अयोध्या में यहां स्थित है भगवान राम के कुलदेवी देवकाली का मंदिर, माता कौशल्या यहां करती थीं पूजा, जाने महत्व
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देवकाली मंदिर की धार्मिक मान्यता है कि इसका निर्माण प्रभु राम के वंशज महाराज रघु ने कराया था. प्राचीन परंपराओं के अनुसार सूर्यवंशी राजाओं में शक्ति उपासना का विशेष महत्व था.इसलिए इस मंदिर को राजपरिवार की आराधना का प्रमुख केंद्र माना गया. नवरात्रि के दिनों में यहां विशेष पूजन, दुर्गा सप्तशती पाठ और भक्तों की निरंतर होता रहता है.राम कचहरी चारों धाम मंदिर के महंत शशिकांत दास के अनुसार अयोध्या में माता दुर्गा के अनेक सिद्धपीठ हैं, लेकिन बड़ी देवकाली मंदिर का स्थान अत्यंत विशेष है.
अयोध्या: अयोध्या में धार्मिक आस्था का केंद्र केवल राम मंदिर ही नहीं, बल्कि यहां स्थित प्राचीन मठों और मंदिरों की समृद्ध परंपरा भी है. जिनकी अपनी-अपनी मान्यताएं और ऐतिहासिक महत्व हैं.चैत्र नवरात्रि के अवसर पर पूरी अयोध्या में देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है. सुबह से ही विभिन्न शक्तिपीठों में दर्शन-पूजन के लिए लंबी कतारें लग रही हैं और भक्त मां दुर्गा की आराधना में लीन दिखाई दे रहे हैं. इन्हीं प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है बड़ी देवकाली मंदिर, जिसे प्रभु राम की कुलदेवी का मंदिर माना जाता है.
राम के वंशज रघु ने कराया था निर्माण
धार्मिक मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण प्रभु राम के वंशज महाराज रघु ने कराया था. प्राचीन परंपराओं के अनुसार सूर्यवंशी राजाओं में शक्ति उपासना का विशेष महत्व था.इसलिए इस मंदिर को राजपरिवार की आराधना का प्रमुख केंद्र माना गया. नवरात्रि के दिनों में यहां विशेष पूजन, दुर्गा सप्तशती पाठ और भक्तों की निरंतर होता रहता है.राम कचहरी चारों धाम मंदिर के महंत शशिकांत दास के अनुसार अयोध्या में माता दुर्गा के अनेक सिद्धपीठ हैं, लेकिन बड़ी देवकाली मंदिर का स्थान अत्यंत विशेष है, क्योंकि इसे सीधे प्रभु राम के कुल से जोड़ा जाता है.
राम की माताएं पूजा करने आती थीं
मान्यता है कि त्रेता युग में जब प्रभु राम का जन्म हुआ, तब माता कौशल्या, माता सुमित्रा और राजपरिवार की अन्य महिलाएं बच्चों के साथ इस मंदिर में पूजा-अर्चना करने आती थीं. यहां देवी के समक्ष परिवार की सुख-समृद्धि और राज्य की रक्षा के लिए विशेष प्रार्थना की जाती थी धार्मिक कथाओं के अनुसार, बड़ी देवकाली मंदिर में मांगी गई मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और यहां आने वाला कोई भी श्रद्धालु खाली हाथ नहीं लौटता. इसी विश्वास के कारण नवरात्रि में दूर-दूर से भक्त यहां पहुंचते हैं. मंदिर परिसर में भक्त नारियल, चुनरी, श्रृंगार सामग्री और प्रसाद अर्पित कर माता से अपने परिवार के कल्याण की कामना करते हैं.
यह भी मान्यता है कि प्रभु राम स्वयं अपने समय में इस मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए आते थे इस कारण बड़ी देवकाली मंदिर केवल एक शक्तिपीठ नहीं बल्कि अयोध्या की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है आज भी अयोध्या आने वाले श्रद्धालु बड़ी देवकाली मंदिर के दर्शन को विशेष महत्व देते हैं,विशेषकर नवरात्रि के दौरान यहां आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें