सालों बाद अपनों को पहचान लेते हैं हाथी, बंदरों में दिखता है इंसानों जैसा शोक
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगलों में केवल खूंखार शिकारी ही नहीं रहते, बल्कि यहां रिश्तों और यादों का एक अनोखा संसार भी बसता है. क्या आप जानते हैं कि यहां के हाथी सालों बाद भी अपने बिछड़े हुए साथी को पहचान लेते हैं? और तो और, यहां के बंदर भी अपनों की मौत पर इंसानों की तरह ही घंटों आंसू बहाते हैं. आइए जानते हैं पीलीभीत के इन समझदार और भावुक जीवों की कुछ हैरान कर देने वाली कहानियां.
हाथी की याददाश्त का कोई जवाब नहीं है. ये सालों बाद भी अपने समूह से बिछुड़े सदस्य को पहचान लेते हैं. पीलीभीत टाइगर रिजर्व में हाथियों का कुनबा धीरे-धीरे बढ़ रहा है, और पड़ोसी देश नेपाल के हाथियों के लिए यहां के जंगल किसी ‘पिकनिक स्पॉट’ से कम नहीं हैं. टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर के मुताबिक, हाथी अत्यधिक बुद्धिमान और सामाजिक प्राणी हैं. ये न केवल अपने परिवार और रास्तों को याद रखते हैं, बल्कि वर्षों पुराने जल स्रोतों और पिछले खतरों को भी अपनी स्मृति में संजोए रखते हैं.
ऊदबिलाव की देश में पाई जाने वाली 03 प्रजातियों में से एक प्रजाति स्मूथ कोटेड ऑटर पीलीभीत टाइगर रिजर्व में पाई जाती है. अर्द्धजलीय स्तनधारी के रूप में पहचाने जाने वाले ऊदबिलाव पीलीभीत टाइगर रिजर्व से गुजरने वाली माला नदी, चूका नदी समेत हरीपुर रेंज की भगण्डा झील में देखे जा सकते हैं. यदि टीम वर्क देखना है तो टाइगर रिजर्व में ऊदबिलाव ही इसका उदाहरण है.
टरक्वाइज वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन सोसायटी के अध्यक्ष मोहम्मद अख्तर मियां के मुताबिक साफ़ पानी में समूह के साथ रहने वाले ऊदबिलाव टीम वर्क करते हुए सामूहिक रूप से ही शिकार करते हैं. खतरे की आशंका पर मुखिया व्हिसल बजाकर सचेत करते हैं और संकते मिलते ही यह पहले शिकार का घेराव करते हैं और और फिर एक साथ छलांग लगाकर शिकार को दबोचते हैं.
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व में हाथियों की कुनबा धीरे-धीरे बढ़ रहा है, मगर पड़ोसी देश नेपाल के हाथियों के लिए यहां के जंगल किसी पिकनिक स्पॉट से कम नही हैं. अकसर नेपाली हाथियों के झुंड टाइगर रिजर्व में देखे जाते हैं. टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर के मुताबिक हाथी अत्यधिक बुद्धिमान, सामाजिक प्राणी हैं और अपनी तेज़ याददाश्त और भावनात्मक गहराई के लिए जाने जाते हैं. हाथी अपने जीवन में कई चीजें याद रखते हैं.
मसलन अपने परिवार के सदस्य, झुंड के सदस्य, रास्तों और जल स्रोतों को आसानी से पहचान सकते हैं. यहां तक कि यह अपने पिछले अनुभव जैसे खतरे और भोजन के स्रोतों को भी लंबे समय तक याद रखते हैं. खास बात यह है कि हाथी सालों बाद भी अपने परिवार या समूह के बिछुड़े सदस्य को भी आसानी से पहचान सकते हैं.
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बंदरों का भी संसार बसता है. बाघ हमले के खतरे को देख शाकाहारी वन्यजीवों तक इसकी सूचना पहुंचाने में पक्षियों के साथ बंदर भी अहम भूमिका निभाते हैं. वहीं बंदर अपनी भावुकता और बेहद संवेदनशीलता के लिए जाने जाते हैं.
टरक्वाइज वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन सोसायटी के मुताबिक बंदर के मरने पर अन्य बंदर अक्सर शोक मनाते हैं और मृत बंदर के शव के आसपास ही कई दिन बैठे रहते हैं. यहां तक कि मादा बंदर अपने बच्चे की मौत पर उसके शव को कई दिन तक अपने शरीर से अलग नहीं होने देती. मादा बंदर जहां भी जाते हैं, शव को शरीर से ही चिपकाए रहते है. बंदरों का यह करुणामयी दृश्य कई बार इंसानों की आंखों को भी नम कर देता है.