केरलम में लाल सलाम या हाथ का साथ? UDF और LDF में किसका पलड़ा भारी, चौंका रहे ओपिनियन पोल हैं आंकड़े

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तिरुवनंतपुरम: केरलम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए ‘वोट वाइब’ (Vote Vibe) द्वारा जारी किए गए ताजा ओपिनियन पोल के नतीजे राज्य में बेहद रोमांचक और करीबी मुकाबले का संकेत दे रहे हैं . नेटवर्क 18 के इस ट्रैकर के अनुसार, केरलम की सत्ता की लड़ाई में मौजूदा सत्तारूढ़ गठबंधन LDF (वाम लोकतांत्रिक मोर्चा) और विपक्षी UDF (संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा) के बीच वोटों का अंतर लगभग समाप्त हो गया है .

वोट शेयर और सीटों का गणित आंकड़ों के मुताबिक, UDF को 36.6% और LDF को 36.5% वोट मिलने का अनुमान है. हालांकि, सीटों के मामले में LDF को मामूली बढ़त मिलती दिख रही है. वाम मोर्चे को 68-74 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF के खाते में 64-70 सीटें जा सकती हैं. वहीं, NDA को 14.9% वोट शेयर के साथ 1 से 3 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है.

मुख्यमंत्री की पसंद
दो दिग्गजों में होड़ अगले मुख्यमंत्री के तौर पर पिनाराई विजयन और वी.डी. सतीशन के बीच सीधी टक्कर है. जहां 29.2% लोग विजयन को फिर से मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं, वहीं 29% जनता की पसंद सतीशन हैं . भाजपा के राजीव चंद्रशेखर 10.8% के साथ तीसरे सबसे लोकप्रिय चेहरा बनकर उभरे हैं . दिलचस्प बात यह है कि मुस्लिम (39.3%) और ईसाई (36.6%) मतदाता सतीशन को प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि SC/ST समुदाय में विजयन की पकड़ मजबूत है .

क्षेत्रीय समीकरण और प्रमुख मुद्दे

सर्वे के अनुसार, केरलम के अलग-अलग क्षेत्रों में मिजाज अलग है:

· उत्तर केरलम: UDF यहां 26-28 सीटों के साथ मजबूत दिख रहा है .

· मध्य केरलम: यहां भी UDF को 27-29 सीटें मिलने का अनुमान है .

· दक्षिण केरलम: यह क्षेत्र LDF का गढ़ बना हुआ है, जहां उसे 24-26 सीटें मिल सकती हैं .

जनता के बीच महंगाई (19.7%), बेरोजगारी (15.6%) और भ्रष्टाचार (14.4%) सबसे बड़े चुनावी मुद्दे बनकर उभरे हैं .

राजनीतिक दलों की चुनौतियां सर्वे में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा खतरा ‘भीतरी कलह’ (45.5%) को बताया गया है . वहीं, भाजपा की विस्तार की राह में सबसे बड़ी बाधा केरलम के इतिहास और संस्कृति को समझने में विफलता (30.9%) मानी गई है.

निष्कर्ष
कुल मिलाकर, पिनाराई विजयन सरकार के खिलाफ एंटी-इंकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) मौजूद है लेकिन यह इतनी मजबूत नहीं है कि विपक्षी खेमे के पक्ष में एकतरफा लहर पैदा कर सके. मुकाबला इतना करीब है कि 6.7% ‘अनडिसाइडेड’ (अनिर्णय की स्थिति वाले) मतदाता ही आखिरी समय में जीत का फैसला करेंगे.

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