1954 से 2021 तक भगत सिंह पर बनी ये 7 फिल्में, चार की रेटिंग 8 से ज्यादा, 1 पर हुआ विवाद, 2 ने जीते नेशनल अवॉर्ड
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आज शहीद दिवस है. हर साल 23 मार्च को मनाया जाता है और स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के बलिदान को याद किया जाता है. 23 मार्च 1931 को भारत के इन वीर क्रांतिकारियों को ब्रिटिश सरकार ने फांसी की सजा दी थी और इन तीनों ने हंसते-हंसते मौत को गले लगाया और हमेशा के लिए अमर हुए. इन शहीदों की वीरा गाथा को कई किताबों में आपने पढ़ा ही होगा. इन पर फिल्में भी बनी हैं.
भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के बलिदान को सम्मान देने के लिए शहीद दिवस मनाया जाता है. इन स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन पर केंद्रित और भारत की आजादी में योगदान देने वाली कहानियां कई फिल्मों में दिखाई गई है. इन फिल्मोंन उनकी विरासत को संजोने में अहम भूमिका निभाई है, और उनके संघर्षों-बहादुरी को नई पीढ़ी के सामने जीवंत किया है. ये फिल्में न सिर्फ शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम हैं, बल्कि युवाओं को अपनी संस्कृति और परंपरा को गर्व के साथ अपनाने के लिए प्रेरित भी करती हैं. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @amplparashar)
शहीद भगत पर बनी पहली बॉलीवुड फिल्म साल 1954 में आई. ‘शहीद-ए-आजम भगत सिंह’ ब्लैक एंड व्हाइट हिंदी फिल्म है. फिल्म जगदीश गौतम ने डायरेक्ट किया था. यह भारतीय क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह पर बनी पहली बायोपिक फिल्म मानी जाती है. फिल्म में प्रेम अदीब ने भगत सिंह का किरदार निभाया है और इसमें मशहूर गीत ‘सरफरोशी की तमन्ना’ भी शामिल है. इस फिल्म को सेंसरशिप का सामना करना पड़ा था क्योंकि भगत सिंह के परिवार ने इसमें उनके चित्रण पर आपत्ति जताई थी. इस फिल्म की आईएमीडीबी रेटिंग 8.2 है. (फोटो साभारः आईएमडीबी)
साल 1965 में आई मनोज कुमार स्टारर ‘शहीद’ सुपरहिट फिल्म थी. फिल्म को एस. राम शर्मा ने डायरेक्ट किया. मनोज कुमार ने भगत सिंह का किरदार निभाया. फिल्म की कहानी भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की बहादुरी और शहादत के इर्द-गिर्द घूमती है. इस फिल्म ने लोगों के बीच भगत सिंह की छवि को काफी बदल दिया. ‘मेरा रंग दे बसंती चोला’ और ‘ए वतन’ जैसे गाने हिट हुए. इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था और इसे भारतीय इतिहास की सबसे प्रभावशाली देशभक्ति फिल्मों में गिना जाता है. इसकी आईएमडीबी रेटिंग 8.2 है. (फोटो साभारः आईएमडीबी)
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साल 2022 में आई राजकुमार संतोषी की ‘द लीजेंड ऑफ भगत सिंह’ में अजय देवगन ने भगत सिंह का किरदार निभाया. यह फिल्म भगत सिंह के बचपन से लेकर युवा क्रांतिकारी बनने और जेल में बिताए समय तक की कहानी दिखाती है, जब तक उन्हें फांसी की सजा नहीं मिलती. फिल्म भगत सिंह की विचारधारा, ब्रिटिश अत्याचार के खिलाफ उनकी लड़ाई और स्वतंत्र भारत के उनके सपनों को गहराई से दिखाती है. फिल्म को ऐतिहासिक सटीकता, दमदार पटकथा और प्रभावशाली संवादों के लिए सराहा गया. इसे हिंदी में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला. इसकी आईएमडीबी रेटिंग 8.2 है. (फिल्म पोस्टर)
साल 2002 में अजय देवगन की फिल्म के साथ सोनू सूद ने ‘शहीद ए आजम’ से बॉलीवु़ डेब्यू किया. फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर अच्छा रिस्पांस नहीं मिला, लेकिन क्रिटिक्स ने इसे खूब सराहा. फिल्म की आईएमडीबी रेटिंग 7.8 है.
‘द लीजेंड ऑफ भगत सिंह’ और ‘शहीद ए आजम’ के साथ ही सनी देओल और बॉबी देओल स्टारर ’23 मार्च 1931: शहीद’ रिलीज हुई. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हुई. इसकी आईएमडीबी रेटिंग 5.2 है. इसे गुड्डू धनोआ ने डायरेक्ट किया. यह भी भगत सिंह के जीवन को श्रद्धांजलि देती है. बॉबी देओल ने भगत सिंह की भूमिका निभाई, जबकि सनी देओल ने चंद्रशेखर आजाद का किरदार निभाया. फिल्म में भगत सिंह के जीवन की अहम घटनाएं जैसे लाहौर षड्यंत्र केस, असेंबली बम कांड और ब्रिटिश शासन के खिलाफ उनका दृढ़ विरोध दिखाया गया है.
साल 2006 में आई ‘रंग दे बसंती’ को राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने डायरेक्ट किया. फिल्म आज के युवाओं को क्रांतिकारी इतिहास से जोड़ती है. इसमें कुछ कॉलेज के छात्र हैं जो एक डॉक्यूमेंट्री में भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और अन्य क्रांतिकारियों की भूमिका निभाते हैं, और इसके बाद वे आधुनिक भारत में फैली भ्रष्टाचार और अन्याय की भयावह स्थिति को महसूस करने लगते हैं. फिल्म में सिद्धार्थ ने भगत सिंह का किरदार निभाया. इसकी आईएमडीबी रेटिंह 8.2 है.
साल 2021 में आई ‘सरदार उधम’ डायरेक्ट ओटीटी पर रिलीज हुई. वैसे तो यह उधम सिंह की बायोपिक थी. फिल्म में उधम सिंह और भगत सिंह की दोस्ती को गहराई से दिखाया गया है. उधम सिंह, भगत सिंह से प्रभावित थे. अमोल पराशर ने इसमें भगत सिंह का किरदार निभाया, जबकि विक्की कौशल उधम सिंह बने. फिल्म को सुजीत सरकार ने डायरेक्ट किया था. फिल्म ने बेस्ट फीचर फिल्म का नेशनल अवॉर्ड जीता था. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @amolparashar)