Lakhimpur Kheri I चुकंदर और सब्जियों की खेती से किसानों की बढ़ती आमदनी
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लखीमपुर खीरी के किसान अब सिर्फ गन्ने तक सीमित नहीं हैं. सब्जियों और चुकंदर की खेती से वे अच्छे मुनाफे कमा रहे हैं. चुकंदर की बढ़ती मांग और आसान खेती के कारण किसानों की आमदनी में भी इजाफा हो रहा है. बलुई दोमट मिट्टी में उगाए जाने वाले ये फसल 60-75 दिनों में तैयार हो जाते हैं, जिससे किसान कम समय में लाभ कमा सकते हैं.
लखीमपुर खीरी. वैसे तो खीरी जनपद, गन्ना की खेती के लिए जाना जाता है. लेकिन कुछ वर्षों से जिले में किसान अब हर तरह की खेती करने लगे हैं जिले के कुछ किसान सब्जियों और फलों की खेती पर ज्यादा जोर दे रहे हैं. उनका मानना है कि इन सब्जियों और फलों की खेती से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. सब्जियों की खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार उद्यान विभाग की ओर से किसानों को जागरूक किया जा रहा है और किसानों को निशुल्क बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे किसान सब्जियों की खेती कर लाखों रुपए आसानी से कमा सके.
वहीं जिले में किसान अब चुकंदर की खेती करने लगे हैं चुकंदर की खेती कर किसानों को अच्छा खासा मुनाफा होता है. चुकंदर की बढ़ती डिमांड के कारण किसानों की आमदनी भी बढ़ती जा रही है. वही चुकंदर हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है, किसान ने जानकारी देते हुए बताया कि पहले हम सब्जी की बिक्री करते थे वहीं अब सब्जी अपने खेतों में उगा रहे हैं. जिससे अच्छा खासा मुनाफा होता है. चुकंदर की खेती आसानी से किसान कर सकते हैं. चुकंदर की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है. चुकंदर की बुवाई के बाद 60 से 75 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है. चुकंदर की खेती कम लागत में तैयार होकर अच्छा मुनाफा देती है.
लोकल 18 से बातचीत करते हुए बिजुआ ब्लॉक क्षेत्र के रहने वाले किसान रूप सिंह ने जानकारी देते हुए बताएं इस समय करीब हम दो बीघा में चुकंदर की खेती कर रहे हैं. शादी पार्टियों के साथ-साथ सलाद में भी चुकंदर की अधिक डिमांड रहती है. जिस कारण बाजारों में अधिक डिमांड रहती है. इस समय 40 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिक्री होती है. प्रतिदिन हजारों रुपए चुकंदर की खेती से कमाए जा सकते हैं, वहीं जिले में किसान अब सब्जी की खेती पर अधिक जोर दे रहे हैं.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें