चीन को टक्कर देगा भारत का नया 8-लेन केबल ब्रिज, सिर्फ 34 महीनों में बना देसी इंजीनियरिंग का सबसे बड़ा मास्टरपीस

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एनएचएआई ने वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे के तहत भरूच में नर्मदा नदी पर देश का पहला 8-लेन केबल-स्टेड ब्रिज मात्र 34 महीनों में तैयार किया है. 2.92 किमी लंबे इस पुल में आधुनिक इंजीनियरिंग और एयरोडायनामिक डिजाइन का उपयोग किया गया है. यह संरचना न केवल गुजरात और महाराष्ट्र के बीच यात्रा का समय घटाएगी बल्कि व्यापारिक गतिविधियों को भी गति देकर आधुनिक भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में एक मील का पत्थर साबित होगी.

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चीन को टक्कर देगा 8-लेन केबल ब्रिज, 34 महीनों में बना सबसे बड़ा मास्टरपीसZoom

यह एक्‍सप्रेसवे नर्मदा नदी पर तैयार हुआ है.

नई दिल्‍ली. गुजरात के भरूच में इंजीनियरिंग का एक आधुनिक चमत्कार साकार हुआ है. वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने नर्मदा नदी पर महज 34 महीनों के रिकॉर्ड समय में देश का पहला 8-लेन आइकोनिक केबल-स्टेड ब्रिज तैयार कर लिया है. यह पुल न केवल बुनियादी ढांचे के विकास की गति को दर्शाता है बल्कि भारत की तकनीकी क्षमता का भी प्रतीक बनकर उभरा है.

यह विशाल संरचना वडोदरा-मुंबई सेक्शन के पैकेज-1 के अंतर्गत आती है, जिसकी कुल लंबाई 2.92 किलोमीटर है. इस पुल का मुख्य उद्देश्य गुजरात और महाराष्ट्र के बीच यातायात को निर्बाध बनाना और यात्रा समय में भारी कटौती करना है. अत्याधुनिक इंजीनियरिंग से निर्मित यह ब्रिज भारी वाहनों के भार को सहने के साथ-साथ तेज हवाओं और प्राकृतिक चुनौतियों का सामना करने के लिए एयरोडायनामिक डिजाइन से लैस है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह परियोजना न केवल कनेक्टिविटी सुधारेगी बल्कि क्षेत्र में औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को एक नई रफ़्तार भी देगी.

सवाल-जवाब

नर्मदा नदी पर बने इस नए केबल-स्टेड ब्रिज की कुल लंबाई कितनी है?
वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे के पैकेज-1 में स्थित इस आधुनिक केबल-स्टेड ब्रिज की कुल लंबाई 2.92 किलोमीटर है.

इस ब्रिज को बनाने में कितना समय लगा और यह कितने लेन का है?
इस शानदार पुल को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने 34 महीनों की कड़ी मेहनत के बाद तैयार किया है. यह भारत का पहला 8-लेन वाला आइकोनिक केबल-स्टेड ब्रिज है.

ब्रिज की मजबूती और सुरक्षा के लिए इसमें किन तकनीकी प्रणालियों का उपयोग किया गया है?
ब्रिज की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इसमें स्ट्रक्चरल मॉनिटरिंग सिस्टम, मजबूत स्टील गर्डर और ऊंचे पाइलन (टावर) का उपयोग किया गया है. साथ ही इसका डिजाइन वायुरोधी (एयरोडायनामिक) रखा गया है ताकि यह लंबे समय तक सुरक्षित और स्थिर रहे.

वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे के इस हिस्से के चालू होने से क्या आर्थिक लाभ होंगे?

इस एक्सप्रेसवे के माध्यम से गुजरात और महाराष्ट्र के बीच कनेक्टिविटी तेज होगी. इससे वडोदरा और मुंबई के बीच यात्रा समय घटेगा, जिससे व्यापार, रसद (logistics) और औद्योगिक विकास को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा.

About the Author

Sandeep Gupta

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्‍त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्‍कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें

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