चंदौली में सूर्य देव को अर्घ्य और व्रत की शुरुआत
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पूर्वी यूपी के चंदौली जिले में चैती छठ महापर्व की शुरुआत नहाय-खाय से हुई. व्रती महिलाओं ने भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया और कठोर व्रत का संकल्प लिया. अगले तीन दिन तक निर्जला व्रत, खरना और अस्ताचलगामी-अर्द्ध उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने का अनुष्ठान चलेगा, जो आस्था, समर्पण और समाज में एकता का प्रतीक है.
चंदौली. पूर्वी यूपी के चंदौली जिले में चार दिवसीय चैती छठ महापर्व की शुरुआत नहाय-खाय के साथ हो गई. व्रतियों ने सुबह स्नान-ध्यान कर भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया और व्रत का संकल्प लिया. इसके बाद कद्दू, चावल और दाल से बने शुद्ध भोजन को भगवान को अर्पित कर स्वयं ग्रहण किया. प्रसाद के रूप में इसे परिवार और आसपास के लोगों में भी वितरित किया. महापर्व के दूसरे दिन यानी 23 मार्च को खरना का अनुष्ठान किया जाएगा. इस दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखते हैं और शाम को स्नान-ध्यान के बाद खीर-रोटी का प्रसाद बनाकर भगवान को अर्पित करते हैं. इसके बाद व्रती स्वयं प्रसाद ग्रहण करते हैं और इसे अपने परिजनों व मित्रों में बांटते हैं. खरना के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है, जो छठ पर्व का सबसे कठिन और महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.
अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य
चैती छठ के तीसरे दिन 24 मार्च को व्रती नदी, तालाब या अन्य जलस्रोतों के किनारे पहुंचकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगे. यह दृश्य बेहद आस्था और भक्ति से भरा होता है. इसके अगले दिन 25 मार्च को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही महापर्व का समापन होगा. इस दौरान हवन और पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की जाएगी.
24 घंटे का रखती हैं निर्जला व्रत
मुगलसराय मानसरोवर तालाब के श्री श्री सूर्य देव मंदिर छठ पूजा सेवा न्यास के संस्थापक कृष्ण गुप्ता ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि चैती छठ पर्व की शुरुआत हो चुकी है. आज व्रती महिलाएं लौकी-भात ग्रहण कर व्रत की शुरुआत करती हैं. इसके अगले दिन वह खीर और रोटी खाकर 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं. 24 तारीख की शाम को पहला अर्घ्य दिया जाएगा, जबकि 25 तारीख की सुबह दूसरा अर्घ्य अर्पित किया जाएगा.
सभी आवश्यक पूजा सामग्री की होगी व्यवस्था
आगे उन्होंने बताया कि छठ पूजा में साफ-सफाई का विशेष महत्व होता है, जिसे ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. न्यास के सैकड़ों सदस्य मिलकर पहले अर्घ्य से पहले पूरे घाट की अच्छी तरह सफाई करेंगे और पानी से धुलाई करेंगे, ताकि व्रतियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो. साथ ही, व्रतियों के लिए गंगा जल, गाय का दूध, आम के पत्ते और मिट्टी की बेदी जैसी सभी आवश्यक पूजा सामग्री की समुचित व्यवस्था भी की गई है.
चैती छठ महापर्व आस्था और समर्पण का है प्रतीक
बता दें कि चैती छठ महापर्व आस्था, अनुशासन और समर्पण का प्रतीक है. इसमें व्रती कठिन नियमों का पालन करते हुए भगवान सूर्य की उपासना करते हैं. यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि समाज में एकता, सहयोग और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश भी देता है.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें