छोटी उम्र में छोड़ा घर, 15Kg का फरसा, गोरक्षकों की गैंग… चंद्रशेखर से ‘फरसा वाले बाबा’ की इनसाइड स्टोरी
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Chandrashekhar Murder Case LIVE: मथुरा के नवीपुर गांव के पास गौरक्षक ‘फरसा वाले बाबा’ की मौत पर कल बवाल हो गया था. पहले बताया गया कि गौतस्करों ने गाड़ी से कुचलकर बाबा को मार दिया. इससे गुस्से में गौरक्षकों ने दिल्ली-आगरा हाईवे जाम कर दिया था. हालांकि, जैसे-तैसे पुलिस ने मोर्चा संभाला और स्थिति को सामान्य किया. इसके बाद जांच में अलग मामला निकला. घटना के बाद क्षेत्र में शोक और तनाव है. आइए जानते हैं सबकुछ.

फरसा वाले बाबा हत्या मामला न्यूज लाइव.
Farsa Wale Baba Death Case News Update: कान्हा की नगरी मथुरा में ईद वाला दिन काफी हंगामा-बवाल वाला रहा. एक तरफ जहां प्रेम-सद्भाव से त्योहार मनाना था, वहीं ब्रज की सड़कों पर पत्थर, डंडे चले. दरअसल, गौरक्षकों की सेवा के लिए फेमस चंद्रशेखर सिंह उर्फ फरसा बाबा (45) की शनिवार सुबह 5 बजे एक ट्रक से कुचलकर मौत हो गई. साथियों ने दावा किया कि गोतस्करों ने ट्रक से कुचलकर बाबा की हत्या कर दी. आग की तरह खबर फैलते ही लोग सड़कों पर उतर आए और फिर दिल्ली-आगरा हाईवे जाम कर दिया. पुलिस पर पथराव किया गया. मगर, जब जांच पड़ताल की गई तो डीआईजी ने बताया कि चंद्रशेखर की मौत हादसे में हुई है. आइए जानते हैं, जिन फरसा वाले बाबा की मौत पर इतना बवाल मचा वो कौन हैं और क्या है पूरा मामला? साथ ही इस मामले से जुड़े पल-पल के अपडेट्स जानते हैं…
350 गायों की करते थे देखभाल
पिछले दिनों मथुरा में फरसा बाबा के नाम से मशहूर चंद्रशेखर सिंह ने एक यूट्यूब इंटरव्यू में कहा था कि मेरी गोशाला में 350 गाय हैं. इनकी सेवा करता हूं. जहां से भी खबर आती है कि आवारा गोमाता दिखी हैं, मैं उन्हें अपने यहां ले आता हूं. कहीं खबर आई कि गाय की मौत हो गई, तो हम उसका अंतिम संस्कार करते हैं. उसे चंदन, चुनरी, तुलसी के साथ विदा करते हैं. रात 10 से लेकर सुबह 5 बजे तक गोमाता को बचाने के लिए हाईवे पर निगरानी करता हूं. गौ-तस्करों से लड़ता हूं. यही मेरी दिनचर्या है, मेरी पहचान.
कैसे दिखते थे बाबा?
माथे पर बड़ा लाल टीका, हाथ में फरसा और गेरुआ वस्त्र… ऐसे दिखते थे फरसा बाबा. लोग कहते हैं कि उन्हें हमेशा फरसे के साथ देखा. फरसा करीब 15 किलो भारी था, इसलिए उन्हें धीरे-धीरे लोग चंद्रशेखर नहीं फरसा बाबा कहने लगे.
घर में कौन-कौन?
बाबा के भाई केशव सिंह बताते हैं कि उनके छोटे भाई की उम्र 45 साल थी. मूलरूप से फिरोजाबाद के सिरसागंज तहसील के लंगड़ा के रहने वाले थे. बाबा ने मात्र 11 वर्ष की अल्पायु में ही घर का त्याग कर दिया था. उनके निधन की खबर मिलते ही पैतृक गांव और उनके परिजन में शोक की लहर दौड़ गई है. बाबा ने शादी नहीं की है. परिवार में हम दोनों ही सगे भाई थे. 4 बेटे, 4 बहुएं, 7 पोते और 6 पोतियां हैं. हम लोग अयोध्या में रहते हैं. पहले बाबा भी हमारे साथ अयोध्या में रहते थे. जब अयोध्या की मस्जिद टूटी थी, उसी समय ये अयोध्या से मथुरा आ गए थे. एक बार हम लोग मथुरा आकर उन्हें अयोध्या ले गए थे, लेकिन, वो फिर मथुरा लौट गए थे.
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Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें