chaitra navratri 2026 nine medicinal plants called navdurga | इन नौ आयुर्वेदिक औषधियों में बसती हैं नवदुर्गा, घातक बीमारियों का नाश करते हैं इनमें मौज

Share to your loved once


होमफोटोधर्म

9 आयुर्वेदिक औषधियों में बसती हैं नवदुर्गा, बड़ी से बड़ी बीमारी होती हैं खत्म

Last Updated:

Navratri 2026 Nine Medicinal Plants: नवरात्र के पावन अवसर पर देशभर में माता के 9 रूपों की आराधना की जा रही है. इसी आस्था और परम्परा के बीच एक रोचक तथ्य यह भी है कि आयुर्वेद में वर्णित 9 विशेष औषधीय पौधों में नवदुर्गा का वास माना जाता है. परम्परागत मान्यता के अनुसार ये पौधे ना केवल औषधीय गुणों से भरपूर हैं, बल्कि इन्हें देवी के 9 स्वरूपों से भी जोड़ा गया है.

Navratri 2026 Nine Medicinal Plants: हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है और इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग अलग स्वरूपों की पूजा अर्चना की जाती है. शास्त्रों में बताया गया है कि संपूर्ण सृष्टि को मां दुर्गा से ही ऊर्जा मिलती है. आज जो भी कुछ भी चल रहा है, हवा से लेकर आपकी सांस तक, सूर्य-चंद्र समेत सभी ग्रहों को माता से ही ऊर्जा मिलती है और उसी ऊर्जा से पूरा ब्रह्मांड चलता है. माता रानी के कई स्वरूप हैं और उनमें से एक प्रकृति भी है. आयुर्वेद के प्राचीन ग्रन्थों के अनुसार, ऐसी नौ आयुर्वेदिक औषधियों के पौधों हैं, जिनमें मां दुर्गा का वास माना जाता है. ये पौधे ना केवल बड़ी से बड़ी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से राहत प्रदान करते हैं बल्कि इनके पूजन से पर्सनल व प्रफेशनल लाइफ की चिंताओं को भी दूर करते हैं. आइए जानते हैं किन 9 आयुर्वेदिक औषधियों में माता रानी का वास माना जाता है.

नवरात्र के नौ दिनों में पूजी जाने वाली नवदुर्गा केवल आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे हमारे जीवन में स्वास्थ्य और संतुलन का भी संदेश देती हैं. इन नौ देवियों का संबंध नौ आयुर्वेदिक औषधीय पौधों से जोड़ा गया है, जो तन और मन दोनों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं. नवरात्र के दौरान इन 9 आयुर्वेदिक औषधियों का स्मरण यह संदेश भी देता है कि प्रकृति, आराधना और आरोग्य एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं और नवदुर्गा की कृपा इन पवित्र पौधों के माध्यम से भी प्राप्त की जा सकती है.

पहले दिन पूजी जाने वाली मां शैलपुत्री का संबंध हरड़ से माना जाता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत करने और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करती है. दूसरे दिन पूजी जाने वाली मां ब्रह्मचारिणी का संबंध ब्राह्मी से माना जाता है. यह पौधा दिमाग को तेज करने और तनाव कम करने में बेहद उपयोगी है. तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को पूजा जाता है. इनसे जुड़ा चंद्रसूर पौधा पेट को ठंडक देता है और गैस, कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है.

Add News18 as
Preferred Source on Google

चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा होती है. इनका संबंध कुम्हड़ा (पेठा) से माना जाता है, जो शरीर को ठंडक देता है और ऊर्जा प्रदान करता है. पांचवें दिन पूजी जाने वाली स्कंदमाता का संबंध अलसी से जुड़ा है, जो शरीर में वात-पित्त को संतुलित रखती है और दिल की सेहत के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है. छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है, जिनका संबंध मोइया से है. यह औषधीय पौधा कफ और पित्त से जुड़ी समस्याओं में राहत देता है.

सातवें दिन पूजी जाने वाली मां कालरात्रि का संबंध नागदौन से है, जो अपने शक्तिशाली औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है और कई तरह के संक्रमण से बचाने में मदद करता है. आठवें दिन महागौरी की पूजा की जाती है, जिनका संबंध तुलसी के पौधे से है. तुलसी को आयुर्वेद में अमृत समान माना गया है, जो इम्यूनिटी बढ़ाने और बीमारियों से रक्षा करने में अहम भूमिका निभाती है. वहीं नौवें दिन पूजी जाने वाली मां सिद्धिदात्री का संबंध शतावरी से है, जो शरीर की कमजोरी को दूर कर ताकत और ऊर्जा प्रदान करती है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP