सुपर स्टार ने ट्रेन में लिखी स्क्रिप्ट, मूवी ने रिलीज होते ही रचा इतिहास, जीते 7 फिल्मफेयर अवॉर्ड

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Upkar Movie 1967 Unknown Facts : भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री से मुलाकात के बाद सुपर स्टार मनोज कुमार दिल्ली से मुंबई के लिए रवाना. उसके दिमाग में उथल-पुथल मची हुई थी. ऐसे में उसने ट्रेन में ही अपनी अगली फिल्म का फर्स्ट हाफ लिख लिया. कहानी भारत-पाकिस्तान युद्ध पर आधारित थी. मनोज कुमार यह फिल्म राजेश खन्ना को लेकर बनाना चाहते थे लेकिन बात नहीं बनी. ऐसे में उन्होंने खुद ही फिल्म के डायरेक्शन की कमाल संभाली. आशा पारेख और प्राण को अहम भूमिकाओं के लिए साइन किया. फिर क्या था, ऐसी फिल्म बनकर तैयार हुई जिसने रिलेज होते ही तहलका मचा दिया. मूवी ने उस साल 7 फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते. बेस्ट फीचर फिल्म का सेकंड नेशनल अवॉर्ड भी जीता. यह फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं……

भारत-पाकिस्तान युद्ध की पृष्ठभूमि पर बॉलीवुड में कई फिल्में बनाई गई हैं. ऐसी ही एक फिल्म 1967 में सिनेमाघरों में आई थी. इस फिल्म का नाम ‘उपकार’ था जिसका डायरेक्शन मनोज कुमार ने किया था.प्रोड्यूसर हरिकिशन आर. मिरचंदानी और आरएन गोस्वामी थी. मनोज कुमार को इस फिल्म को बनाने की प्रेरण तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री से हुई मुलाकात से मिली थी. यह मुलाकात ‘शहीद’ फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान हुई थी. फिल्म किसान और जवान के योगदान को दिखाती है. शास्त्री ने ही मनोज कुमार को ‘जय जवान-जय किसान’ थीम पर फिल्म बनाने का सुझाव दिया था. शास्त्री से मुलाकात के बाद जब मनोज कुमार दिल्ली से मुंबई वापस लौट रहे थे तो उन्होंने फिल्म का फर्स्ट हाफ लिख लिया था. आइये जानते हैं फिल्म से जुड़े दिलचस्प फैक्ट्स…

वैसे तो मनोज कुमार यह फिल्म राजेश खन्ना के साथ बनाना चाहते थे लेकिन बात नहीं बनी. राजेश खन्ना ने ऑल इंडिया टैलेंट कॉन्टेस्ट जीत लिया था, ऐसे में वो फिल्म से पीछे हट गए. बाद में उनका रोल प्रेम चोपड़ा को दिया गया. फिल्म में आशा पारेख, प्रेम चोपड़ा, प्राण, कामिनी कौशल और मदन पुरी की भूमिकाएं बेहद खास थीं. म्यूजिक कल्याण जी – आनंद जी का था. फिल्म के गाने कमर जलालाबादी, इंदीवर, गुलशन बावरा और प्रेम धवन ने लिखे थे. फिल्म का देशभक्ति से ओत-प्रोत गाना ‘मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे-मोती’ गुलशन बावरा ने लिखा था. यह कालजयी गाना आज भी हमें 26 जनवरी और 15 अगस्त को पूरे देश में सुनने को मिलता है.

बतौर डायरेक्टर यह मनोज कुमार की पहली फिल्म थी. यह फिल्म प्राण के करियर के लिए टर्निंग प्वॉइंट साबित हुई. उन्होंने पहली बार सकारात्मक भूमिका निभाई थी. ‘मलंग चाचा’ का कालजयी किरदार प्राण ने ही निभाया था. ‘कसमें वादे प्यार वफा सब, बातें हैं बातों का क्या’ जैसा एवरग्रीन सैड सॉन उन पर फिल्माया गया था. गाने के बोल दिल को चीर देने वाले थे. उनका डायलॉग ‘राम तो हर युग जन्म लेते हैं लेकिन लक्ष्मण केवल एक ही बार पैदा होते हैं’ कितना फेमस हुआ, आप सबको पता है. उनका इसी फिल्म का एक और डायलॉग ‘राशन पर भाषण बहुत हैं लेकिन भाषण पर राशन कोई नहीं’ आज भी फेमस है.

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‘कसमें वादे प्यार वफा सब..’ से एक और दिलचस्प किस्सा जुड़ा हुआ है. जब मनोज कुमार ने इस गाने को प्राण पर फिल्माने के बारे में बताया तो फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर कल्याण जी – आनंद जी नाखुश हो गए. उन्होंने सोचा कि मनोज इतने अच्छे गाने को विलेन पर फिल्मा रहे हैं लेकिन यह गाना मैसिव हिट रहा और प्राण की इमेज भी इसी गाने ने बदल दी.

मनोज कुमार ने आशा पारेख को काम जरूर दिया लेकिन उनसे कहा था कि इमोशनल सीन करते समय उनके माथे पर लकीरें नहीं आना चाहिए. आशा पारेख ने सहज तरीके से अभिनय किया. वो बहुत ही खूबसूरत नजर आईं. यह लीजेंड सिंगर शमशाद बेगम की आखिरी फिल्म थी. फिल्म में कुल 7 गाने थे. हर गाना सुपरहिट था. इन गानों में ‘दीवानों से ये मत पूछो’, ‘कसमें वादे प्यार वफा सब’, ‘मेरे देश की धरती सोना’, ‘आई झूम के बसंत’, ‘गुलाबी रात गुलाबी’, ‘हर खुशी हो वहां’ और ‘ये काली काली रात’ शामिल थे.

‘उपकार’ फिल्म के बाद मनोज कुमार और गुलशन बावरा की दोस्ती में खटास आ गई थी. मनोज ने ही बतौर गीतकार गुलशन बावरा को फिल्म में ब्रेक दिया था. उन्होंने ही ‘मेरे देश की धरती सोना उगले-उगले हीरे मोती’ गाना लिखा था. गुलशन बावरा का पूरा नाम गुलशन कुमार मेहता था. वो 1955 में बॉम्बे पहुंचे. रेलवे गोदाम में उनकी नौकरी लगी थी. गोदाम में वो अक्सर गेहूं-चावल से भरे थैले देखते थे. उन्होंने इस सुनहरे दृश्य पर एक कविता लिखी जिसके बोल थे : मेरे देश की धरती सोना उगले-उगले, जवानों भर लो झोलियां. कल्याण जी-आनंद में इसके बदलाव कराकर गाना लिखवाया : मेरे देश की धरती सोना, उगले-उगले हीरे मोती. मनोज कुमार के बारे में गुलशन बावरा ने प्रेस को बताया था कि वो रियल लाइफ में शराब पीते है. भारत कुमार की उनकी इमेज सिर्फ दिखावा है.

इस फिल्म की शूटिंग दिल्ली के पास एक गांव नागल ठाकरा में हुई थी. यूनिट पूरे दिन गांव में रहती थी और रात को दिल्ली लौट आती थी. इस फिल्म की शूटिंग के दौरान मनोज कुमार और आशा पारेख के बीच मनमुटाव हो गया था. दरअसल, मनोज कुमार सुबह-सुबह फिल्म के लिए शॉट लेते थे. इससे आशा पारेख नाराज हो गई. दोनों के बीच बातचीत भी बंद हो गई. हालांकि आशा पारेख ने किसी तरह फिल्म पूरी की लेकिन प्रीमियर में वो शामिल नहीं हुई थी. पूरे दो साल दोनों के बीच बातचीत बंद रही. 1969 में ‘साजन’ फिल्म के दौरान दोनों ने बातचीत शुरू की.

‘उपकार’ मूवी ने रिलीज होते ही तहलका मचा दिया. यह 1967 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी. 1.4 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने करीब 3.5 करोड़ का नेट कलेक्शन किया था. फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई. फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई. उपकार को 7 फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले थे. बेस्ट फिल्म, बेस्ट डायरेक्टर (मनोज कुमार), बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर (प्राण), बेस्ट गीतकार (गुलशन बावरा, मेरे देश की धरती), बेस्ट स्टोरी (मनोज कुमार), बेस्ट डायलॉग (मनोज कुमार) और बेस्ट एडिटिंग का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला. मूवी को सेकंड बेस्ट फीचर फिल्म का नेशनल अवॉर्ड भी मिला.

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