Himalayan Glaciers Melting Fast: हिमालय में दोगुनी रफ्तार से पिघल रही बर्फ, सूख जाएंगी गंगा-ब्रह्मपुत्र जैसी नदियां? क्या ये प्रलय की आहट
Himalayan Glaciers Melting Fast: हिमालय के ग्लेशियर तेजी से हम सब का हिमालय, जिसे एशिया का ‘वॉटर टावर’ कहा जाता है. वही हिमालय अब खतरे में है. हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रही है. पहले ये धीरे-धीरे बपिघल रहे थे लेकिन अब ये दोगुनी रफ्तार से पिघल रहे हैं. सवाल बड़ा है अगर यही हाल रहा तो क्या गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी जीवनदायिनी नदियां भी सूख जाएंगी? क्या यह किसी आने वाले संकट का संकेत है? हालिया रिपोर्ट चेतावनी देती है. यह सिर्फ बर्फ नहीं पिघल रही. यह आने वाले जल संकट की नींव है. करोड़ों लोगों की जिंदगी इससे जुड़ी है. खेती, पानी, अर्थव्यवस्था सब दांव पर है. यह कोई दूर की बात नहीं. यह अभी हो रहा है. और तेजी से हो रहा है.
गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन पर सबसे ज्यादा असर
- रिपोर्ट बताती है कि गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी बेसिन में ग्लेशियरों का सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. पिछले तीन दशकों में इन इलाकों में क्रमशः लगभग 21% और 16% तक ग्लेशियर क्षेत्र घटा है. ये वही नदियां हैं जिन पर भारत समेत कई देशों की बड़ी आबादी निर्भर है. अगर ग्लेशियर सिकुड़ते रहे, तो इन नदियों का जलस्तर भी प्रभावित होगा. खासकर सूखे मौसम में पानी की उपलब्धता घट सकती है.
- हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में करीब 63,000 से ज्यादा ग्लेशियर हैं. ये ग्लेशियर सिर्फ बर्फ के पहाड़ नहीं हैं. ये प्राकृतिक जल भंडार हैं. गर्मियों में यही बर्फ पिघलकर नदियों को पानी देती है. लेकिन अब यह संतुलन बिगड़ रहा है. तापमान बढ़ रहा है. बारिश का पैटर्न बदल रहा है. 5500 मीटर से नीचे के ग्लेशियर सबसे ज्यादा तेजी से पिघल रहे हैं. वहीं, दक्षिण और पूर्व की ओर मुख वाले ग्लेशियर ज्यादा तेजी से खत्म हो रहे हैं क्योंकि उन्हें ज्यादा धूप मिलती है.
सबसे ज्यादा असर उन क्षेत्रों पर पड़ेगा जो गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों पर निर्भर हैं. (फाइल फोटो AP)
ग्लेशियर इतनी तेजी से क्यों पिघल रहे हैं?
मुख्य वजह ग्लोबल वार्मिंग है. तापमान लगातार बढ़ रहा है. इसके साथ ही बारिश और बर्फबारी का पैटर्न भी बदल रहा है. कम बर्फ गिर रही है और ज्यादा पिघल रही है. इससे ग्लेशियर का संतुलन बिगड़ रहा है और वे तेजी से सिकुड़ रहे हैं.
इसका सबसे बड़ा असर किन पर पड़ेगा?
सबसे ज्यादा असर उन क्षेत्रों पर पड़ेगा जो गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों पर निर्भर हैं. इसमें भारत, नेपाल, बांग्लादेश और चीन के करोड़ों लोग शामिल हैं. खेती, पीने का पानी और बिजली उत्पादन तक प्रभावित हो सकता है.
क्या नदियां सच में सूख सकती हैं?
पूरी तरह सूखना तुरंत संभव नहीं है, लेकिन पानी का प्रवाह काफी कम हो सकता है. खासकर गर्मियों और सूखे के समय. इससे जल संकट गहरा सकता है और कई क्षेत्रों में पानी की कमी गंभीर समस्या बन सकती है.
क्या इससे आपदाओं का खतरा भी बढ़ेगा?
हां, ग्लेशियर पिघलने से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF), भूस्खलन और हिमस्खलन जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है. अचानक बाढ़ आ सकती है, जिससे जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है.