भगवान जगन्नाथ के रत्न भंडार में कितना सोना-चांदी और आभूषण? 46 साल बाद शुरू हुई गिनती, पहले दिन क्या पता लगा

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भगवान जगन्नाथ के रत्न भंडार में कितना सोना-चांदी और आभूषण? पहले दिन क्या मिला

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पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की इन्वेंट्री का पहला दिन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. 46 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हुई इस प्रक्रिया में आधुनिक 3D मैपिंग, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी का उपयोग किया गया. पहले दिन लगभग 6 घंटे की गणना में ‘चलती रत्न भंडार’ के 80% आभूषणों का मूल्यांकन पूरा कर लिया गया. प्रशासन के अनुसार शेष बहुमूल्य वस्तुओं की गिनती आगामी दिनों में जारी रहेगी.

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भगवान जगन्नाथ के रत्न भंडार में कितना सोना-चांदी और आभूषण? पहले दिन क्या मिलाZoom

46 साल बाद आभूषणों की गितनी हो रही है.

ओडिशा के विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर के इतिहास में बुधवार का दिन बेहद ऐतिहासिक रहा. करीब 46 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद रत्न भंडार के गहनों और बहुमूल्य वस्तुओं की आधिकारिक गिनती और मूल्यांकन का काम सफलतापूर्वक शुरू हो गया है. पहले दिन की प्रक्रिया बिना किसी बाधा के संपन्न हुई जिसमें आधुनिक तकनीक का जमकर इस्तेमाल किया गया. श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) के मुख्य प्रशासक डॉ. अरविंद कुमार पाढी ने बताया कि पहले दिन लगभग 6 घंटे तक ‘गणती मानती’ (मूल्यांकन प्रक्रिया) चली जिसमें ‘चलती रत्न भंडार’ के 80% आभूषणों की सूची तैयार कर ली गई है.

आधुनिक तकनीक और 3D मैपिंग का पहरा
इस बार मूल्यांकन की प्रक्रिया को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा गया है. पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने अत्याधुनिक संसाधनों का उपयोग किया है:

·         3D मैपिंग: मंदिर के खजाने और गहनों की सटीक बनावट और रिकॉर्ड के लिए 3D मैपिंग की जा रही है.

·         डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन: पूरी प्रक्रिया की हाई-डेफिनिशन फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई जा रही है.

·         विस्तृत सूची: भगवान जगन्नाथ के दैनिक अनुष्ठानों में उपयोग होने वाले सोने के गहनों और अन्य कीमती वस्तुओं का बारीकी से विवरण तैयार किया जा रहा है.

क्या हुआ पहले दिन?

विवरण श्रेणी महत्वपूर्ण जानकारी
स्थान पुरी, ओडिशा (श्री जगन्नाथ मंदिर)
मुख्य अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार पाढी (मुख्य प्रशासक, SJTA)
ऐतिहासिक महत्व 46 साल बाद (पिछली बार 1978 में) प्रक्रिया शुरू हुई
पहले दिन की उपलब्धि लगभग 80% चल आभूषणों की गणना पूरी हुई
उपयोग की गई तकनीक 3D मैपिंग, डिजिटल फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी
प्रक्रिया की अवधि पहले दिन लगभग 6 घंटे (गणती मानती)
वस्तुओं का प्रकार दैनिक अनुष्ठान में प्रयुक्त होने वाले सोने के गहने और कीमती रत्न
कार्य की स्थिति सफलतापूर्वक संपन्न (प्रथम दिन)
दर्शन व्यवस्था भक्तों के लिए ‘बाहर कथा’ से दर्शन की अनुमति रही

डॉ. अरविंद कुमार पाढी (मुख्य प्रशासक, SJTA)

यह प्रक्रिया छह घंटे से अधिक समय तक चली जिसमें चल रत्न भंडार की वस्तुओं की गणना काफी हद तक पूरी हो गई है. हमने 3D मैपिंग जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग किया है ताकि हर वस्तु का सटीक दस्तावेजीकरण हो सके. आने वाले कुछ दिनों में शेष कार्य भी पूरा कर लिया जाएगा.

प्रशासन ने अभी रत्नों की मात्रा या उनके वजन का खुलासा नहीं किया है. बाकी बचे 20% आभूषणों और ‘भीतर रत्न भंडार’ की इन्वेंट्री आने वाले दिनों में जारी रहेगी. 1978 के बाद यह पहली बार है जब भगवान के खजाने का इस स्तर पर वैज्ञानिक और प्रशासनिक मूल्यांकन हो रहा है.

About the Author

Sandeep Gupta

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्‍त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्‍कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें

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