Mahabharata Ashwatthama Agneyastra: द्रोण वध से गुस्साए अश्वत्थामा ने चलाया आग्नेयास्त्र, पांडवों में मचा हाहाकार, कैसे बचे श्रीकृष्ण-अर्जुन?

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Mahabharata Ashwatthama Agneyastra: महाभारत के युद्ध में जब द्रोणाचार्य का वध हुआ, तो यह सुनकर उनका पुत्र अश्वत्थामा अत्यंत क्रोधित हो गया. अश्वत्थामा ने पांडवों के सर्वनाश के लिए नारायणास्त्र चलाया. नारायणास्त्र ने प्रचंड तांडव मचाया लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने उसे शांत कर दिया. इससे अश्वत्थामा तिलमिला उठा, उसके मित्र दुर्योधन ने फिर से नारायणास्त्र चलाने को कहा, तो अश्वत्थामा ने नहीं चलाया क्योंकि वह उसे ही खत्म कर देता. इस पर उसने पांडवों के सर्वनाश के लिए प्रचंड आग्नेयास्त्र चलाया. उसे चलाने से पांडव सेना में हाहाकार मच गया. आग की प्रचंड ज्वालाओं में उनके सैनिक जलने लगे. लेकिन भगवान श्रीकृष्ण, अजुर्न समेत सभी पांडव बच गए. ऐसा कैसे? आइए जानते हैं इस पूरी घटना और आग्नेयास्त्र की खूबियां.

अर्जुन ने अश्वत्थामा को ललकारा

नारायणास्त्र के शांत होने के बाद अर्जुन ने अश्वत्थामा को युद्ध के लिए ललकारा. अर्जुन ने अश्वत्थामा से कहा कि तुम्हारे पास जितना ज्ञान, बल, अस्त्र और शस्त्र है, उन सबका उपयोग मुझ पर कर लो. लेकिन आज तुम्हारा सारा घमंड चूर हो जाएगा. ये बातें सुनकर अश्वत्थामा और क्रोधित हो गया.

आचमन कर आग्नेयास्त्र को किया प्रकट

अर्जुन की बातों को सुनकर अश्वत्थामा से रहा नहीं गया. उसने आचमन करके दिव्य आग्नेयास्त्र को प्रकट किया. उसे अर्जुन और श्रीकृष्ण पर अधिक गुस्सा आ रहा था. उसने उस आग्नेयास्त्र को धनुष पर रखकर मंत्र से अभिमंत्रित किया और उसे पांडव सेना पर चला दिया.

आग्नेयास्त्र की खूबियां

  • उस चलाए गए आग्नेयास्त्र से आकाश में बाणों की भयंकर वर्षा होने लगी. उनसे निकलने वाली आग की लपटें अर्जुन पर टूट पड़ीं.
  • आग्नेयास्त्र के प्रभाव से आकाश से उल्काएं गिरने लगीं. सभी दिशाओं में अंधाकर छा गया.
  • आग्नेयास्त्र के डर से राक्षस और पिशाच साथ में मिलकर चिल्लाने लगे. गरम हवाएं चलने लगीं.
  • आग्नेयास्त्र का प्रभाव ऐसा था कि सूर्य का ताप भी कम हो गया.
  • अपशकुन देखने को मिल रहे थे. कौए सभी दिशाओं में कांव-कांव करने लगे.
  • तीनों लोकों के प्राणी उस आग्नेयास्त्र के प्रभाव से ऐसे तपने लगे, जैसे बुखार से किसी का शरीर तपता है.
  • उस आग्नेयास्त्र का ताप इतना था कि तालाब, नदी, पोखर का पानी भी तपने लगा.
  • आकाश, पृथ्वी सब ओर से बाणों की वर्षा होने लगी. उन सभी बाणों की गति वायु और पक्षीराज गरुड़ से तेज थी.
  • चारों तरफ दुश्मनों के सैनिक गिरने लगे, शूरवीर धराशायी होने लगे.
  • उस आग्नेयास्त्र से निकली आग पांडव सेना को जलाने लगी.

आग्नेयास्त्र का काट ब्रह्मास्त्र

इस आग्नेयास्त्र के प्रभाव से पांडव सेना में हाहाकार मचा हुआ था. तब अर्जुन ने उसे शांत करने के लिए ब्रह्मास्त्र को प्रकट ​किया. ब्रह्मा जी ने इसे सभी प्रकार के अस्त्रों के विनाश के लिए बनाया था. उस ब्रह्मास्त्र के प्रभाव से सारा अंधकार दूर हो गया. ठंडी हवा बहने लगी, सारी दिशाएं साफ हो गईं.

आग्नेयास्त्र से कैसे बचे अर्जुन-श्रीकृष्ण?

अश्वत्थामा ने जो आग्नेयास्त्र चलाया था, उसका दुष्प्रभाव अर्जुन और भगवान श्रीकृष्ण पर नहीं हुआ था. कौरवों और पांडवों की सेनाओं को विश्वास हो गया था कि आग्नेयास्त्र से अर्जुन और श्रीकृष्ण मारे गए हैं. लेकिन उनको जीवित देखकर पांडव सेना खुश हो गई.

यह देखकर कौरव अचरज में पड़ गए कि ये दोनों कैसे बच गए? अश्वत्थामा को भी यह विश्वास नहीं हुआ. वह वहां से भागने लगा. तभी उसे वेद व्यास दिखे. उसने वेद व्यास जी से पूछा कि यह माया है या देवों की इच्छा. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है. यह आग्नेयास्त्र झूठा कैसे हो गया? मुझसे कौन सी गलती हो गई? मेरे इस अस्त्र को असुर, गंधर्व, पिशाच, राक्षस, सर्प, यक्ष, पक्षी और मनुष्य किसी भी तरह व्यर्थ नहीं कर सकते. तो यह आग्नेयास्त्र केवल एक अक्षौहिणी सेना को जलाकर ही शांत हो गया. मैंने अर्जुन और कृष्ण के वध के लिए इस सर्वसंहारक अस्त्र का प्रयोग किया था. फिर भी वे कैसे बच गए?

तब व्यास जी ने अश्वत्थामा को बताया कि भगवान श्रीकृष्ण और कोई नहीं स्वयं नारायण हैं और अर्जुन को भगवान नर का अवतार समझो. श्रीकृष्ण भगवान शंकर के भक्त हैं और उनसे ही प्रकट हुए हैं. इस वजह से श्रीकृष्ण की आराधना करनी चाहिए. नर-नारायण को शिव जी से अनके वरदान प्राप्त हैं, इसलिए उनकी हानि नहीं हो सकती. यह जानकर अश्वत्थामा ने शिवजी को प्रणाम किया और भगवान श्रीकृष्ण की महत्ता को स्वीकार कर लिया.

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