Who Was Yudhishthira Second secret Wife Devika | युधिष्ठिर की दूसरी पत्नी देविका कौन थीं और वह छुपी क्यों रहीं?

Share to your loved once


Yudhishthira Second Secret Wife: महाभारत शक्तिशाली राजाओं-रानियों, योद्धाओं और उलझे हुए रिश्तों की कहानियां है. महाभारत का हर पात्र अपने आप में महत्वपूर्ण और हर क्षण रहस्य से भरा हुआ है. क्या आप जानते हैं पांडव भाइयों में सबसे बड़े युद्धिष्ठिर की दूसरी पत्नी कौन थीं. द्रौपदी के बारे में तो हम सभी जानते हैं लेकिन द्रौपदी के अलावा युधिष्ठिर की एक और पत्नी थी और उस पत्नी से एक पुत्र भी था. उनका दूसरी पत्नी का नाम था देविका. जहां द्रौपदी का जीवन संघर्ष और नियति से भरा था, वहीं देविका का जीवन शांत और सरल था. देविका एक राजकुमारी, मां और समर्पित पत्नी थीं और युधिष्ठिर के साथ इनका विवाह वनवास के जाने से पहले ही हो गया था. फिर भी इतिहास में उनके बारे में बहुत कम लिखा गया है. क्या उन्हें भुला दिया गया? या फिर उनकी चुप्पी ही उनकी ताकत थी? आइए जानते हैं धर्माचार्य युधिष्ठिर की दूसरी पत्नी देवकी के बारे में…

देविका: सिवि की राजकुमारी
देविका सिवि राज्य के राजा गोवसेन की पुत्री थीं. वह राजघराने में जन्मी थीं और धर्म व भक्ति के संस्कारों के साथ पली-बढ़ीं. युधिष्ठिर से उनका विवाह एक राजनीतिक और राजसी गठबंधन था, जो उस समय काफी आम बात थी. द्रौपदी के स्वयंवर के विपरीत, देविका का विवाह काफी सरल और शांतिपूर्ण तरीके से हुआ था. देविका बिना किसी बड़े आयोजन के चुपचाप हस्तिनापुर आई थीं. रानी बनने के बाद भी उन्होंने गरिमा और सादगी से जीवन जीना चुना. उनका स्वभाव शांत था और उन्होंने पांडवों के जटिल जीवन का सम्मान किया.

वनवास के समय वह क्यों नहीं दिखीं?
जब पांडवों को 14 वर्षों के लिए वनवास भेजा गया, तब देविका उनके साथ नहीं गईं. वह पांडवों की मां कुंती के साथ रहने का फैसला किया था क्योंकि कुंती के पास देविका के अलावा और कोई नहीं था. उस समय यह फैसला व्यावहारिक और भावनात्मक दोनों था. द्रौपदी को, जो सभी भाइयों की पत्नी थीं, उनके साथ जाना जरूरी था. लेकिन देविका के पास राज्य की जिम्मेदारियां थीं. उनका रुकना उपेक्षा नहीं बल्कि त्याग था. उन्होंने राजघराने की रक्षा की और कठिन समय में गरिमा बनाए रखी. वनवास के दौरान उनकी चुप्पी अनुपस्थिति नहीं बल्कि धैर्य और शक्ति का प्रतीक थी.

यौधेय की मां
देविका ने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम यौधेय था. अपने पिता की तरह, यौधेय को युद्ध और धर्म की शिक्षा मिली थी. यौधेय ने कुरुक्षेत्र युद्ध में अपने चाचाओं और भाइयों के साथ वीरता से भाग लिया और मारा भी गया. युद्ध में पांडवों का कोई पुत्र जीवित नहीं बचा था. देविका ने अपने इकलौते बेटे को खोने का दर्द सहा. फिर भी महाभारत में उनके दुख का विस्तार से वर्णन नहीं है.

देविका की आध्यात्मिक पहचान
कुछ परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, देविका को उर्मिला का अवतार माना जाता है और उन्हें यम की दिव्य ऊर्जा से भी जोड़ा जाता है. वह कृष्ण की भक्त थीं और उनका जीवन आस्था और अनुशासन में रचा-बसा था. द्रौपदी के विपरीत, जिनका जीवन संघर्षों से भरा था, देविका ने चुपचाप शक्ति और नियति को स्वीकार किया. महाभारत के आदिपर्व में उनका संक्षिप्त लेकिन सम्मानजनक उल्लेख है. वह महाकाव्य की उन महान स्त्रियों में गिनी जाती हैं, जिन्हें उनकी पवित्रता, धैर्य और धर्म के प्रति अटूट निष्ठा के लिए सराहा गया है.

इतिहास ने द्रौपदी पर ही क्यों ध्यान दिया?
महाभारत में द्रौपदी प्रमुख घटनाओं के केंद्र में हैं. उनका स्वयंवर, राजसभा में उनका अपमान और उनके कठोर व्रत महायुद्ध के मुख्य कारण बने. उनका जीवन भावनाओं और नाटकीय घटनाओं से भरा था, जिसने राजवंशों की किस्मत बदल दी. इसके विपरीत, देविका ने इंद्रप्रस्थ और हस्तिनापुर में शांत और गरिमामय जीवन जिया. उन्होंने राजपरिवार में सामंजस्य बनाए रखा और पांडवों का सम्मान किया. चूंकि महाकाव्य संघर्ष और घटनाओं पर केंद्रित होते हैं, उनकी चुपचाप शक्ति पृष्ठभूमि में ही रही, लेकिन एक समर्पित पत्नी और मां के रूप में उनकी भूमिका गहरी और सम्मानजनक रही.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP