्रकरण को शब्दों में उतारा है. इसमें उन्होंने नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा को दो खंडों में बांटा है. पहला खंड वह दौर था जब नीतीश कुमार सत्ता के बाहर थे और विपक्षी भूमिका में सक्रिय थे. दूसरा खंड सत्ता में आने के बाद का रहा. शिवानंद तिवारी का यह पोस्ट न सिर्फ 1991 की एक अहम घटना को सामने लाता है, बल्कि बिहार की राजनीति के दो बड़े चेहरों के बीच संबंधों की जटिलता को भी उजागर करता है.

शिवानंद तिवारी का खुलासा: बिहार भवन में लालू-नीतीश मुलाकात और दरार का अंदरूनी किस्सा
पटना. जदयू के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी के एक पत्र ने बिहार की राजनीति के पुराने दौर की एक चर्चित घटना को फिर से सुर्खियों में ला दिया है. इस पत्र में उन्होंने नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा को दो हिस्सों में बांटते हुए 1991 की उस घटना का जिक्र किया है, जब दिल्ली के बिहार भवन में लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार आमने-सामने हुए थे. शिवानंद तिवारी ने अपने पत्र में लिखा है कि नीतीश कुमार की राजनीति को मोटे तौर पर दो हिस्सों में देखा जा सकता है. पहला वह दौर, जब वे सत्ता से बाहर थे और संघर्ष कर रहे थे. 1985 में विधायक बनने के बाद 1989 में सांसद और फिर केंद्र में मंत्री बनने तक उनकी राजनीति तेजी से आगे बढ़ी. इस दौरान वे समाजवादी आंदोलन और मंडल राजनीति का अहम चेहरा बनकर उभरे. पत्र में 1991 के लोकसभा चुनाव के बाद की एक चर्चित घटना का जिक्र किया गया है. यह घटना दिल्ली स्थित बिहार भवन की है, जहां एक मुलाकात के दौरान उस समय के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के बीच माहौल अचानक असहज हो गया था. इस मुलाकात में ललन सिंह और वृष्णि पटेल भी मौजूद थे.
ललन सिंह को बाहर भेजने का इशारा
शिवानंद तिवारी के मुताबिक, बैठक के दौरान लालू यादव ने बिना कुछ कहे इशारे से ललन सिंह को कमरे से बाहर जाने को कहा. इस अप्रत्याशित व्यवहार से वहां मौजूद सभी लोग हैरान रह गए और माहौल अचानक गंभीर हो गया. ललन सिंह चुपचाप बाहर निकल गए, जबकि बाकी लोग असहज स्थिति में बैठे रहे.
सरयू राय को लेकर नाराजगी
शिवानंद तिवारी ने आगे लिखा है कि इसके बाद लालू यादव ने सरयू राय को लेकर नाराजगी जताई और उन पर तीखी टिप्पणी की. बताया गया कि सरयू राय के एक लेख को लेकर लालू यादव बेहद आक्रोशित थे. उस लेख में सरकार पर गंभीर आरोप लगाए गए थे, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया था.
शिवानंद तिवारी की तीखी प्रतिक्रिया
अपने पोस्ट में शिवानंद तिवारी ने लिखा कि लालू यादव की टिप्पणी और व्यवहार से उनका धैर्य टूट गया. उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए बैठक छोड़ने की बात कही और नीतीश कुमार से भी वहां से उठने को कहा. स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई, जब माहौल पूरी तरह टकराव की ओर बढ़ने लगा.
लालू यादव ने संभाला माहौल
शिवानंद तिवारी आगे लिखते हैं, स्थिति बिगड़ती देख लालू यादव ने तुरंत हस्तक्षेप किया और माहौल को शांत करने के लिए चाय मंगाई. उन्होंने तिवारी को शांत करने की कोशिश की और नीतीश कुमार को बैठने के लिए कहा. इसके बाद किसी तरह बातचीत खत्म हुई और सभी वहां से निकल गए.
मुलाकात के बाद की रणनीति
बिहार भवन से निकलने के बाद नीतीश कुमार के आवास पर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चा हुई. तय किया गया कि लालू यादव को इस व्यवहार के खिलाफ एक कड़ी चिट्ठी लिखी जाएगी. इसके लिए सरयू राय को बुलाकर पत्र का मसौदा तैयार कराया गया.
चिट्ठी लिखी गई, पर भेजी नहीं गई
शिवानंद तिवारी के मुताबिक, चिट्ठी का मसौदा तैयार हो गया था, लेकिन बाद में शरद यादव से मुलाकात के बाद मामला ठंडा पड़ गया. नीतीश कुमार ने पत्र को छोटा करवाया, लेकिन अंततः वह चिट्ठी भेजी ही नहीं गई. इस तरह एक बड़ा राजनीतिक विवाद टल गया, लेकिन यह घटना दोनों नेताओं के रिश्तों में आई दरार की झलक जरूर दिखाती है.
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