भारतीय सेना के ड्रोन वॉरियर्स को स्पेशल ट्रेनिंग, हर जवान बनेगा मास्टर, इनकी मार से बाप-बाप करेगा दुश्‍मन!

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सेना को स्पेशल ट्रेनिंग, हर जवान बनेगा ड्रोन मास्टर, बाप-बाप करेगा दुश्‍मन!

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आधुनिक युद्ध के तरीके बदल रहे हैं. जंग इंसानों से ज्यादा मशीनों से लड़ी जा रहा है. इस कड़ी में भारत ने अपना एक ‘ब्रह्मास्त्र’ तैयार कर लिया है. भारतीय सेना के हर जवान को ‘ड्रोन वॉरियर’ बनाने के लिए दी जा रही बेसिक ट्रेनिंग पूरी हो गई है. 2027 तक ‘अश्नी प्लाटून’ और ‘ईगल इन द आर्म’ प्रोजेक्ट के जरिए हर सैनिक ड्रोन वॉरियर बनाने की तैयारी की जा रही है.

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सेना को ड्रोन वॉरियर्स बनाने की तैयारी चल रही है. (Photo: Indian Army)

Indian Army Drone Training: आधुनिक युद्ध का रूप बदल चुका है. रूस-यूक्रेन युद्ध हो, पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल का खूनी संघर्ष हो, या फिर पाकिस्तान के खिलाफ भारत का ऑपरेशन सिंदूर- इन सभी में एक हथियार ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है, और वह है ड्रोन. हवा में उड़ने वाले इन साइलेंट किलर की अहमियत को समझते हुए भारतीय सेना (Indian Army) ने अपने दुश्मनों की कब्र खोदने की पूरी तैयारी कर ली है. सेना ने अपने जवानों को घातक ड्रोन वॉरियर बनाने का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है.

भारतीय सेना का हर जवान अब केवल राइफल ही नहीं, बल्कि रिमोट कंट्रोल से भी दुश्मन के परखच्चे उड़ाएगा. रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, सेना की इंफेंट्री (पैदल सेना) के हर जवान को ड्रोन की बुनियादी जानकारी और संचालन की बेसिक ट्रेनिंग दी जा चुकी है. यह सिर्फ शुरुआत है! दूसरे चरण में अब जवानों को ‘स्पेशलाइज्ड एडवांस ट्रेनिंग’ दी जा रही है. इसके लिए देश भर में विशेष ‘ड्रोन ट्रेनिंग नोड’ तैयार किए गए हैं, जिनकी संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है.

अश्नी प्लाटून: चीन-पाक के लिए नया काल

दुश्मनों पर काल बनकर टूटने के लिए भारतीय सेना ने अपनी हर इंफेंट्री बटालियन में एक स्पेशल ड्रोन प्लाटून स्थापित की है, जिसे ‘अश्नी प्लाटून’ (Ashni Platoon) का नाम दिया गया है. आपको जानकर गर्व होगा कि अब तक इंफेंट्री की 380 बटालियनों में ये अश्नी प्लाटून पूरी तरह से ऑपरेशनल हो चुकी हैं. इन प्लाटूनों को अलग-अलग मारक क्षमता वाले और अत्याधुनिक सर्विलांस ड्रोन्स से लैस किया गया है.

ईगल इन द आर्म प्रोजेक्ट

भारतीय सेना के इस पूरे ड्रोन कॉन्सेप्ट को ईगल इन द आर्म नाम दिया गया है. इसका सीधा सा मतलब है कि जिस तरह एक सैनिक अपनी बंदूक को अपने शरीर का हिस्सा मानता है और हमेशा साथ रखता है, ठीक उसी तरह भविष्य में ड्रोन भी हर सैनिक का एक बुनियादी हथियार होगा. इस विजन को साकार करने के लिए देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री अकादमी (IMA), महू के इन्फैंट्री स्कूल और चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) में विशेष ‘ड्रोन सेंटर ट्रेनिंग अकादमी’ स्थापित की गई हैं. यहां जवानों के साथ-साथ बड़े अधिकारियों को भी ड्रोन उड़ाने और दुश्मन के ड्रोन को मार गिराने (Counter-Drone System) की स्पेशल ट्रेनिंग दी जा रही है.

2027 तक सेना के सभी जवानों को ड्रोन वॉरियर्स बनाने की तैयारी है.

मल्टी-टास्किंग करेंगे ये ‘आसमानी योद्धा’

रक्षा अधिकारियों के अनुसार, सैनिकों को उनके रोल के हिसाब से ड्रोन की स्पेशल ट्रेनिंग मिल रही है:-

  1. कॉम्बैट (Combat): सीधा हमला करने और दुश्मन के लॉन्च पैड तबाह करने के लिए.
  2. सर्विलांस (Surveillance): सीमा पार घुसपैठियों की सटीक जासूसी और रेकी करने के लिए.
  3. लॉजिस्टिक्स (Logistics): दुर्गम पहाड़ियों पर फंसे जवानों तक गोला-बारूद और राशन पहुंचाने के लिए.
  4. मेडिकल (Medical Evacuation): घायल जवानों को युद्ध के मैदान से सुरक्षित निकालने के लिए.

2027 तक 100% ड्रोन इंफेंट्री

भारतीय सेना एक ऐसा ‘मल्टी-लेयर्ड सिस्टम’ तैयार कर रही है जो मानवरहित (Unmanned) प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करने और दुश्मन के ड्रोन्स को हवा में ही जाम करके तबाह करने में माहिर होगा. सेना ने लक्ष्य रखा है कि साल 2027 तक इंफेंट्री यूनिट का 100 प्रतिशत जवान ड्रोन ऑपरेशन में पूरी तरह से दक्ष हो जाएगा. जब ऐसा होगा, तो सीमा पर कोई भी नापाक हरकत करने से पहले दुश्मन की रूह कांप उठेगी.

About the Author

Deep Raj Deepak

दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें

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