भारत-अमेरिका ने बना लिया डिफेंस का फ्यूचर प्लान, समंदर से आसमान तक अजेय बनेगी सेना
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भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंधों का एक नया और ताकतवर अध्याय शुरू हो गया है. नई दिल्ली में हुई 18वीं डिफेंस पॉलिसी ग्रुप मीटिंग में दोनों देशों ने कई हजार करोड़ की रक्षा डील्स पर मुहर लगाने की तैयारी कर ली है. इस डील के तहत भारत न सिर्फ घातक P-8I विमान और ‘स्मार्ट बम’ खरीदेगा, बल्कि दोनों देश मिलकर भारत में ही अत्याधुनिक हथियारों का निर्माण (को-प्रोडक्शन) भी करेंगे.

भारत अमेरिका के अधिकारियों ने फ्यूचर प्लान बनाया.
भारत और अमेरिका की दोस्ती अब जमीन पर, हवा में और समंदर की गहराइयों में भी बेहद मजबूत हो रही है. दिल्ली में बुधवार को भारत और अमेरिका के बीच एक बेहद अहम बैठक हुई, जिसे रक्षा कूटनीति की भाषा में अठारहवीं डिफेंस पॉलिसी ग्रुप मीटिंग कहा जाता है. यह दोनों देशों के रक्षा मंत्रालयों के शीर्ष अधिकारियों के बीच वह सबसे महत्वपूर्ण बैठक है, जहां यह तय होता है कि आने वाले सालों में दोनों देश मिलकर अपनी सैन्य ताकत कैसे बढ़ाएंगे और एक-दूसरे की मदद कैसे करेंगे. इस बैठक में भारत की तरफ से रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और अमेरिका की तरफ से अंडर सेक्रेटरी ऑफ वॉर फॉर पॉलिसी एलब्रिज कोल्बी शामिल हुए. यह कोई सामान्य शिष्टाचार मुलाकात नहीं थी, बल्कि इसमें कई हजार करोड़ रुपये की बड़ी रक्षा डील्स और भविष्य की सैन्य रणनीतियों पर सीधी और ठोस बात हुई है.
सबसे बड़ा फोकस भारतीय नौसेना की ताकत को अजेय बनाने पर है. भारत अमेरिका से छह और नए पी-8आई (P-8I) विमान खरीदने की तैयारी कर रहा है. यह कोई साधारण हवाई जहाज नहीं है, बल्कि यह समंदर के ऊपर उड़ने वाला दुनिया का सबसे खतरनाक जासूस और शिकारी विमान है. यह विमान पानी के भीतर बहुत गहराई में छिपी दुश्मन की पनडुब्बियों को ढूंढ निकालने और उन्हें वहीं पर नष्ट करने में माहिर है. आज के समय में जब हिंद महासागर में चीन अपनी दखलंदाजी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, तब भारत के पास ऐसे विमानों का होना किसी ब्रह्मास्त्र से कम नहीं है. यह डील करीब तीस हजार करोड़ रुपये की है. इसे लेकर काफी समय से दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही थी और अब माना जा रहा है कि यह जल्द ही पूरी हो जाएगी. इससे भारतीय नौसेना की समंदर में निगरानी रखने और हमला करने की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी.
सेना के लिए आ रहे हैं अचूक ‘स्मार्ट बम’ और टैंकों के काल ‘जैवलिन’
- भारतीय सेना को तुरंत आधुनिक और सटीक हथियारों से लैस करने के लिए अमेरिका के साथ कुछ खास ‘इमरजेंसी डील्स’ यानी आपातकालीन खरीद भी की जा रही है. इसमें सबसे प्रमुख है ‘एक्सकैलिबर’ नाम के गाइडेड तोपखाने के गोले. इसे आप एक तरह का ‘स्मार्ट बम’ या ‘स्मार्ट गोला’ समझ सकते हैं. यह आम तोप का गोला नहीं है जो हवा के दबाव या दूरी के हिसाब से अपने निशाने से भटक जाए, बल्कि यह जीपीएस और लेजर की मदद से एक सटीक मार करने वाला हथियार है जो सीधा अपने तय निशाने पर ही जाकर गिरता है.
- भारत ने इसके लिए करीब तीन सौ करोड़ रुपये की डील की है. नई दिल्ली में हुई इस बैठक में भारतीय अधिकारियों ने अमेरिका को बहुत ही साफ शब्दों में यह संदेश दिया है कि हमें यह हथियार बिल्कुल तय समय पर चाहिए, इसमें कोई देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
- इसके साथ ही, भारत अमेरिका से ‘जैवलिन’ एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें भी आपातकालीन प्रकिया के तहत खरीदने जा रहा है. यह वही मिसाइल है जिसे दुश्मन के भारी-भरकम और मजबूत टैंकों को एक ही झटके में कबाड़ में बदलने के लिए जाना जाता है. इन हथियारों की खरीद सीधे तौर पर यह दिखाती है कि भारत अपनी सीमाओं पर किसी भी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है.
‘मेक इन इंडिया’ साझीदार बनेगा भारत
भारत का फायदा सिर्फ कुछ नए हथियार खरीद लेने तक सीमित नहीं है. अब भारत अमेरिका के सामने सिर्फ एक ‘खरीददार’ या ‘ग्राहक’ बनकर नहीं खड़ा है, बल्कि वह बराबरी का साझीदार बन रहा है. इस बैठक में दोनों देशों ने ‘को-डेवलपमेंट’ और ‘को-प्रोडक्शन’ पर सबसे ज्यादा जोर दिया है. इसका सीधा और आसान मतलब यह है कि अमेरिका अब सिर्फ अपने बने-बनाए हथियार भारत को नहीं बेचेगा, बल्कि अमेरिकी रक्षा कंपनियां अपनी अत्याधुनिक तकनीक लेकर भारत आएंगी और भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर यहीं पर हथियारों का निर्माण करेंगी. यह भारत के लिए एक बहुत बड़ी जीत है. इससे भारत को दुनिया की सबसे बेहतरीन तकनीक मिलेगी, देश में ही हजारों नए रोजगार पैदा होंगे और हम रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेंगे. विदेशी हथियारों पर हमारी निर्भरता कम होगी और आने वाले समय में हम दुनिया को हथियार बेचने वाले देश भी बन सकेंगे.
कंधे से कंधा मिलाकर लड़ेंगी दोनों सेनाएं
इसके अलावा, दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा युद्धाभ्यास करेंगी. भारतीय सैनिक अमेरिका जाकर और अमेरिकी सैनिक भारत आकर ट्रेनिंग साझा करेंगे. इससे युद्ध के समय दोनों सेनाओं के काम करने का तरीका एक जैसा और ज्यादा प्रभावशाली हो सकेगा. कुल मिलाकर देखा जाए तो यह रक्षा समझौता भारत के लिए एक बड़ा रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक है. दुनिया में इस वक्त जो युद्ध और तनाव का माहौल है, उसे देखते हुए अमेरिका जैसी सुपरपॉवर का हमारी शर्तों पर साथ आना भारत की वैश्विक स्थिति को बेहद मजबूत करता है. भारत अपनी सेना को आधुनिक बना रहा है, नई तकनीक हासिल कर रहा है और बिना किसी का नाम लिए अपने पड़ोसियों को एक कड़ा संदेश भी दे रहा है कि भारत अपनी सुरक्षा के मामले में अब किसी भी तरह का कोई समझौता करने के मूड में नहीं है.
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Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें